Padma Awards 2021: पद्मश्री सम्मान पाकर गौरवांवित हुई काशी, इन लोगों को ज्ञान, सेवा और कृषि में पुरस्कार
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धर्म, कला और संस्कृति की नगरी काशी फिर से गौरवांवित हुई है। काशी को मिले तीन पद्मश्री सम्मान ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या को और खुशियों से भर दिया। भारत सरकार ने इस बार काशी की ज्ञान, सेवा और कृषि को पद्मश्री देकर सम्मानित किया है। व्याकरण के उद्भट विद्वान व काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष प्रो. रामयत्न शुक्ल, समाजसेवी डोमराजा जगदीश चौधरी और किसान चंद्रशेखर सिंह को पद्मश्री सम्मान दिया जाएगा। पद्मश्री सम्मान की घोषणा होते ही बधाई देने वालों का तांता लगा रहा है। खास बात यह है कि तीनों नाम प्रशासन की ओर से भेजी गई सूची से अलग हैं। हालांकि अन्य श्रेणी में बनारस से कोई नाम शामिल नहीं है।
खुद को दीन-हीन ना समझें संस्कृत के छात्र
पद्मश्री सम्मान मिलने के बाद प्रो. रामयत्न शुक्ल ने कहा कि यह सम्मान संस्कृत का है। उन्होंने संस्कृत के छात्रों को संदेश देते हुए कहा कि वह स्वयं को दीन-हीन ना समझें। पारंपरिक शास्त्रों के अध्ययन में निष्ठा के साथ लगे रहें। उन्होंने संस्कृत शिक्षकों को संदेश देते हुए कहा कि अगर वह निष्ठा के साथ अध्यापन में लगे हुए हैं तो कोई भी सम्मान व पुरस्कार दुर्लभ नहीं है। नई शिक्षा नीति में संस्कृत को आधार बनाकर जो परिवर्तन किए गए हैं उससे भारत की शिक्षा का विकास होगा।
सरकार इसको रोजगार से जोड़े और सभी विश्वविद्यालय व महाविद्यालयों में संस्कृत के विभागों की स्थापना हो। काशी विद्वत परिषद के मंत्री पं. दीपक मालवीय, प्रो. रामनारायण द्विवेदी, केंद्रीय ब्राह्मण महासभा के सतीश चंद्र मिश्रा, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल, काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो.टीएन सिंह समेत शहर के विद्वानों ने प्रो. शुक्ल को सम्मान मिलने पर बधाई दी और आशीर्वाद भी लिया। खोजवां के रहने वाले काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष और राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित प्रो. रामयत्न शुक्ल व्याकरण के प्रकांड विद्वान हैं। उत्तर प्रदेश नागकूप शास्त्रार्थ समिति एवं सनातन संस्कृति संवर्धन परिषद की स्थापना करके काशी की परंपरा व संस्कृति के संवर्धन में इनका महत्वपूर्ण योगदान है।
प्रगतिशील किसान के सम्मान से किसान हुए गौरवांवित
प्रगतिशील किसान चंद्रशेखर सिंह को पद्मश्री सम्मान की घोषणा से किसानों में खुशी का माहौल है। उन्नतशील बीज तैयार करके उसको कई राज्यों के किसानों तक पहुंचाने वाले वाराणसी के टड़िया गांव के किसान चंद्रशेखर सिंह को उनके कृषि विकास के कार्यों के लिए पद्मश्री से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। आराजीलाइन विकास खंड के टड़िया गांव रहने वाले प्रगतिशील किसान चंद्रशेखर सिंह विरासत में मिले बीज तैयार करने वाले काम को आगे बढ़ा रहे हैं। वह उन्नतशील बीज तैयार करे कई राज्यों के किसानों तक पहुंचाते है। इसमें गेहूं और धान के बीज मुख्य हैं। शिक्षक की नौकरी से त्यागपत्र देकर खेती-बाड़ी करने वाले पिता शीतला सिंह के काम को चंद्रशेखर सिंह आगे बढ़ा रहे हैं। कृषि क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए उन्हें कई मंचों पर सम्मान मिल चुका है।
अंतिम संस्कार करने वालों के मुखिया थे डोमराजा
काशी के डोमराजा जगदीश चौधरी को मरणोपरांत पद्मश्री से सम्मानित करने की घोषणा से हर वर्ग में खुशी की लहर है। समाजसेवी स्व. जगदीश चौधरी साल 2019 के चुनाव में प्रधानमंत्री के प्रस्तावक थे। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर तमाम पीढ़ियों से हिंदू धर्म के लोगों का अंतिम संस्कार डोम समाज के लोग ही करते आ रहे हैं। समाज के एक हजार से अधिक लोग वाराणसी के इन्हीं घाटों के आसपास रहते हैं। जगदीश चौधरी अंतिम संस्कार करने वाले लोगों के मुखिया थे। डोम राजा के तौर पर जगदीश चौधरी घाट पर होने वाले विवादों को सुलझाते थे। इसके अलावा डोम समाज के लोगों द्वारा शव जलाने की बारी का निर्णय भी वही करते थे। वह काशी की संस्कृति में रचे बसे थे और सनातन परंपरा के वाहक थे। उन्होंने जीवनपर्यंत सामाजिक समरसता के लिए काम किया।