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टाटा मेमोरियल द्वारा कैंसर अस्पताल के विस्तार का रास्ता साफ, रेलवे स्टाफ में मची खलबली
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Thu, 14 Sep 2017 12:38 PM IST
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रेलवे कैंसर अस्पताल
- फोटो : अमर उजाला
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पूर्वोत्तर रेलवे और टाटा मेमोरियल मुंबई के बीच मंगलवार को एमओयू साइन होने के साथ ही वाराणसी के रेलवे कैंसर अस्पताल को, टीएमसी को सौंपने का रास्ता साफ हो गया है। समझौते के कुछ नियमों को लेकर , अस्पताल स्टॉफ और मरीजों में खलबली मच गई है।
लहरतारा स्थित कैंसर अस्पताल को टाटा मेमोरियल विकसित करेगा। इसके लिए महीनों से कई दौर की वार्ता और स्थलीय निरीक्षण की प्रक्रिया चल रही थी। मंगलवार को दिल्ली में पूर्वोत्तर रेलवे और टीएमसी(टाटा मेमोरियल सेंटर) अस्पताल के बीच समझौता हो गया।
इसमें अस्पताल के मौजूदा स्टॉफ को जोन की जरूरत के हिसाब से तैनाती देने के लिए कहा गया है। जबकि पहले यह चर्चा चल रही थी कि कैंसर अस्पताल के स्टॉफ को ट्रेनिंग देकर उनकी सेवा ली जाएगी। वहीं उनकी तैनाती अन्यत्र किए जाने के निर्देश दे दिए गए हैं। जिसके बाद स्टॉफ सकते में है।
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वहीं यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि रेलवे कर्मचारियों के लिए कोई कोटे की बात एमओयू में नही है। इसको लेकर हजारों रेल कर्मचारियों को निराशा हुई है। पहले यह बात आ रही थी कि रेलवे कर्मचारियों को पहले की तरह ही सुविधा मिलेगी लेकिन रेल कर्मचारियों के लिए अलग से कोई कोटा नही रखा गया है। उन्हें भी आम मरीजों की ही श्रेणी में रखा गया है।
वहीं मरीजों को उनकी जरूरत के हिसाब से शिफ्ट कर अस्पताल को टीएमसी को सौंपने की बात एमओयू में है। गंभीर मरीजों को किसी अस्पताल में शिफ्ट कैसे किया जाए, इसको लेकर भी संकट गहरा गया है। एमओयू होने के बाद इसका विरोध भी शुरू हो गया है।
रेल कर्मचारियों और अस्पताल स्टॉफ में इस समझौते को लेकर जबरदस्त नाराजगी है। उनका कहना है कि रेल कर्मचारियों की सुविधा को इस एमओयू में पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया। इसको निजीकरण की संज्ञा रेलवे कर्मचारी दे रहे हैं।
हालांकि दूसरी तरह कैंसर अस्पताल के विस्तारीकरण का रास्ता साफ हो गया है। दिसंबर तक इसको पूरी तरह से टीएमसी ले लेगी। इसके विकास के बाद पूर्वांचल ही नही कई प्रदेशों को भी इसका लाभ मिलेगा।
जन संपर्क अधिकारी अशोक कुमार ने बताया शिफ्टिंग के दौरान मरीजों के स्वास्थ और सुविधा का पूरा ध्यान दिया जाएगा। वहीं टीएमसी जब कैंसर अस्पताल को लेलेगा, उसके बाद कर्मचारियों के ईलाज का खर्च पहले की तरह रेलवे वहन करेगी।
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लहरतारा स्थित कैंसर अस्पताल को टाटा मेमोरियल विकसित करेगा। इसके लिए महीनों से कई दौर की वार्ता और स्थलीय निरीक्षण की प्रक्रिया चल रही थी। मंगलवार को दिल्ली में पूर्वोत्तर रेलवे और टीएमसी(टाटा मेमोरियल सेंटर) अस्पताल के बीच समझौता हो गया।
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इसमें अस्पताल के मौजूदा स्टॉफ को जोन की जरूरत के हिसाब से तैनाती देने के लिए कहा गया है। जबकि पहले यह चर्चा चल रही थी कि कैंसर अस्पताल के स्टॉफ को ट्रेनिंग देकर उनकी सेवा ली जाएगी। वहीं उनकी तैनाती अन्यत्र किए जाने के निर्देश दे दिए गए हैं। जिसके बाद स्टॉफ सकते में है।
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वहीं यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि रेलवे कर्मचारियों के लिए कोई कोटे की बात एमओयू में नही है। इसको लेकर हजारों रेल कर्मचारियों को निराशा हुई है। पहले यह बात आ रही थी कि रेलवे कर्मचारियों को पहले की तरह ही सुविधा मिलेगी लेकिन रेल कर्मचारियों के लिए अलग से कोई कोटा नही रखा गया है। उन्हें भी आम मरीजों की ही श्रेणी में रखा गया है।
वहीं मरीजों को उनकी जरूरत के हिसाब से शिफ्ट कर अस्पताल को टीएमसी को सौंपने की बात एमओयू में है। गंभीर मरीजों को किसी अस्पताल में शिफ्ट कैसे किया जाए, इसको लेकर भी संकट गहरा गया है। एमओयू होने के बाद इसका विरोध भी शुरू हो गया है।
रेल कर्मचारियों और अस्पताल स्टॉफ में इस समझौते को लेकर जबरदस्त नाराजगी है। उनका कहना है कि रेल कर्मचारियों की सुविधा को इस एमओयू में पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया। इसको निजीकरण की संज्ञा रेलवे कर्मचारी दे रहे हैं।
हालांकि दूसरी तरह कैंसर अस्पताल के विस्तारीकरण का रास्ता साफ हो गया है। दिसंबर तक इसको पूरी तरह से टीएमसी ले लेगी। इसके विकास के बाद पूर्वांचल ही नही कई प्रदेशों को भी इसका लाभ मिलेगा।
जन संपर्क अधिकारी अशोक कुमार ने बताया शिफ्टिंग के दौरान मरीजों के स्वास्थ और सुविधा का पूरा ध्यान दिया जाएगा। वहीं टीएमसी जब कैंसर अस्पताल को लेलेगा, उसके बाद कर्मचारियों के ईलाज का खर्च पहले की तरह रेलवे वहन करेगी।