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ऑनलाइन टीचिंग, क्लास रूम टीचिंग को समाप्त करने की साजिश
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यूजीसी की ओर से ऑनलाइन टीचिंग का सुझाव कहीं क्लास रूम टीचिंग को समाप्त करने की साजिश तो नहीं है। छात्रों के पास न तो साधन हैं और ना ही पर्याप्त संसाधन। उक्त विचार राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के वेबिनार में वक्ताओं ने व्यक्त किए। रविवार को महासंघ के उच्च शिक्षा संवर्ग की ऑनलाइन बैठक का आयोजन किया गया।
बैठक में यूजीसी की ओर से जुलाई 2020 से स्वयं पोर्टल पर ऑनलाइन कक्षाओं के संचालन पर विचार विमर्श हुआ। ओमपाल सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया सूचना का माध्यम है परंतु इसके द्वारा संगठन नहीं बनाया जा सकता है। राष्ट्रीय प्रभारी महेंद्र कुमार ने कहा कि संक्रमण काल में ऑनलाइन शिक्षण महत्वपूर्ण माध्यम है लेकिन क्लास रूम टीचिंग की तरह प्रभावी नहीं हो सकता है। ऑनलाइन शिक्षण की सबसे बड़ी चुनौती नेटवर्क और कनेक्टिविटी है। प्रदेश अध्यक्ष निर्मला यादव ने कहा कि यूजीसी द्वारा ऑनलाइन टीचिंग की बात कहीं क्लास रूम टीचिंग समाप्त करने की कोशिश तो नहीं है। अगर ऐसा है तो हम सभी शिक्षक इसका विरोध करेंगे।
डॉ. दिलीप सरदेसाई ने समान पाठ्यक्रम की सराहना की और इसे वर्तमान सत्र से लागू करने का सुझाव दिया। डॉ. हरि प्रसाद अधिकारी एवं गोविंद मिश्र ने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालय के अध्यापकों की वेतन विसंगति के विषय में बताया। डॉ. दिवाकर सिंह ने शेष बचे मानदेय, अध्यापकों को नियमित करने हेतु शासन से बातचीत करने को कहा। झांसी से डॉ. जितेन्द्र तिवारी, कानपुर से डॉ. विपिन ने महाविद्यालयों में शीघ्र प्रोफेसर पदनाम दिये जाने हेतु प्रयास करने की बात कही। बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि शिक्षकों द्वारा उठाये गये मुद्दों पर उच्च शिक्षा संवर्ग के कार्यकारी अध्यक्ष और यूजीसी हेतु एक मांग पत्र बनायेंगे। इस दौरान डॉ. उदयन मिश्र, डॉ. बब्बन प्रसाद सिंह, डॉ. रविन्द्र कुमार, डॉ. राम पांडेय, डॉ. अखिलेश, डॉ. महेन्द्र पाल, डॉ. अखिल, डॉ. अमिताभ तिवारी, लवकुश मिश्र, आमोद राय आदि मौजूद रहे।
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बैठक में यूजीसी की ओर से जुलाई 2020 से स्वयं पोर्टल पर ऑनलाइन कक्षाओं के संचालन पर विचार विमर्श हुआ। ओमपाल सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया सूचना का माध्यम है परंतु इसके द्वारा संगठन नहीं बनाया जा सकता है। राष्ट्रीय प्रभारी महेंद्र कुमार ने कहा कि संक्रमण काल में ऑनलाइन शिक्षण महत्वपूर्ण माध्यम है लेकिन क्लास रूम टीचिंग की तरह प्रभावी नहीं हो सकता है। ऑनलाइन शिक्षण की सबसे बड़ी चुनौती नेटवर्क और कनेक्टिविटी है। प्रदेश अध्यक्ष निर्मला यादव ने कहा कि यूजीसी द्वारा ऑनलाइन टीचिंग की बात कहीं क्लास रूम टीचिंग समाप्त करने की कोशिश तो नहीं है। अगर ऐसा है तो हम सभी शिक्षक इसका विरोध करेंगे।
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डॉ. दिलीप सरदेसाई ने समान पाठ्यक्रम की सराहना की और इसे वर्तमान सत्र से लागू करने का सुझाव दिया। डॉ. हरि प्रसाद अधिकारी एवं गोविंद मिश्र ने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालय के अध्यापकों की वेतन विसंगति के विषय में बताया। डॉ. दिवाकर सिंह ने शेष बचे मानदेय, अध्यापकों को नियमित करने हेतु शासन से बातचीत करने को कहा। झांसी से डॉ. जितेन्द्र तिवारी, कानपुर से डॉ. विपिन ने महाविद्यालयों में शीघ्र प्रोफेसर पदनाम दिये जाने हेतु प्रयास करने की बात कही। बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि शिक्षकों द्वारा उठाये गये मुद्दों पर उच्च शिक्षा संवर्ग के कार्यकारी अध्यक्ष और यूजीसी हेतु एक मांग पत्र बनायेंगे। इस दौरान डॉ. उदयन मिश्र, डॉ. बब्बन प्रसाद सिंह, डॉ. रविन्द्र कुमार, डॉ. राम पांडेय, डॉ. अखिलेश, डॉ. महेन्द्र पाल, डॉ. अखिल, डॉ. अमिताभ तिवारी, लवकुश मिश्र, आमोद राय आदि मौजूद रहे।
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