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प्रदूषण कम करने की कवायद, वाराणसी में अब मिलेगा बीएस-6 डीजल-पेट्रोल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,मुरादाबाद/वाराणसी
Updated Wed, 04 Apr 2018 05:04 PM IST
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उत्तर प्रदेश के ज्यादा प्रदूषित शहरों में शासन ने कम प्रदूषण फैलाने वाले पेट्रोल की सप्लाई कराने की तैयारी की है। इससे हवा में जहरीले रसायनों की मात्रा में कमी आ सकेगी। सूबे में वाराणसी समेत 15 शहरों की हवा में ज्यादा प्रदूषण है। यहां की हालत खराब होती जा रही है।
सुबह-शाम वाहनों का दबाव बढ़ने पर इन शहरों के ज्यादातर चौराहे गैस चैंबर जैसे हो जाते हैं। शासन ने पिछले दिनों लखनऊ में संबंधित शहरों के अधिकारियों की बैठक बुलाई गई थी। इसमें प्रदूषण नियंत्रण के लिए स्थानीय स्तर पर व्यवस्था बनाने को कहा गया था।
इसके लिए नगर निकायों के अधिकारियों, प्रशासनिक अफसरों, परिवहन अधिकारियों, रोडवेज व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को बुलाया गया था। वाहनों के धुएं से निकलने वाली जहरीली गैस लोगों को नुकसान पहुंचाती हैं।
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अधिकारियों ने इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी थी। अधिकारियों के अनुसार जल्द ही प्रदूषित शहरों में कम प्रदूषण फैलाने वाला पेट्रोल-डीजल बीएस-6 मानक का देने की तैयारी है। पहले इसके लिए अप्रैल 2019 का समय तय किया गया था, लेकिन प्रदुषण के बढ़ते मानक के चलते इसको 2018 में ही लाने की तैयारी है।
सूबे के ज्यादा प्रदूषित शहर
सहायक पर्यावरण अधिकारी रोहित कुमार सिंह ने कहा कि मुरादाबाद, गजरौला, बरेली, गाजियाबाद, खुर्जा, नोएडा, आगरा, इलाहाबाद, अनपरा, फिरोजाबाद, झांसी, कानपुर, लखनऊ, रायबरेली व वाराणसी शहरों की हवा में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। इन सभी शहरों में कम प्रदूषण फैलाने वाले डीजल-पेट्रोल की सिफारिश की गई थी।
बीएस-6 श्रेणी के डीजल-पेट्रोल के साथ ही बीएस-6 श्रेणी के वाहनों की सिफारिश की गई है। कंपनियों ने इनको तैयार करना शुरू कर दिया है। तब तक बीएस-4 श्रेणी के वाहनों में भी नए डीजल-पेट्रोल का प्रयोग किया जा सकता है। इनसे प्रदूषण में गिरावट आएगी।
वाहन चालकों को यह डीजल-पेट्रोल सामान्य की दर पर ही दिया जाएगा। हमको पहले बीएस-5 श्रेणी के वाहन लाने थे, लेकिन बढ़ते प्रदूषण के चलते बीएस-4 से सीधे बीएस-6 केवाहन लाए जा रहे हैं।
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सुबह-शाम वाहनों का दबाव बढ़ने पर इन शहरों के ज्यादातर चौराहे गैस चैंबर जैसे हो जाते हैं। शासन ने पिछले दिनों लखनऊ में संबंधित शहरों के अधिकारियों की बैठक बुलाई गई थी। इसमें प्रदूषण नियंत्रण के लिए स्थानीय स्तर पर व्यवस्था बनाने को कहा गया था।
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इसके लिए नगर निकायों के अधिकारियों, प्रशासनिक अफसरों, परिवहन अधिकारियों, रोडवेज व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को बुलाया गया था। वाहनों के धुएं से निकलने वाली जहरीली गैस लोगों को नुकसान पहुंचाती हैं।
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अधिकारियों ने इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी थी। अधिकारियों के अनुसार जल्द ही प्रदूषित शहरों में कम प्रदूषण फैलाने वाला पेट्रोल-डीजल बीएस-6 मानक का देने की तैयारी है। पहले इसके लिए अप्रैल 2019 का समय तय किया गया था, लेकिन प्रदुषण के बढ़ते मानक के चलते इसको 2018 में ही लाने की तैयारी है।
सूबे के ज्यादा प्रदूषित शहर
सहायक पर्यावरण अधिकारी रोहित कुमार सिंह ने कहा कि मुरादाबाद, गजरौला, बरेली, गाजियाबाद, खुर्जा, नोएडा, आगरा, इलाहाबाद, अनपरा, फिरोजाबाद, झांसी, कानपुर, लखनऊ, रायबरेली व वाराणसी शहरों की हवा में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। इन सभी शहरों में कम प्रदूषण फैलाने वाले डीजल-पेट्रोल की सिफारिश की गई थी।
बीएस-6 श्रेणी के डीजल-पेट्रोल के साथ ही बीएस-6 श्रेणी के वाहनों की सिफारिश की गई है। कंपनियों ने इनको तैयार करना शुरू कर दिया है। तब तक बीएस-4 श्रेणी के वाहनों में भी नए डीजल-पेट्रोल का प्रयोग किया जा सकता है। इनसे प्रदूषण में गिरावट आएगी।
वाहन चालकों को यह डीजल-पेट्रोल सामान्य की दर पर ही दिया जाएगा। हमको पहले बीएस-5 श्रेणी के वाहन लाने थे, लेकिन बढ़ते प्रदूषण के चलते बीएस-4 से सीधे बीएस-6 केवाहन लाए जा रहे हैं।
यह होगा फायदा
प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पर्यावरण वैज्ञानिक बीएस राजपूत के अनुसार नए पेट्रोल-डीजल से प्रदूषण में 80 फीसदी तक की कमी आएगी। इससे वाहन धुआं कम देंगे और वह हल्का होने से जल्द ही हवा में ऊपर उठ जाएगा। इसके साथ ही -
- सिरदर्द कम होगा -
वाहनों के धुएं से निकलने वाले हाइड्रो कार्बन की वजह से लोगों को सिरदर्द होता है। नए फ्यूल में इसका उत्सर्जन 30 फीसदी कम हो जाएगा। ऐसे में जाम में फंसने, वाहनों में सफर करने और प्रदूषित क्षेत्रों में रहने पर सिरदर्द कम होगा।
- उल्टी कम होगी-
वाहनों में सफर करने और जाम वाले क्षेत्रों में लोगों को उल्टियां कार्बन मोनो आक्साइड की वजह से होती हैं। नए ईधन में इसका उत्सर्जन 80 फीसदी कम होगा। इससे उल्टी होने-जी मिचलाने की शिकायत कम हो जाएगी।
- कम होगी आंखों में जलन -
जाम वाले क्षेत्रों में आंखों में जलन नाइट्रोजन के कारण होती है। नए पेट्रोल-डीजल में नाइट्रोजन के उत्सर्जन में 70 फीसदी की कमी आएगी। इससे लोगों को आंखों में चलन होने और पानी निकलने से निजात मिलेगी।
- कम होगी खांसी-
सफर करने और जाम वाले क्षेत्रों में खांसी की शिकायत पार्टीकुलेट मेटल पार्ट के कारण होती है। नए ईधन से इनके उत्सर्जन में 50 फीसदी तक की कमी आ जाएगी। जिससे लोगों को खांसी और सांस के रोगों की शिकायत कम हो सकेगी।
- सिरदर्द कम होगा -
वाहनों के धुएं से निकलने वाले हाइड्रो कार्बन की वजह से लोगों को सिरदर्द होता है। नए फ्यूल में इसका उत्सर्जन 30 फीसदी कम हो जाएगा। ऐसे में जाम में फंसने, वाहनों में सफर करने और प्रदूषित क्षेत्रों में रहने पर सिरदर्द कम होगा।
- उल्टी कम होगी-
वाहनों में सफर करने और जाम वाले क्षेत्रों में लोगों को उल्टियां कार्बन मोनो आक्साइड की वजह से होती हैं। नए ईधन में इसका उत्सर्जन 80 फीसदी कम होगा। इससे उल्टी होने-जी मिचलाने की शिकायत कम हो जाएगी।
- कम होगी आंखों में जलन -
जाम वाले क्षेत्रों में आंखों में जलन नाइट्रोजन के कारण होती है। नए पेट्रोल-डीजल में नाइट्रोजन के उत्सर्जन में 70 फीसदी की कमी आएगी। इससे लोगों को आंखों में चलन होने और पानी निकलने से निजात मिलेगी।
- कम होगी खांसी-
सफर करने और जाम वाले क्षेत्रों में खांसी की शिकायत पार्टीकुलेट मेटल पार्ट के कारण होती है। नए ईधन से इनके उत्सर्जन में 50 फीसदी तक की कमी आ जाएगी। जिससे लोगों को खांसी और सांस के रोगों की शिकायत कम हो सकेगी।