सम्मान: IMS BHU के प्रो. श्यामसुंदर समेत तीन सम्मानित, प्रो. मंगला ने भी दी है सेवा; इन्हें मिला पद्मविभूषण
Varanasi News: वाराणसी की तीन हस्तियों को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद्म सम्मान से सम्मानित किया। प्रो. एन. राजम को पद्मविभूषण, प्रो. मंगला कपूर और श्यामसुंदर अग्रवाल को पद्मश्री मिला। प्रो. अग्रवाल को कालाजार उन्मूलन में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। छह वर्षों बाद काशी से तीन लोगों को पद्म सम्मान मिला है।
विस्तार
Varanasi News: आईएमएस बीएचयू के इमेरिटस प्रोफेसर श्यामसुंदर अग्रवाल समेत तीन लोगों को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने पद्मसम्मान से नवाजा। राष्ट्रपति भवन में आयोजित सम्मान समारोह में बीएचयू संगीत एवं मंच कला संकाय में प्रोफेसर रहीं प्रो. एन. राजम को पद्मविभूषण मिला, तो महिला महाविद्यालय के संगीत विभाग में प्रोफेसर रहीं प्रो. मंगला कपूर ने पद्मश्री पाकर काशी का मान बढ़ाया।
चिकित्सा क्षेत्र से कालाजार उन्मूलन की दिशा में अहम भूमिका निभाने वाले आईएमएस बीएचयू के मेडिसिन विभाग के डिस्टिंग्विश्ड प्रोफेसर श्यामसुंदर अग्रवाल ने भी राष्ट्रपति के हाथों पद्मश्री सम्मान ग्रहण किया। इसी साल गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म सम्मान पाने वालों की घोषणा हुई थी।
पिछले छह वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है जब काशी से पद्म सम्मान तीन लोगों कर मिला है। अमर उजाला से बातचीत में प्रो. श्यामसुंदर ने इसे काशी विश्वनाथ का आशीर्वाद बताते हुए कहा कि राष्ट्रपति के हाथों सम्मान पाना बड़ी उपलब्धि है।
ये विभूतियां सम्मानित
प्रो. एनराजम : पद्मविभूषण पाने वाली प्रो. एन. राजम ने बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय में 38 वर्षों तक सेवा दी। मूल रूप से केरल निवासी प्रो. एन. राजम ने1959 में बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय में प्रवक्ता के रूप में सेवा शुरू की थी। इसके 42 साल पहले वर्ष 1984 में उनको पद्मश्री सम्मान मिला था।
प्रो. मंगला कपूर : बीएचयू के संगीत विभाग में 1989 में शिक्षक के रूप में सेवा शुरू की। 12 साल की उम्र में पारिवारिक दुश्मनी की वजह से उनपर एसिड अटैक हुआ था। छह साल पर अस्पताल में रहीं। उनके 36 ऑपरेशन हुए। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उनकी आत्मकथा सीरत उनकी उपलिब्धयों का सजीव दस्तावेज है। इस पर फिल्म भी बनाई गई।
प्रो. श्यामसुंदर अग्रवाल : आईएमएस बीएचयू के मेडिसिन विभाग के डिस्टिंग्विश्ड प्रोफेसर श्यामसुंदर अग्रवाल मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी है। बीएचयू से 1972 में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू की।कालाजार जैसी गंभीर बीमारी के उन्मूलन की दिशा में काम करने के लिए पद्मश्री सम्मान मिला है।