{"_id":"6446ce5350a7cf3f2005d704","slug":"only-books-can-become-weapons-in-the-war-of-ideas-varanasi-news-c-20-vns1013-171082-2023-04-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Varanasi News: विचारों के युद्ध में पुस्तकें ही बन सकती हैं अस्त्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Varanasi News: विचारों के युद्ध में पुस्तकें ही बन सकती हैं अस्त्र
विज्ञापन
विज्ञापन
महिला अध्ययन केंद्र की निदेशक प्रो. विधु द्विवेदी ने कहा कि विचारों के युद्ध में पुस्तकें ही अस्त्र हैं। दैनिक जीवन में विशेषकर महिलाओं के सामने ऐसी-ऐसी समस्याएं आती हैं, जिनका निदान न मिल पाने के अभाव में उन्हें अनेक शारीरिक और मानसिक परेशानियों से गुजरना पड़ता है। ऐसी समस्याओं के लिए हमें एक मार्गदर्शक और उसके अभाव में परामर्शदाता की आवश्यकता पड़ती है। वह सोमवार को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में गृहविज्ञान विभाग के कक्ष में महिला अध्ययन केंद्र की ओर से पुस्तक दैनिक जीवन की मनोवैज्ञानिक समस्याएं पर परिचर्चा को संबोधित कर रही थीं। प्रो. द्विवेदी ने कहा कि आज की व्यस्ततम जीवन शैली में महिलाओं को अपने लिए भी प्रसन्नता का समय नहीं मिल पाता है और इसी कारण से उन्हें अनेक प्रकार की मानसिक परेशानियां जैसे -डिप्रेशन, फोबिया का सामना करना पड़ता है। आज के समय में मोबाइल फोन से शारीरिक व मानसिक बीमारियां हो रही हैं। सतगुरु राम सिंह पीठ की अध्यक्ष डॉ. रेणु द्विवेदी ने कहा कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में मनोविज्ञान का व्यापक क्षेत्र फैला हुआ है। पुस्तक लेखिका प्रेरणा चतुर्वेदी ने कहा कि यह पुस्तक मनोविज्ञान की जटिलताओं को आम पाठकों के सामने बड़ी सरल और सहज शब्दों में व्यक्त करने के लिए लिखी गई है। डाॅ. विशाखा शुक्ला ने कहा कि यह पुस्तक हमें स्वस्थ जीवन जीने की कला सिखाती है। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. विद्या चन्द्रा ने किया। इस दौरान डॉ. पुष्पा उपाध्याय, नीलिमा चौबे, मालती कुमारी, कीर्ति पाठक मौजूद रहीं।