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केवल काशी में ही है महामृत्युंजय महादेव का मंदिर, अकाल मृत्यु से अभय प्रदान करते हैं महादेव
Mon, 13 Jul 2020 11:38 PM IST
विचित्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: विचित्र सिंह
Updated Mon, 13 Jul 2020 11:38 PM IST
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महामृत्युंजय महादेव मंदिर दारानगर।
- फोटो : अमर उजाला।
महादेव के दर्शन मात्र से ही जीवन की समस्त बाधाओं का शमन हो जाता है। देवों के देव भक्तों के दुख के साथ ही अकाल मृत्यु के भय को भी दूर करते हैं। सर्वसिद्धि प्रदान करने वाले महादेव भक्तों को मोक्ष का वरदान भी देते हैं। पूरे देश में सिर्फ काशी में ही महामृत्यंजय महादेव के स्वरूप में भोले बाबा भक्तों को अभय देते हैं।
महामृत्युंजय मृत्यु पर विजय दिलाते हैं। ऐसे महादेव का दर्शन तो दूर स्मरण मात्र से मृत्यु तुल्य कष्ट समाप्त हो जाता है। मान्यता है कि जो चल-फिर नहीं सकता उसके कानों में महामृत्युंजय नाम जाने मात्र से वह स्वस्थ होने लगता है। अकाल मृत्यु से मुक्ति दिलाने वाले हैं महामृत्युंजय। महामृत्युंजय का मंदिर काशी के दारानगर मोहल्ले में स्थित है।
मंदिर के महंत परिवार के पंडित किशन दीक्षित का कहना है कि यह हजारों साल पुराना मंदिर है। देश में कहीं भी महामृत्युंजय का दूसरा मंदिर नहीं। उन्होंने बताया कि इस मंदिर में महामृत्युंजय महादेव का शिवलिंग तो है ही इस विशाल परिसर में धनवंतरी कूप है जहां भगवान धनवंतरी ने कई जड़ी-बूटियां और औषधियां डाली थीं। इस कूप का जल पीने से पेट के रोग से लेकर तमाम तरह के घाव ठीक होते हैं। इसके अलावा अनेक तरह की व्याधियां दूर होती हैं।
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महामृत्युंजय मृत्यु पर विजय दिलाते हैं। ऐसे महादेव का दर्शन तो दूर स्मरण मात्र से मृत्यु तुल्य कष्ट समाप्त हो जाता है। मान्यता है कि जो चल-फिर नहीं सकता उसके कानों में महामृत्युंजय नाम जाने मात्र से वह स्वस्थ होने लगता है। अकाल मृत्यु से मुक्ति दिलाने वाले हैं महामृत्युंजय। महामृत्युंजय का मंदिर काशी के दारानगर मोहल्ले में स्थित है।
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मंदिर के महंत परिवार के पंडित किशन दीक्षित का कहना है कि यह हजारों साल पुराना मंदिर है। देश में कहीं भी महामृत्युंजय का दूसरा मंदिर नहीं। उन्होंने बताया कि इस मंदिर में महामृत्युंजय महादेव का शिवलिंग तो है ही इस विशाल परिसर में धनवंतरी कूप है जहां भगवान धनवंतरी ने कई जड़ी-बूटियां और औषधियां डाली थीं। इस कूप का जल पीने से पेट के रोग से लेकर तमाम तरह के घाव ठीक होते हैं। इसके अलावा अनेक तरह की व्याधियां दूर होती हैं।
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पुत्र रूप में हैं महाकालेश्वर
इस परिसर के छोर पर अगर महामृत्युंजय है तो दूसरे छोर पर महाकालेश्वर पुत्र रूप में अवस्थित हैं। यहीं नागेश्वर महादेव हैं तो अस्टांग भैरव का विग्रह भी है। गोस्वामी तुलसी दास द्वारा स्थापित हनुमान जी का मंदिर है, प्राचीन पीपल का वृक्ष है तो शनिदेव का मंदिर भी है।
मृत्युंजय महादेव के नाम से ही यह पता चलता है कि इन्हें मृत्यु पर विजय हासिल है। जिस किसी को भी मृत्यु का संकट हो या मृत्यु का भय सताता होए उसके लिए मंदिर परिसर में महामृत्युंजय जप से ही वह मृत्यु तुल्य कष्ट से मुक्ति पा जाता है।
होते हैं चार विशेष शृंगार
बाबा का साल भर में चार विशेष श्रृंगार होता है। इसमें महामृत्युंजय के साकार रूप का शृंगार सबसे खास होता है। इसमें बाबा की आठ भुजाएं, सिर से चंद्र वर्षा, बगल में बगला मुखी माता विराजती हैं। बगला मुखी माता को बाबा के अर्धांगिनी के रूप में मान्यता प्राप्त है। एक हाथ में रुद्राक्ष की माला तो 4 भुजाओं में कलश होता है।
मान्यता है कि इनके दर्शन मात्र से मन की हर कामना पूरी होती है। कहा जाता है कि यदि कोई भक्त लगातार 40 सोमवार यहां हाजिरी लगाए और त्रिलोचन के इस रूप को फूलों के साथ दूध और जल चढ़ाए तो उसके जीवन से कष्टों का निवारण हो जाता है।
मृत्युंजय महादेव के नाम से ही यह पता चलता है कि इन्हें मृत्यु पर विजय हासिल है। जिस किसी को भी मृत्यु का संकट हो या मृत्यु का भय सताता होए उसके लिए मंदिर परिसर में महामृत्युंजय जप से ही वह मृत्यु तुल्य कष्ट से मुक्ति पा जाता है।
होते हैं चार विशेष शृंगार
बाबा का साल भर में चार विशेष श्रृंगार होता है। इसमें महामृत्युंजय के साकार रूप का शृंगार सबसे खास होता है। इसमें बाबा की आठ भुजाएं, सिर से चंद्र वर्षा, बगल में बगला मुखी माता विराजती हैं। बगला मुखी माता को बाबा के अर्धांगिनी के रूप में मान्यता प्राप्त है। एक हाथ में रुद्राक्ष की माला तो 4 भुजाओं में कलश होता है।
मान्यता है कि इनके दर्शन मात्र से मन की हर कामना पूरी होती है। कहा जाता है कि यदि कोई भक्त लगातार 40 सोमवार यहां हाजिरी लगाए और त्रिलोचन के इस रूप को फूलों के साथ दूध और जल चढ़ाए तो उसके जीवन से कष्टों का निवारण हो जाता है।