{"_id":"c22a27554d8f02d990435052f163d6f7","slug":"padmashree-to-2-people-of-varanasi-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पद्म पुरस्कारों के गुलदस्ते में काशी के भी दो पुष्प","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पद्म पुरस्कारों के गुलदस्ते में काशी के भी दो पुष्प
Updated Mon, 26 Jan 2015 02:11 AM IST
विज्ञापन
कला और साहित्य के क्षेत्र में काम करने वाली काशी की दो हस्तियों को गणतंत्र पर्व की पूर्व संध्या पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पद्मश्री अलंकरण देने की घोषणा की है।
बिमला पोद्दार
कला संस्कृति के संरक्षण के लिए काम करने वाली बिमला पोद्दार पद्मश्री सम्मान से नवाजे जाने की खुशी रविवार की शाम अपने शुभचिंतकों से भी नहीं बांट सकीं। कला-संस्कृति पर शोध और अध्ययन के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था ज्ञान प्रवाह की मैनेजिंग ट्रस्टी आंख के आपरेशन के चलते वो इन दिनों मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें पद्म सम्मान मिलने के बाद तमाम लोगों ने बधाई देने के लिए संपर्क साधा लेकिन अस्पताल में होने और चिकित्सकों की सलाह की वजह से उन्होंने बात नहीं की। राजस्थान के चिरावा स्थित कपड़ा व्यवसायी परिवार में जन्म लेने वाली बिमला का जीवन संघर्षों से भरा रहा है।
पिता सत्यनारायण सेक्षरिया ने बिमला की शादी कोलकाता के एक मारवाड़ी परिवार में की लेकिन कम समय में ही पति का निधन हो गया। अपने जेठ सुरेश नेवटिया की प्रेरणा से उन्होंने भारतीय कला के विविध पहलुओं की खोज शुरू की। इसके लिए संस्कृति की नगरी काशी का उन्होंने रुख किया। वर्ष 1997 में नगवा के पास गंगा किनारे ज्ञान प्रवाह की स्थापना की।
विज्ञापन
मनु शर्मा
मनु शर्मा पीएम नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान के नवरत्नों में से एक हैं। फैजाबाद से लगे अकबरपुर में वर्ष 1928 में ब्राह्मण परिवार में इनका जन्म हुआ। सिर्फ तीन महीने की उम्र में ही पिता के साथ वो काशी चले आए । बचपन का इनका नाम हनुमान प्रसाद शर्मा है लेकिन लेखन इन्होंने मनु के नाम से शुरू किया। 1945 में पताका में पहला लेख प्रकाशित हुआ। इसके बाद तो लेखन की धारा सी बह निकली।
1956 में मनु शर्मा का पहला उपन्यास ‘तीन प्रश्न’ प्रकाशित हुआ। इसके बाद आठ खंडों में कृष्ण की आत्मकथा, द्रोण की आत्मकथा समेत 25 से अधिक कृतियों की इन्होंने रचना की। पद्मश्री सम्मान मिलने के बाद अमर उजाला से बातचीत में वो बेहद भावुक नजर आए। कहा कि इदम कृष्णाय नम: । यह आदर कृष्ण का है मेरा नहीं।
विज्ञापन
बिमला पोद्दार
कला संस्कृति के संरक्षण के लिए काम करने वाली बिमला पोद्दार पद्मश्री सम्मान से नवाजे जाने की खुशी रविवार की शाम अपने शुभचिंतकों से भी नहीं बांट सकीं। कला-संस्कृति पर शोध और अध्ययन के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था ज्ञान प्रवाह की मैनेजिंग ट्रस्टी आंख के आपरेशन के चलते वो इन दिनों मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें पद्म सम्मान मिलने के बाद तमाम लोगों ने बधाई देने के लिए संपर्क साधा लेकिन अस्पताल में होने और चिकित्सकों की सलाह की वजह से उन्होंने बात नहीं की। राजस्थान के चिरावा स्थित कपड़ा व्यवसायी परिवार में जन्म लेने वाली बिमला का जीवन संघर्षों से भरा रहा है।
विज्ञापन
पिता सत्यनारायण सेक्षरिया ने बिमला की शादी कोलकाता के एक मारवाड़ी परिवार में की लेकिन कम समय में ही पति का निधन हो गया। अपने जेठ सुरेश नेवटिया की प्रेरणा से उन्होंने भारतीय कला के विविध पहलुओं की खोज शुरू की। इसके लिए संस्कृति की नगरी काशी का उन्होंने रुख किया। वर्ष 1997 में नगवा के पास गंगा किनारे ज्ञान प्रवाह की स्थापना की।
विज्ञापन
मनु शर्मा
मनु शर्मा पीएम नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान के नवरत्नों में से एक हैं। फैजाबाद से लगे अकबरपुर में वर्ष 1928 में ब्राह्मण परिवार में इनका जन्म हुआ। सिर्फ तीन महीने की उम्र में ही पिता के साथ वो काशी चले आए । बचपन का इनका नाम हनुमान प्रसाद शर्मा है लेकिन लेखन इन्होंने मनु के नाम से शुरू किया। 1945 में पताका में पहला लेख प्रकाशित हुआ। इसके बाद तो लेखन की धारा सी बह निकली।
1956 में मनु शर्मा का पहला उपन्यास ‘तीन प्रश्न’ प्रकाशित हुआ। इसके बाद आठ खंडों में कृष्ण की आत्मकथा, द्रोण की आत्मकथा समेत 25 से अधिक कृतियों की इन्होंने रचना की। पद्मश्री सम्मान मिलने के बाद अमर उजाला से बातचीत में वो बेहद भावुक नजर आए। कहा कि इदम कृष्णाय नम: । यह आदर कृष्ण का है मेरा नहीं।