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Varanasi News: किसान के आश्रितों को पांच लाख देने का दिया आदेश
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संवाद न्यूज एजेंसी
मऊ। स्थायी लोक अदालत के आदेश पर मृतक किसान नंदलाल राजभर के आश्रितों को मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत पांच लाख की धनराशि मिलेगी। मृतक किसान नंदलाल थाना सरायलखंसी के बुढावे के निवासी पोखरे में डूबने उनकी मौत हो गई। किसान की पत्नी ने योजना के तहत लाभ का आवेदन किया, लेकिन विसरा रिपोर्ट की कमी बताकर लेखपाल की ओर से किसान की विधवा महीनों तहसील पर दौड़ाता रहा। दुखी होकर किसान की पत्नी ने स्थायी लोक अदालत में वाद दायर किया।
स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष हीरा लाल व सदस्य विकास भाई निकुम्भ व अभिषेक गौरव ने सीएमओ व थाना प्रभारी कोपागंज को नोटिस जारी कर विसरा रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया। रिपोर्ट से स्पष्ट हुआ कि मृतक के शरीर में कोई रासायनिक विष नही पाया गया।
इस आधार पर मृतक किसान की पत्नी योजना का लाभ पाने के लिए पात्र मानी गई और जिला प्रशासन ने भुगतान करने पर अपनी सहमति दी।
दूसरे मामले में यूनियन बैंक के शाखा सरवा की ओर से किसान को यह कहते हुए केसीसी देने से मना के दिया कि गांव में चकबंदी चल रही है। आपके गांव के जमीनों का डाटा ऑनलाइन नहीं दिखा रहा है। किसान की ओर से स्थायी लोक अदालत में यशवंत बनाम यूबीआई के नाम से वाद दायर किया।
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न्यायपीठ ने कहा कि किसी को इस आधार पर सरकार की योजना से वंचित नहीं किया जा सकता कि उसके जमीन का डाटा ऑनलाइन नहीं दिख रहा है। किसान के गांव में चकबंदी चल रही है। जिसके कारण डाटा ऑनलाइन नहीं दिखा रहा।
इसमें किसान का कोई दोष नही है, लिहाजा किसान को उसका हक मिलना चाहिए। इसके उपरांत बैक ने किसान को किसान क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ प्रदान किया।
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मऊ। स्थायी लोक अदालत के आदेश पर मृतक किसान नंदलाल राजभर के आश्रितों को मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत पांच लाख की धनराशि मिलेगी। मृतक किसान नंदलाल थाना सरायलखंसी के बुढावे के निवासी पोखरे में डूबने उनकी मौत हो गई। किसान की पत्नी ने योजना के तहत लाभ का आवेदन किया, लेकिन विसरा रिपोर्ट की कमी बताकर लेखपाल की ओर से किसान की विधवा महीनों तहसील पर दौड़ाता रहा। दुखी होकर किसान की पत्नी ने स्थायी लोक अदालत में वाद दायर किया।
स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष हीरा लाल व सदस्य विकास भाई निकुम्भ व अभिषेक गौरव ने सीएमओ व थाना प्रभारी कोपागंज को नोटिस जारी कर विसरा रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया। रिपोर्ट से स्पष्ट हुआ कि मृतक के शरीर में कोई रासायनिक विष नही पाया गया।
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इस आधार पर मृतक किसान की पत्नी योजना का लाभ पाने के लिए पात्र मानी गई और जिला प्रशासन ने भुगतान करने पर अपनी सहमति दी।
दूसरे मामले में यूनियन बैंक के शाखा सरवा की ओर से किसान को यह कहते हुए केसीसी देने से मना के दिया कि गांव में चकबंदी चल रही है। आपके गांव के जमीनों का डाटा ऑनलाइन नहीं दिखा रहा है। किसान की ओर से स्थायी लोक अदालत में यशवंत बनाम यूबीआई के नाम से वाद दायर किया।
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न्यायपीठ ने कहा कि किसी को इस आधार पर सरकार की योजना से वंचित नहीं किया जा सकता कि उसके जमीन का डाटा ऑनलाइन नहीं दिख रहा है। किसान के गांव में चकबंदी चल रही है। जिसके कारण डाटा ऑनलाइन नहीं दिखा रहा।
इसमें किसान का कोई दोष नही है, लिहाजा किसान को उसका हक मिलना चाहिए। इसके उपरांत बैक ने किसान को किसान क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ प्रदान किया।