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हिंदुस्तानी दिल में आज भी बसी है हिंदी, सात समंदर पार जगा रहीं राजभाषा की अलख
Thu, 24 Jan 2019 11:16 AM IST
Sayali Maurya
अजीत कुमार सिंह, अमर उजाला, वाराणसी
अजीत कुमार सिंह, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: Sayali Maurya
Updated Thu, 24 Jan 2019 11:16 AM IST
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शोभा मोहांगी
- फोटो : अमर उजाला
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भारत की राजभाषा हिंदी को देश के साथ विदेश में भी समृद्ध करने का जज्बा एक भारतीय ही रख सकता है। कुछ ऐसा ही कर रहे हैं भारत की जड़ों से जुड़े हुए लोग।
दो पीढ़ी से दक्षिण अफ्रीका में रह रही शोभा मोहांगी हिंदी की अलख जगा रही हैं। हिंदी पढ़ाने के साथ वह रेडियो के कार्यक्रमों के जरिए अपनी मातृभूमि के बारे में लोगों को बताती हैं।
रेडियो जॉकी शोभा का संस्कृति नुक्कड़ कार्यक्रम जोहानिसबर्ग में काफी मशहूर है। इसके जरिए वह कन्या कुमारी से लेकर काशी तक की संस्कृति के बारे में लोगों को बताती है।
शोभा के पिता दक्षिण अफ्रीका में पूर्व सांसद रहे हैं। वह पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला के करीबी मित्रों में रहे। शोभा बताती हैं कि नेल्सन मंडेला लंबे समय तक उनके जोहानिसबर्ग स्थित घर में रहे।
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शोभा अपने दल के 70 लोगों के साथ प्रवासी भारतीय सम्मेलन में भाग लेने यहां आई हैं। एक कॉलेज में हिंदी पढ़ाने के अलावा अपने फार्म हाउस पर भी वह हिंदी से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करती हैं। पिछले दो दिनों में वह काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा आरती देख चुकी हैं।
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दो पीढ़ी से दक्षिण अफ्रीका में रह रही शोभा मोहांगी हिंदी की अलख जगा रही हैं। हिंदी पढ़ाने के साथ वह रेडियो के कार्यक्रमों के जरिए अपनी मातृभूमि के बारे में लोगों को बताती हैं।
रेडियो जॉकी शोभा का संस्कृति नुक्कड़ कार्यक्रम जोहानिसबर्ग में काफी मशहूर है। इसके जरिए वह कन्या कुमारी से लेकर काशी तक की संस्कृति के बारे में लोगों को बताती है।
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शोभा के पिता दक्षिण अफ्रीका में पूर्व सांसद रहे हैं। वह पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला के करीबी मित्रों में रहे। शोभा बताती हैं कि नेल्सन मंडेला लंबे समय तक उनके जोहानिसबर्ग स्थित घर में रहे।
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शोभा अपने दल के 70 लोगों के साथ प्रवासी भारतीय सम्मेलन में भाग लेने यहां आई हैं। एक कॉलेज में हिंदी पढ़ाने के अलावा अपने फार्म हाउस पर भी वह हिंदी से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करती हैं। पिछले दो दिनों में वह काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा आरती देख चुकी हैं।
हिंदी सीखने के लिए करतीं है जागरूक
वहीं, फ्रांस में रह रही नलिनी कहती हैं कि वह दो पीढ़ी से परदेश में हैं। घर के परिसर में रूद्राक्ष और तुलसी के पौधे हैं। घर में गंगा जल हमेशा रहता है। लोगों को हिंदू धर्म के बारे में बताने के साथ ही उन्हें हिंदी सीखने के लिए भी जागरूक करती हैं। पति सही तरीके हिंदी नहीं बोल पाते, लेकिन उनकी ज्यादातर बातें हिंदी में ही होती हैं।