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Padma Awards: पं. छन्नूलाल मिश्र को मिला पद्म विभूषण सम्मान, कल बनारस को मिलेंगे तीन और पद्मश्री
Mon, 08 Nov 2021 03:55 PM IST
उत्पल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: उत्पल कांत
Updated Mon, 08 Nov 2021 03:55 PM IST
सार
राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में महामहिम रामनाथ कोविंद ने कला के क्षेत्र में दिए गए योगदान के लिए पं. छन्नूलाल मिश्र को पद्म विभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया।
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पं. छन्नूलाल मिश्र को मिला पद्म विभूषण सम्मान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
किराना घराना, बनारस गायकी और ठुमरी के लब्धप्रतिष्ठ गायक पद्म भूषण अलंकरण से सम्मानित पं. छन्नूलाल मिश्र अब पद्म विभूषण से भी सम्मानित हो गए। सोमवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में महामहिम रामनाथ कोविंद ने कला के क्षेत्र में दिए गए योगदान के लिए पं. छन्नूलाल मिश्र को पद्म विभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया। समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहे।
इस सम्मान की घोषणा पहले ही की जा चुकी थी लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण समारोह का आयोजन नहीं किया गया था। सोमवार को राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक दरबार हॉल में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट काम करने वाले 141 लोगों को वर्ष 2020 का पद्म पुरस्कार प्रदान किया।
भारत रत्न के बाद देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म पुरस्कार मंगलवार को भी प्रदान किए जाएंगे। मंगलवार को 2021 के लिए 119 लोगों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा।
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इस सम्मान की घोषणा पहले ही की जा चुकी थी लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण समारोह का आयोजन नहीं किया गया था। सोमवार को राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक दरबार हॉल में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट काम करने वाले 141 लोगों को वर्ष 2020 का पद्म पुरस्कार प्रदान किया।
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भारत रत्न के बाद देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म पुरस्कार मंगलवार को भी प्रदान किए जाएंगे। मंगलवार को 2021 के लिए 119 लोगों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा।
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इन तीन लोगों मिलेगा पद्मश्री सम्मान
प्रो. रामयत्न शुक्ल, किसान चंद्रशेखर सिंह और डोमराजा स्व. जगदीश चौधरी
- फोटो : अमर उजाला
जिसमें काशी की तीन विभूतियों को पद्मश्री सम्मान दिया जाएगा। इसमें प्रो. रामयत्न शुक्ल, किसान चंद्रशेखर सिंह और डोमराजा स्व. जगदीश चौधरी शामिल हैं। काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष प्रो. रामयत्न शुक्ल को संस्कृत की सेवा के लिए पुरस्कृत किया जा रहा है।
वहीं किसान चंद्रशेखर सिंह को कृषि क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए पद्मश्री सम्मान दिया जाएगा। डोम राजा स्व. जगदीश चौधरी को मरणोपरांत पद्म श्री सम्मान दिया जाएगा। उनके पुत्र ओम चौधरी (16) राष्ट्रपति द्वारा नौ नवंबर को राष्ट्रपति भवन में पद्मश्री सम्मान ग्रहण करेंगे।
वहीं किसान चंद्रशेखर सिंह को कृषि क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए पद्मश्री सम्मान दिया जाएगा। डोम राजा स्व. जगदीश चौधरी को मरणोपरांत पद्म श्री सम्मान दिया जाएगा। उनके पुत्र ओम चौधरी (16) राष्ट्रपति द्वारा नौ नवंबर को राष्ट्रपति भवन में पद्मश्री सम्मान ग्रहण करेंगे।
देश-दुनिया में प्रसिद्ध हैं पं. छन्नूलाल मिश्र
पद्मभूषण पं. छन्नूलाल मिश्र
पं. छन्नूलाल मिश्र को इससे पूर्व 31 मार्च 2010 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी पाटिल ने पद्मभूषण से अलंकृत किया था। वह शास्त्रीय संगीत के चंद ऐसे कलाकारों में हैं जिन्हें पद्मश्री के बजाय पद्मभूषण प्रदान किया गया। पद्मभूषण के बाद पद्मविभूषण सम्मान मिलने से बनारस घराने के सम्मान में बढ़ोतरी हुई है। पं. छन्नूलाल मिश्र को खयाल, ठुमरी, भजन, दादरा, कजरी और चैती जैसे लोकगीत विधाओं के गायन के लिए देश-दुनिया में जाना जाता है।
तीन अगस्त 1936 को आजमगढ़ में जन्मे पं. छन्नूलाल मिश्र को वर्ष 2010 में पद्मभूषण और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार व यश भारती से भी सम्मानित किया जा चुका है। छन्नूलाल मिश्र ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन में शीर्ष ग्रेड कलाकार रह चुके हैं। वह संस्कृति मंत्रालय के सदस्य भी रहे हैं।
उनके दादा गुदई महाराज शांता प्रसाद प्रसिद्ध संगीतकार थे। छह साल की उम्र से ही पं. मिश्र ने अपने पिता बद्री प्रसाद मिश्र से संगीत की शिक्षा लेनी शुरू कर दी थी। किराना घराने के उस्ताद अब्दुल गनी खान से भी उन्होंने शिक्षा ली।
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तीन अगस्त 1936 को आजमगढ़ में जन्मे पं. छन्नूलाल मिश्र को वर्ष 2010 में पद्मभूषण और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार व यश भारती से भी सम्मानित किया जा चुका है। छन्नूलाल मिश्र ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन में शीर्ष ग्रेड कलाकार रह चुके हैं। वह संस्कृति मंत्रालय के सदस्य भी रहे हैं।
उनके दादा गुदई महाराज शांता प्रसाद प्रसिद्ध संगीतकार थे। छह साल की उम्र से ही पं. मिश्र ने अपने पिता बद्री प्रसाद मिश्र से संगीत की शिक्षा लेनी शुरू कर दी थी। किराना घराने के उस्ताद अब्दुल गनी खान से भी उन्होंने शिक्षा ली।
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