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ऑनलाइन शिक्षा: अब 'स्लेट' पर पढे़ंगे संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्र, संपूर्णानंद और लखनऊ यूनिवर्सिटी के बीच हुआ समझौता

Wed, 21 Jul 2021 10:37 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Wed, 21 Jul 2021 10:37 PM IST
सार

नई शिक्षा नीति के अनुसार शैक्षिक गुणवत्ता का ध्यान रखते हुए तैयार किया गया  स्लेट ऐप आसानी से छात्रों के लिए उपलब्ध होगा। बुधवार को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी और लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए। 

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Online education Now students of Sanskrit University will study on slate app  agreement between Sampurnanand and Lucknow University
संपूर्णानंद के कुलपति और लखनऊ विवि के कुलपति ने समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्र अब स्लेट (स्ट्रैटेजनिक लर्निंग ऐप्लिकेशन फॉर ट्रांसफार्मेटिव एजुकेशन) पर पढ़ाई करेंगे। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय और लखनऊ विश्वविद्यालय के बीच बुधवार को हुए शैक्षिक समझौते के बाद ऑनलाइन शिक्षा का नया मार्ग प्रशस्त हो गया। नई शिक्षा नीति के अनुसार शैक्षिक गुणवत्ता का ध्यान रखते हुए तैयार किया गया ऐप आसानी से छात्रों के लिए उपलब्ध होगा।

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बुधवार को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी और लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए। शैक्षिक समझौते के बाद संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को तीन साल तक स्लेट एप के जरिए ऑनलाइन कक्षाओं की सुविधा मिलेगी। स्लेट के बारे में शिक्षकों को प्रशिक्षण देने के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रशिक्षित आचार्य आएंगे।
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कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने बताया कि ऑनलाइन शैक्षिक समझौते से डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और ई शिक्षा का सपना साकार होगा। इसके अंतर्गत विद्यार्थियों को जुड़ने के लिये संख्या की कोई सीमा निश्चित नहीं है। इस दौरान सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरिबहादुर श्रीवास्तव तथा पं दीनदयाल उपाध्याय के कुलपति प्रो. विजय कृष्ण सिंह उपस्थित थे।

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स्लेट एप के फायदे

कुलपति प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि स्लेट एप के इस्तेमाल से ऑनलाइन कक्षाओं के संचालन, शिक्षा सामग्री व ऑनलाइन टेस्ट में आसानी होगी। विद्यार्थी अब अपना प्रोजेक्ट वर्क पूर्ण करके ऑनलाइन ही जमा कर सकेंगे। इससे कक्षा में उपस्थिति की निगरानी भी की जा सकेगी। स्लेट एप से सफेद बोर्ड पर अध्यापन एवं  वेबिनार आसान, पारदर्शी और श्रेष्ठतम तरीके से किया जा सकेगा। छात्र स्लेट का उपयोग लैपटॉप, कंप्यूटर एवं मोबाइल फोन पर आसानी से कर सकेंगे।

स्लेट के लाभ
मल्टी फॉर्मेट सपोर्ट जैसे टेक्स्ट, पीपीटी, वीडियो, ऑडियो
ग्लोबल कक्षाओं का संचालन
24 × 7 ऑनलाइन अध्ययन सामग्री तक पहुंच
ऑनलाइन कक्षाओं  के साथ ऑफलाइन कक्षाओं का संवर्धन और प्रश्न समाधान सामग्री मूल्यांकन, प्रश्नोत्तरी
ऑनलाइन आधारित टाइम टेबल
छात्र उपस्थिति की निगरानी
आसान, पारदर्शी और स्टैंडर्ड
व्याख्यान व वेबिनार के आयोजन में सहूलियत

डिजिटल होगा संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय

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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के संबद्ध महाविद्यालयों  को अब विश्वविद्यालय का चक्कर नहीं काटना पड़ेगा। लेह से लेकर नेपाल तक के संबद्ध महाविद्यालयों को जल्द ही अपने शहर में विश्वविद्यालय से जुड़ी सुविधाएं ऑनलाइन उपलब्ध होंगी। विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं को अब डिजिटल करने की तैयारी की जा रही है। कुलाधिपति के निर्देश के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द ही इसकी कार्ययोजना तैयार करेगा। 

कुलसचिव डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालय देश भर में हैं। महाविद्यालयों को परीक्षा के दौरान, प्रमाणपत्र के लिए और अन्य कार्यों के लिए विश्वविद्यालय का चक्कर काटना पड़ता है। इसको देखते हुए विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं को डिजिटल करने की योजना है। इससे महाविद्यालयों को अपने ही जिले में सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। 

संबद्ध महाविद्यालयों की संख्या 1200 से अधिक

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से देश और नेपाल में संबद्ध महाविद्यालयों की संख्या 1200 से अधिक है। वार्षिक व सेमेस्टर परीक्षाओं के दौरान संबद्ध महाविद्यालयों को प्रश्नपत्र और परीक्षा सामग्री के लिए विश्वविद्यालय का लंबा चक्कर काटना पड़ता है। संसाधनों की कमी के कारण प्राचार्यों को खुद ही कॉपियों और पेपर का बंडल लेकर जाना पड़ता है।

वहीं प्रमाणपत्र व डिग्री के लिए महाविद्यालय के छात्रों को विश्वविद्यालय आना पड़ता है। महाविद्यालय और विद्यार्थियों की समस्या को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने व्यवस्थाओं को अब पूरी तरह से डिजिटल करने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। आगामी सत्र से इसकी शुरुआत हो सकती है। विश्वविद्यालय ने लाइब्रेरी को डिजिटल करने के साथ ही ई कंटेंट भी अपलोड किए हैं।
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