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सहना नहीं, सुनवाई होने तक कहना
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
Updated Tue, 20 Jan 2015 02:40 AM IST
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अन्याय को सहना नहीं है, बताना है। अपनी बात तब तक कहते रहना है जब तक सुनवाई न हो। नीचे के अफसर नहीं सुनते तो उच्चाधिकारियों तक अपनी बात ले जाएं। छात्राओं को यह पाठ अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से अग्रसेन कन्या पीजी कालेज के बुलानाला परिसर में सोमवार को आयोजित ‘पुलिस की पाठशाला’ में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जोगेंद्र कुमार ने पढ़ाया।
काशी अभियान का शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा कि इस पाठशाला से पुलिस और पब्लिक दोनों करीब आएंगे। इस मौके पर एएसपी शालिनी ने पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन के जरिए महिला हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली की जानकारी दी। पुलिस और छात्राओं के बीच एक घंटे से भी अधिक समय तक चले संवाद में ट्रैफिक नियमों से लगायत छेड़खानी तक के मसले पर खुलकर बातें हुईं।
एसएसपी ने कहा कि जिंदगी हमारी है और हम उसे जैसे चाहें जीएं। उसमें किसी का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। मगर यह भी जरूरी है कि हम कानून का पालन करते हुए जिंदगी बिताएं। जो कानून के बारे में जानता है वह गलतियां भी कम करता है। अनजान में ही युवक एडवेंचर के फेर में अपराध की ओर मुड़ जाते हैं।
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मोबाइल, इंटरनेट के चक्कर में अब कई बार ऐसी गलतियां हो रही हैं, जिनकी हमेें जानकारी नहीं होती है। हम पुलिस की छवि बेहतर बनाने में लगे हैँ। थाने जाने में किसी को अब डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि अमर उजाला के इस आयोजन के लिए पुलिस विभाग ऋणी है क्योंकि अखबार इस काम में हमारा सहयोग कर रहा है। कहा कि थानों में भी ऐसी क्लास लगाई जाएगी ताकि विद्यार्थियों के थाने में जाने में संकोच न हो।
सहायक पुलिस अधीक्षक शालिनी ने कहा कि महिलाओं एवं छात्रों को कानून की जानकारी होनी चाहिए। बदलते परिवेश में समस्याओं एवं घटनाओं का समाधान कैसे करेंगे। कहा कि महिलाओं की निजी जिंदगी में झांकना भी अब अपराध है। कोई ऐसा करता है तो महिला हेल्प लाइन 1090 पर कॉल करें पुलिस ऐसा करने वालों से खुद निपटेगी।
सीओ ट्रैफिक जया शांडिल्य ने कहा कि आनलाइन, हेल्पलाइन अथवा पुलिस अफसरों के मोबाइल पर शिकायत जरूर करें केवल इज्जत के नाम पर चुप रहना मुनासिब नहीं है। अतिथियों का स्वागत कालेज के प्रबंधक संदीप अग्रवाल, संचालन कालेज की प्राध्यापिका शुभा सक्सेना ने किया। अमर उजाला के संपादक अजित वडनेरकर ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यवाहक प्राचार्य डा. किरण श्रीवास्तव, डा. प्रतिमा त्रिपाठी,. डा. श्वेता सिंह, डा. कंचन माला, डा. नीता दिशावाल, पवन सिंह, धीरज सिन्हा ने आयोजन में सहयोग किया।
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काशी अभियान का शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा कि इस पाठशाला से पुलिस और पब्लिक दोनों करीब आएंगे। इस मौके पर एएसपी शालिनी ने पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन के जरिए महिला हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली की जानकारी दी। पुलिस और छात्राओं के बीच एक घंटे से भी अधिक समय तक चले संवाद में ट्रैफिक नियमों से लगायत छेड़खानी तक के मसले पर खुलकर बातें हुईं।
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एसएसपी ने कहा कि जिंदगी हमारी है और हम उसे जैसे चाहें जीएं। उसमें किसी का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। मगर यह भी जरूरी है कि हम कानून का पालन करते हुए जिंदगी बिताएं। जो कानून के बारे में जानता है वह गलतियां भी कम करता है। अनजान में ही युवक एडवेंचर के फेर में अपराध की ओर मुड़ जाते हैं।
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मोबाइल, इंटरनेट के चक्कर में अब कई बार ऐसी गलतियां हो रही हैं, जिनकी हमेें जानकारी नहीं होती है। हम पुलिस की छवि बेहतर बनाने में लगे हैँ। थाने जाने में किसी को अब डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि अमर उजाला के इस आयोजन के लिए पुलिस विभाग ऋणी है क्योंकि अखबार इस काम में हमारा सहयोग कर रहा है। कहा कि थानों में भी ऐसी क्लास लगाई जाएगी ताकि विद्यार्थियों के थाने में जाने में संकोच न हो।
सहायक पुलिस अधीक्षक शालिनी ने कहा कि महिलाओं एवं छात्रों को कानून की जानकारी होनी चाहिए। बदलते परिवेश में समस्याओं एवं घटनाओं का समाधान कैसे करेंगे। कहा कि महिलाओं की निजी जिंदगी में झांकना भी अब अपराध है। कोई ऐसा करता है तो महिला हेल्प लाइन 1090 पर कॉल करें पुलिस ऐसा करने वालों से खुद निपटेगी।
सीओ ट्रैफिक जया शांडिल्य ने कहा कि आनलाइन, हेल्पलाइन अथवा पुलिस अफसरों के मोबाइल पर शिकायत जरूर करें केवल इज्जत के नाम पर चुप रहना मुनासिब नहीं है। अतिथियों का स्वागत कालेज के प्रबंधक संदीप अग्रवाल, संचालन कालेज की प्राध्यापिका शुभा सक्सेना ने किया। अमर उजाला के संपादक अजित वडनेरकर ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यवाहक प्राचार्य डा. किरण श्रीवास्तव, डा. प्रतिमा त्रिपाठी,. डा. श्वेता सिंह, डा. कंचन माला, डा. नीता दिशावाल, पवन सिंह, धीरज सिन्हा ने आयोजन में सहयोग किया।