{"_id":"68bc75931dde924eb802aa14","slug":"paryushan-festival-2025-shravaks-kept-fast-and-worshipped-in-jain-temples-tied-anant-sutra-2025-09-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"पर्यूषण पर्व : श्रावकों ने व्रत रखकर जैन मंदिरों में किया पूजन, बांधे अनंत सूत्र; 108 कलशों से महामस्तकाभिषेक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पर्यूषण पर्व : श्रावकों ने व्रत रखकर जैन मंदिरों में किया पूजन, बांधे अनंत सूत्र; 108 कलशों से महामस्तकाभिषेक
Sat, 06 Sep 2025 11:25 PM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Sat, 06 Sep 2025 11:25 PM IST
सार
पर्यूषण पर्व के समापन पर भगवान पार्वश्वनाथ का पंचामृत से पूरित 108 कलशों से महामस्तकाभिषेक किया गया। जैन अचार्यों ने उत्तम ब्रह्मचर्य को श्रेष्ठ व्रत बताया।
विज्ञापन
पंचायती जैन मंदिर में महामस्तकाभिषेक हुआ।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अनंत चतुर्दशी पर शनिवार को पर्यूषण पर्व की पूर्णाहुति हुई। श्रावकों ने उपवास रखकर जैन मंदिरों में तीर्थंकरों का दर्शन-पूजन किया। ग्वालदास साहू लेन स्थित पंचायती जैन मंदिर में विविध अनुष्ठान के साथ भगवान पार्श्वनाथ का पंचामृत से पूरित 108 कलशों से महामस्तकाभिषेक हुआ।
विज्ञापन
जैन मंदिरों में सुबह से ही दर्शन करने के लिए दिगंबर धर्मावलंबियों की भीड़ रही। केसरिया वस्त्र में महिलाएं और पुरुष भगवान की पूजन और अभिषेक किया। 108 स्वर्ण और रजत कलश भरे जल से तीर्थंकरों का अभिषेक किया। पंचायती जैन मंदिर में शाम को सैकड़ों साल पुरानी परंपरा को निभाते हुए शहर भर से पहुंचे जैन श्रद्धालुओं ने सामूहिक पंचाभिषेक किया।
विज्ञापन
आचार्य सुरेंद्र कुमार जैन का उत्तम ब्रह्मचर्य पर प्रवचन हुआ। उन्होंने कहा कि आत्मा में रमण करना ब्रह्मचर्य है। भेलूपुर जैन मंदिर में विदुषी डॉ. मुन्नी पुष्पा जैन ने कहा कि अपने आत्मा अर्थात ब्रह्म में लीनता ही उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म है।
विज्ञापन
प्रो. फूलचंद्र जैन प्रेमी ने खोजवां जैन मंदिर में प्रवचन दिया। पूजन में दिगंबर जैन समाज काशी के प्रधानमंत्री प्रदीप चंद्र जैन, अध्यक्ष आरसी जैन, उपाध्यक्ष राकेश जैन, संजय जैन, मंत्री विनोद जैन, स्वामित्र जैन आदि शामिल रहे।
तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य का निर्वाण दिवस व मोक्ष कल्याणक दिवस भी मनाया गया। भगवान सुपार्श्वनाथ की जन्मस्थली स्थित भदैनी दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र में सुबह वासुपूज्य का पूजन, अभिषेक किया गया। शांतिधारा कर विश्व शांति और आत्म कल्याण की कामना की गई।