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काशी विद्यापीठ में आकार लेने लगा पर्यावरण कुंभ का नजारा, होगा बहुत कुछ खास
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Thu, 29 Nov 2018 11:25 AM IST
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एक और दो दिसंबर को होगा पर्यावरण कुंभ
- फोटो : amar ujala
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में पर्यावरण कुंभ का नजारा आकार लेने लगा है। विश्वविद्यालय के क्रीड़ा मैदान में पर्यावरण कुंभ के मद्देनजर तीन विशाल टेंट बनाए जा रहे हैं। जर्मन हैंगर की तर्ज मुख्य पंडाल तीन हजार लोगों के लिए बनाया जा रहा है।
वहीं दो विशाल टेंट प्रदर्शनी के लिहाज से बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा एक प्लेनेटोनियम डोम भी इसका मुख्य आकर्षण होगा, जहां पर्यावरण से संबंधित फिल्म दिखाई जाएगी। एक व दो दिसंबर को आयोजित पर्यावरण कुंभ के उद्घाटन अवसर पर उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा व केंद्रीय संस्कृति मंत्री डॉ. महेश शर्मा की खास मौजूदगी रहेगी।
देश विदेश से कई वैज्ञानिक व पर्यावरणविद की शिरकत भी हो रही है। इसमें नेशनल म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री की निदेशिका नाज रिजवी के साथ वहां के वैज्ञानिक शक्ति कुमार और सीआर मंगेश आ रहे हैं। प्रदर्शनी में इनकी अहम भागीदारी होगी। इसके अलावा सीएसआईआर के नेशनल बॉटेनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट की ओर से भी प्रदर्शनी व बुक स्टाल लगाए जा रहे हैं।
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वहीं दो विशाल टेंट प्रदर्शनी के लिहाज से बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा एक प्लेनेटोनियम डोम भी इसका मुख्य आकर्षण होगा, जहां पर्यावरण से संबंधित फिल्म दिखाई जाएगी। एक व दो दिसंबर को आयोजित पर्यावरण कुंभ के उद्घाटन अवसर पर उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा व केंद्रीय संस्कृति मंत्री डॉ. महेश शर्मा की खास मौजूदगी रहेगी।
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देश विदेश से कई वैज्ञानिक व पर्यावरणविद की शिरकत भी हो रही है। इसमें नेशनल म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री की निदेशिका नाज रिजवी के साथ वहां के वैज्ञानिक शक्ति कुमार और सीआर मंगेश आ रहे हैं। प्रदर्शनी में इनकी अहम भागीदारी होगी। इसके अलावा सीएसआईआर के नेशनल बॉटेनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट की ओर से भी प्रदर्शनी व बुक स्टाल लगाए जा रहे हैं।
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प्रतियोगिताएं, नुक्कड़ नाटक, नृत्य नाटिका होगा आकर्षण
चल रही तैयारियां
- फोटो : amar ujala
पर्यावरण कुंभ के मद्देनजर कई प्रतियोगिताएं भी कराई जा रही हैं। इसमें ऑनलाइन फोटोग्राफी, कार्टून, निबंध, कविता और स्लोगन प्रतियोगिता चल रही है। पर्यावरण कुंभ की वेबसाइट पर लोग अपनी फोटोग्राफी, कार्टून, निबंध, कविताएं और स्लोगन भेज रहे हैं और प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे हैं।
इसके अलावा इस कुंभ के सांस्कृतिक सत्र में नृत्य नाटिका, नाटक का मंचन भी किया जा रहा है। ये सभी कार्यक्रम पर्यावरण से संबंधित होंगे। कठपुतली भी इसका खास आकर्षण होगा। इसके अलावा पेंटिंग प्रतियोगिता भी होनी है, जिसमें लिभुआनिया के कलाकार शिरकत कर रहे हैं।
इसके अलावा इस कुंभ के सांस्कृतिक सत्र में नृत्य नाटिका, नाटक का मंचन भी किया जा रहा है। ये सभी कार्यक्रम पर्यावरण से संबंधित होंगे। कठपुतली भी इसका खास आकर्षण होगा। इसके अलावा पेंटिंग प्रतियोगिता भी होनी है, जिसमें लिभुआनिया के कलाकार शिरकत कर रहे हैं।
संकल्पों से बंध रही पर्यावरण संरक्षण की डोर
काशी विद्यापीठ में होने वाले इस पर्यावरण कुंभ में पर्यावरण के हल तलाशे जाएंगे। इसके लिए सबसे पहले लोगों को पर्यावरण कुंभ से जोड़ने की मुहिम की गई है। जन सहभागिता के तौर पर इस कुंभ से देश भर के लोगों को जोड़ाने के लिए संकल्पों से बांधा जा रहा है।
इसमें अन्न की बर्बादी रोकने से लेकर प्लास्टिक से मुक्ति, कागज का कम इस्तेमाल करने, नदी व तालाब में साबुन का इस्तेमाल न करने, पानी का दुरुपयोग रोकने, जैविक खाद का इस्तेमाल करने का संकल्प लेने का आह्वान किया गया है। इसके लिए लोगों को पर्यावरण कुंभ की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन संकल्प लेना है।
इसमें अन्न की बर्बादी रोकने से लेकर प्लास्टिक से मुक्ति, कागज का कम इस्तेमाल करने, नदी व तालाब में साबुन का इस्तेमाल न करने, पानी का दुरुपयोग रोकने, जैविक खाद का इस्तेमाल करने का संकल्प लेने का आह्वान किया गया है। इसके लिए लोगों को पर्यावरण कुंभ की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन संकल्प लेना है।