Ganga: गंगा की बदहाली से हवा-जल में कम होगा ऑक्सीजन, नदी विज्ञानी ने किया शोध; पढ़ें- क्यों पड़ रही इतनी गर्मी
Varanasi News: गंगा का पानी सिमटता जा रहा है। कई जिलों में बीच के रेत दिखने लगे हैं। इस कारण गंगा बेसिन में वातावरण तेजी से बदल रहा है। नदी विज्ञानी प्रो. यूके चौधरी ने गंगा में ऑक्सीजन और अन्य बदलाव को लेकर इस पर शोध किया। उनके शोध में कई गंभीर परिणाम सामने आए।
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गंगा के दोहन से गंगा बेसिन में वातावरण तेजी से बदल रहा है। साल दर साल वातावरण गर्म होता जा रहा है। ज्यों-ज्यों गंगा बदहाल होती जाएंगी उसी हिसाब से हवा और पानी में ऑक्सीजन की मात्रा भी घटेगी। देश में पड़ने वाली गर्मी दमघोंटू हो जाएगी। समय रहते अगर हमने इस पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले सालों में स्थितियां और भी भयावह हो जाएंगी।
यह कहना है बीएचयू के नदी विज्ञानी प्रो. यूके चौधरी का। उन्होंने गंगा नदी पर अपनी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि पिछले 50 सालों में गंगा के स्वरूप में तेजी से बदलाव हुआ है। यही कारण है कि इस बार गंगा बेसिन का इलाका सबसे अधिक गर्म रहा।
गंगाजल में 16 पीपीएम ऑक्सीजन होता है जो कि संसार के किसी भी जल में नहीं है। टेहरी डैम कमेटी के सदस्य रह चुके प्रो. यूके चौधरी का कहना है कि गंगा जब गोमुख से निकलती है तो इसमें ऑक्सीजन का स्तर 16 पीपीएम तक होता है और बनारस पहुंचते-पहुंचते यह 4-6 पीपीएम तक पहुंच जा रहा है।
देश का सबसे बड़ा नदी बेसिन गंगा का है लेकिन यहां पर फिलहाल कुल क्षमता से आधे से भी यानी 41.2 फीसदी पानी ही मौजूद है। गंगा नदी 11 राज्यों में करीब 2.86 लाख गांवों को सिंचाई और पीने के पानी देती है, लेकिन अब यह मात्रा घटती जा रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर गंगा नदी को बचाने का आग्रह किया है।
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प्रो. यूके चौधरी का कहना है कि बनारस गंगा नदी के मोड़ पर स्थित है। मोड़ पर सेंट्रीपेटल और सेंट्रीफ्यूगल फोर्स काम करता है। क्योंकि यह साइड ऊंचा और मिट्टी का है। नदी में लंबाई दिशा का वेग दूसरे तरफ की तुलना में कम होता है। यहां, चौड़ाई दिशा का वेग शहर की ओर होता। इसलिए शहर से नदी में प्रवाहित हो रहे मलजल किनारे-किनारे ही धीरे-धीरे फैलते हैं।
गंगा बेसिन के न्यूनतम ताप में हो रही है बढ़ोतरी
पिछले दशक में गंगा बेसिन में सर्दियां गर्म होने लगी हैं और गर्मी में भी तेजी से बढ़ाव हो रहा है। बेसिन में औसत अधिकतम तापमान गर्मियों में 32.3 डिग्री सेल्सियस और सर्दियों में 23.1 डिग्री सेल्सियस है। बेसिन में औसत न्यूनतम तापमान गर्मियों में 21.5 डिग्री सेल्सियस और सर्दियों में 6.4 डिग्री सेल्सियस है।
प्री मानसून सीजन गंगा बेसिन में सबसे गर्म होता है, जिसमें औसत तापमान 33.4 डिग्री सेल्सियस होता है। गंगा बेसिन में हर मौसम में न्यूनतम तापमान में वृद्धि हो रही है। सर्दियों में न्यूनतम तापमान में 0.7 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि हुई है।
गंगा बेसिन में गर्मी और दोहन से कम हुई जल की मात्रा
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार 1993 में गंगा बेसिन में जल की मात्रा 525.02 बीसीएम (बिलियन क्यूबिक मीटर) से घटकर 509.52 बीसीएम पर पहुंच गई है। यानी जल उपलब्धता में 16 बीसीएम की कमी आई है। भूजल दोहन और तापमान बढ़ने से वाष्पीकरण के कारण जल की मात्रा कम हुई है।
गंगा बेसिन का प्रवाह क्षेत्र यानी कैचमेंट एरिया 8 लाख 38 हजार 803 वर्ग किलोमीटर रह गया है जो 1993 में 8 लाख 61 हजार 452 वर्ग किलोमीटर हुआ करता था। 1985 से 2015 के बीच गंगा बेसिन में 914 बीसीएम बरसात हुई थी जबकि 1965-1984 के बीच गंगा बेसिन में 947 बीसीएम बरसात हुई थी।
यह आंकड़ा अब धीरे-धीरे कम हो रहा है। एक बीसीएम में एक हजार अरब लीटर पानी होता है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार हर दशक में औसतन 0.23 फीसदी बरसात में कर्मी दर्ज की जा रही है।