{"_id":"6911e335b9b95bc440096b87","slug":"panchayat-prahlad-chacha-faisal-malik-will-participate-in-photo-exhibition-vaaranasi-held-at-assi-ghat-2025-11-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"काशी आएंगे पंचायत के प्रह्लाद चाचा: चित्र प्रदर्शनी में हिस्सा लेंगे फैसल मलिक, अस्सी घाट पर होगा आयोजन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
काशी आएंगे पंचायत के प्रह्लाद चाचा: चित्र प्रदर्शनी में हिस्सा लेंगे फैसल मलिक, अस्सी घाट पर होगा आयोजन
Mon, 10 Nov 2025 06:36 PM IST
अमन विश्वकर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Mon, 10 Nov 2025 06:36 PM IST
सार
Varanasi News: वाराणसी में में आगामी 15 नवंबर को आयोजित चित्र प्रदर्शनी में फैसल मलिक आएंगे। उनके साथ कई नामचीन शख्स भी रहेंगे। आयोजक, कल आज और कल के अपूर्व पांडेय ने इसकी जानकारी दी है।
विज्ञापन
फैसल मलिक।
- फोटो : एक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
Faisal Malik Varanasi Visit: घाटों, मंत्रों और अनंत हलचल से भरे इस शहर की आत्मा अब एक कलाकार की दृष्टि से उभरने जा रही है। भारत के विख्यात समकालीन चित्रकार डॉ. अनुनय चौबे की आगामी चित्र प्रदर्शनी 'कल आज और कल' 15 नवंबर 2025 को अस्सी घाट में आयोजित की जाएगी।
विज्ञापन
इस प्रदर्शनी में कला, शब्द और अभिव्यक्ति के विभिन्न रूपों का संगम देखने को मिलेगा। इस अवसर पर प्रसिद्ध अभिनेता फैसल मलिक, चर्चित कवि व उपन्यासकार नीलोत्वल मृणाल और प्रसिद्ध लेखक व पटकथा लेखक विशाल वैभव की उपस्थिति रहेगी।
विज्ञापन
यह प्रदर्शनी बनारस के उन जीवंत, साधारण और फिर भी रहस्यमय दृश्यों को कैनवास पर उतारती है। डॉ. चौबे की कलाकृतियां साधारण क्षणों में छिपे असाधारण भावों को उजागर करती हैं। बनारस की लय, गति और ठहराव का एक गूढ़ चित्रण।
विज्ञापन
डॉ. अनुनय चौबे एक प्रख्यात चित्रकार, शिक्षाविद और चिंतक हैं, जिनकी कला मानवीय अनुभवों और सामूहिक भावनाओं की गहराई में उतरती है। उनकी पेंटिंग्स जीवन, स्थान और रिश्तों के जटिल ताने-बाने को संवेदनशीलता और सादगी के साथ प्रस्तुत करती हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में, वे कला प्रशंसा पर आधारित एक अनोखा पाठ्यक्रम कई प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाते हैं, जो कला को विज्ञान, इतिहास, राजनीति, मनोविज्ञान और अर्थशास्त्र से जोड़ता है। इस विश्वास के साथ कि कला जीवन से अलग नहीं, बल्कि उसका विस्तार है।