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गजब! एक बैंक में दो खाताधारक मगर दोनों का खाता संख्या एक, 12 साल पता चला तो ये हुआ
ब्यूरो,अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Wed, 15 Nov 2017 07:49 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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यूपी के आजमगढ़ में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में अधिकारियों और कर्मचारियों की घोर लापरवाही सामने आई है। बैंक ने एक जैसे नाम वाले दो व्यक्तियों का एक ही खाता खोल दिया। दोनों व्यक्ति 12 साल से अधिक समय से अलग-अलग उस खाते में रकम जमा करते और निकालते रहे, लेकिन बैंक अधिकारी उसे पकड़ नहीं पाए।
दोनों खाताधारकों ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। मामला पिछले दिनों तब खुला जब एक व्यक्ति के खाते में मुआवजे के 20 लाख रुपये आए और दूसरे ने उसमें से दस हजार रुपये निकाल लिए। इस पर पहले वाले ने खाता बंद करा दिया तो दूसरे ने पुलिस से संपर्क किया और बैंक कर्मचारियों के विरुद्ध धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
प्रभारी निरीक्षक रानी की सराय राजकुमार सिंह ने बताया कि रानी की सराय थाना क्षेत्र के सम्मोपुर खालसा गांव निवासी सुभग्गा यादव ने 12 साल पहले एसबीआई रानी की सराय में अपना खाता खुलवाया।
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सुभग्गा यादव के बाद रानी की सराय थाने के हसनपुर गांव निवासी सुभग्गा राम ने भी उसी दौरान अपना खाता खुलवाया। बैंक अधिकारियों ने दोनों को एक ही खाता नंबर देकर अलग-अलग पासबुक जारी कर दी।
तभी से दोनों अपने खाते में धन जमा कर रहे और निकाल रहे थे। एक माह पूर्व सुभग्गा यादव को जमीन के मुआवजे का 20 लाख रुपये खाते में आया। जबकि सुभग्गा राम ने दस हजार रुपये निकाल लिए।
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दोनों खाताधारकों ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। मामला पिछले दिनों तब खुला जब एक व्यक्ति के खाते में मुआवजे के 20 लाख रुपये आए और दूसरे ने उसमें से दस हजार रुपये निकाल लिए। इस पर पहले वाले ने खाता बंद करा दिया तो दूसरे ने पुलिस से संपर्क किया और बैंक कर्मचारियों के विरुद्ध धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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प्रभारी निरीक्षक रानी की सराय राजकुमार सिंह ने बताया कि रानी की सराय थाना क्षेत्र के सम्मोपुर खालसा गांव निवासी सुभग्गा यादव ने 12 साल पहले एसबीआई रानी की सराय में अपना खाता खुलवाया।
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सुभग्गा यादव के बाद रानी की सराय थाने के हसनपुर गांव निवासी सुभग्गा राम ने भी उसी दौरान अपना खाता खुलवाया। बैंक अधिकारियों ने दोनों को एक ही खाता नंबर देकर अलग-अलग पासबुक जारी कर दी।
तभी से दोनों अपने खाते में धन जमा कर रहे और निकाल रहे थे। एक माह पूर्व सुभग्गा यादव को जमीन के मुआवजे का 20 लाख रुपये खाते में आया। जबकि सुभग्गा राम ने दस हजार रुपये निकाल लिए।
एक ने बंद कराया खाता तो दूसरे को मची खलबली
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खाते से दस हजार रुपये निकाले जाने की जानकारी होने पर सुभग्गा यादव बैंक पहुंचा और अपना खाता बंद करा दिया। खाता बंद होने की जानकारी मिलने पर सुभग्गा राम ने बैंक पहुंचकर जानकारी ली। इसके बाद रानी की सराय थाने में तहरीर दी।
पुलिस ने जब मामले की पड़ताल की तो पता चला कि दोनों लोगों को एक ही खाता नंबर जारी कर दिया गया है। इसके बाद सोमवार को सुभग्गा यादव ने बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई। सीओ सिटी सच्चिदानंद ने बताया कि घटना की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच की जा रही है।
वर्ष 2005 से पहले इन दोनों के खाते खोले गए हैं। मामले में बैंक के शाखा प्रबंधक आरए राम ने कहा कि खाता धारकों का नाम अलग-अलग है, पर इनके खाते का नंबर एक ही है। तभी से दोनों खाते में पैसा जमा और निकाल रहे थे। संभावना है कि वर्ष 2005 में कंप्यूटर में फीडिंग करते समय यह गड़बड़ी हुई है। मामले की जांच की जा रही है।
पुलिस ने जब मामले की पड़ताल की तो पता चला कि दोनों लोगों को एक ही खाता नंबर जारी कर दिया गया है। इसके बाद सोमवार को सुभग्गा यादव ने बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई। सीओ सिटी सच्चिदानंद ने बताया कि घटना की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच की जा रही है।
वर्ष 2005 से पहले इन दोनों के खाते खोले गए हैं। मामले में बैंक के शाखा प्रबंधक आरए राम ने कहा कि खाता धारकों का नाम अलग-अलग है, पर इनके खाते का नंबर एक ही है। तभी से दोनों खाते में पैसा जमा और निकाल रहे थे। संभावना है कि वर्ष 2005 में कंप्यूटर में फीडिंग करते समय यह गड़बड़ी हुई है। मामले की जांच की जा रही है।