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काशी विश्वनाथ मंदिर में चढ़ने वाले फूल-मालाओं से बनेगी जैविक खाद

Mon, 03 Dec 2018 11:03 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Updated Mon, 03 Dec 2018 11:03 AM IST
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Organic manure will be made from flowers of kashi vishwanath temple
श्री काशी विश्वाथ
श्री काशी विश्वनाथ के दरबार में चढ़ने वाले फूलों और मालाओं से अब जैविक खाद बनाया जाएगा। इसके लिए मंदिर परिसर में दो हाईटेक मशीन लगाई गई हैं। कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने शनिवार को इसका उद्घाटन किया।
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बाबा दरबार में प्रतिदिन करीब पांच टन फूल और मालाएं चढ़ती हैं। श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच इन्हें रोज निकालकर ले जाना मुश्किल काम होता है। यह मशीन फूल मालाओं के छोटे-छोटे टुकड़े करेगी और फिर उसे जैविक खाद में बदल देगी।
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दस बोरी फूलों को यह मशीन डेढ़ बोरी खाद में बदल देती है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत यह मशीन मुंबई की एक कंपनी ने लगाई है। मंदिर मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह ने बताया कि वर्तमान में ऐसी दो मशीनें लगाई गई हैं।  
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मंदिरों की जांच करने पहुंची पुरातत्व विभाग की टीम 

काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरीडोर में मिल रहे हैं प्राचीन मंदिरों की जांच के लिए पुरातत्व विभाग की टीम कॉरिडोर क्षेत्र में पहुंची। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में मिलने वाले सभी पुराने मंदिरों का अध्यययन शुरू किया। अध्ययन के बाद इसकी जांच रिपोर्ट मंदिर प्रशासन को सौंपेंगे। काशी विश्वनाथ मंदिर से लेकर मणिकर्णिका घाट तक बन रहे मंदिर कॉरिडोर क्षेत्र में करीब 43 प्राचीन मंदिर मिले हैं।

इनमें से एक मंदिर विश्वनाथ मंदिर जैसा दिख रहा है वहीं कई और मंदिर में हैं जो प्राचीन वास्तु कला को प्रदर्शित कर रहे हैं। कुछ इतिहासकारों का यह मानना है कि यह सभी मंदिर 16 वीं और 18वीं सदी के मंदिर हैं, जिन पर समुद्र मंथन और परमार काल की वास्तुकला की नक्काशी की गई है। इनकी सत्यता जाने के लिए पुरातत्व विभाग की टीम कॉरिडोर क्षेत्र में जाकर जांच कर रही है।

एसडीएम विनोद सिंह ने बताया कि इसकी जांच के लिए मंदिर प्रशासन की ओर से पुरातत्व विभाग को पत्र लिखा गया है। उस पत्र के आधार पर ही विभाग की पूरी टीम अपनी कार्रवाई कर रही है। इनकी रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय हो पाएगा कि यह मंदिर कितना प्राचीन है और किस काल के हैं।
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