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अधिकारियों-कारोबारियों ने असि को किया तबाह

Mon, 18 Apr 2016 01:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Mon, 18 Apr 2016 01:08 AM IST
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Officers and traders had to destroy the sword
अवैध्‍ा कब्‍जा
असि नदी का अस्तित्व खत्म करने के गुनहगार कई हैं। कॉलोनाइजर से लेकर नगर निगम, जल निगम और राजस्व विभाग के अधिकारी भी इसमें शामिल हैं। राजस्व विभाग के अफसरों ने आंख मूंद कर नदी के पेटा में अवैध कब्जा होने दिया तो नगर निगम के अधिकारियों ने इसे नाला बनाने में कसर नहीं छोड़ी। बाइस लाख की आबादी वाले शहर में जलभराव की समस्या की एक बड़ी वजह असि का रास्ता रोका जाना भी है।
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असि नदी का उद्गम स्थल कंचनपुर, कंदवा का तालाब भी मृतप्राय हो चुका है। इन तालाबों मेें गंदगी बहाई जाती है। यहां से आधा किमी आगे नदी को पाट कर दुकानें बना ली गई हैं। नदी की तलहटी में घर और गलियां बनाए जाने से कई जगह बहाव के प्राकृतिक मार्ग बदल गए हैं। 22 मीटर चौड़े पाटों वाली नदी अतिक्रमण और अवैध कब्जा से सिकुड़ कर कहीं तीन मीटर तो कहीं पांच मीटर ही रह गई है। असि नदी के प्राकृतिक जल भंडारण स्रोत आसपास के 66 तालाब थे। राजस्व रिकार्ड में अभी भी उन तालाबों का जिक्र है लेकिन उनको पाट दिया गया।
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नदी पर लंबे समय तक काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता रमेश चोपड़ा बताते हैं कि महमूरगंज, शिवाजीनगर, ककरमत्ता, चितईपुर, सुंदरपुर, बृज इंक्लेव, नरिया, गांधीनगर, साकेत नगर, संकट मोचन, अस्सी, नगवा, लंका मोहल्ले के अलावा इनके बीच बसी 70 से अधिक कॉलोनियों का 90 एमएलडी यानी नौ करोड़ लीटर गंदा पानी असि नदी से होकर गंगा में बहाया जा रहा है। नदी की तलहटी में कैसे लोगों ने भवन बनाए, कैसे कॉलोनियां बस गईं, यह बड़ा सवाल है। जांच की जाए तो नदी के दोनों किनारों पर बसने वालों के पास भूमि का कोई अभिलेख नहीं मिलेगा।
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वरुणा कॉरिडोर के साथ ही खुद वरुणा नदी के अस्तित्व के लिए संकट बने अवैध निर्माणों का मसला जल्द ही संसद में गूंजेगा। चंदौली से भाजपा सांसद डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने अमर उजाला में छपी खबरों का संज्ञान लेते हुए इसकी तैयारी की है। उन्होंने रविवार को बताया कि वरुणा से वाराणसी की पहचान जुड़ी है। तलहटी तक निर्माण कराकर जिस तरह इस नदी के अस्तित्व को खतरे में डाला गया है, वह बेहद गंभीर है। वे इस मसले को संसद में उठाएंगे। ताकि, जल्द से जल्द अवैध निर्माणों को हटाकर वरुणा को संरक्षित करने की ठोस पहल हो।



वरुणा को संरक्षित कर उसे पर्यटन के लिहाज से विकसित करने के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पहल पर ‘वरुणा कॉरिडोर’ की योजना तैयार की गई है। गंगा समेत अन्य नदियों के संरक्षण पर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गंभीर हैं। बावजूद इसके काशी की पहचान से जुड़ी वरुणा का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। वरुणा को सबसे अधिक नुकसान अवैध निर्माणों और खुलेआम गिरते सीवर, नालों से है। अवैध निर्माणों का आलम यह है कि वीडीए, नगर निगम और अन्य संबंधित सरकारी विभागों की मिलीभगत से नदी किनारे तक निर्माण करा लिए गए हैं। नदी क्षेत्र में दो सौ से अधिक अवैध निर्माणों के बावजूद वीडीए चुप्पी साधे हुए है। अब तक महज छह भवन स्वामियों को नोटिस जारी कर कार्रवाई की खानापूर्ति की जा रही है जबकि जल्द से जल्द अवैध निर्माण नहीं हटाए गए तो करोड़ों की वरुणा कॉरिडोर योजना का भी कोई मतलब नहीं रह जाएगा। इतना ही नहीं, कॉरिडोर के लिए ड्रेजिंग का काम भी शुरू कराया जा चुका है। सीएम का ड्रीम प्रोजेक्ट होने के नाते उच्चाधिकारी खुद इसकी मानीटरिंग कर रहे हैं लेकिन तमाम दिशा-निर्देशों के बाद भी वीडीए पर कोई खास असर नहीं पड़ रहा है।
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