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बनारस में होटल इंडस्ट्री बम-बम, चुनावी मौसम में होली से पहले दिवाली
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Fri, 03 Mar 2017 10:04 PM IST
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चुनावी रण में सभी पार्टियों ने काशी को बनाया अपना केंद्र
- फोटो : डेमो पिक
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आखिरी चरण के रण में जीतोड़ कोशिश में जुटे राजनीतिक दलों की होली कैसी रहेगी, यह तो चुनाव नतीजे बताएंगे लेकिन यहां की होटल इंडस्ट्री में होली और दिवाली का जश्न एक साथ शुरू हो चुका है।
भाजपा, सपा, कांग्रेस और बसपा समेत सभी पार्टियों ने काशी को अपने पूर्वांचल के प्रचार अभियान का केंद्र बनाया है। इन पार्टियों के दिग्गज और स्टार प्रचारक यहां डेरा डाले हुए हैं।
बाहर से पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की टोलियां भी यहां आकर प्रचार अभियान में जुटी हैं। देश-विदेश की मीडिया और राजनीतिक विश्लेषक भी यहां डेरा डाले हुए हैं। हालात ऐसे हैं कि तारांकित छोड़िए, सामान्य होटलों में भी कमरे खाली नहीं हैं।
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गेस्टहाउस, लॉज और धर्मशालाएं भी लगभग पैक हैं।
शहर में छोटे-बड़े ढाई सौ से अधिक होटल और गेस्ट हाउस हैं।
इनके अलावा, लॉज और धर्मशालाएं भी हैं। होटल इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक सांस्कृतिक, धार्मिक नगरी काशी में पर्यटन के लिए सैलानियों की आवाजाही लगी रहती है लेकिन चुनावी मौसम में जिस तरह की बहार छाई है, ऐसा सिर्फ देवदीपावली के मौके पर नजर आता है।
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भाजपा, सपा, कांग्रेस और बसपा समेत सभी पार्टियों ने काशी को अपने पूर्वांचल के प्रचार अभियान का केंद्र बनाया है। इन पार्टियों के दिग्गज और स्टार प्रचारक यहां डेरा डाले हुए हैं।
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बाहर से पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की टोलियां भी यहां आकर प्रचार अभियान में जुटी हैं। देश-विदेश की मीडिया और राजनीतिक विश्लेषक भी यहां डेरा डाले हुए हैं। हालात ऐसे हैं कि तारांकित छोड़िए, सामान्य होटलों में भी कमरे खाली नहीं हैं।
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गेस्टहाउस, लॉज और धर्मशालाएं भी लगभग पैक हैं।
शहर में छोटे-बड़े ढाई सौ से अधिक होटल और गेस्ट हाउस हैं।
इनके अलावा, लॉज और धर्मशालाएं भी हैं। होटल इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक सांस्कृतिक, धार्मिक नगरी काशी में पर्यटन के लिए सैलानियों की आवाजाही लगी रहती है लेकिन चुनावी मौसम में जिस तरह की बहार छाई है, ऐसा सिर्फ देवदीपावली के मौके पर नजर आता है।
लंबी सोर्स-पैरवी के बाद भी कमरे नहीं मिल रहे
कार्तिक पूर्णिमा पर यहां के गंगा घाटों पर देव दीपावली की भव्यता निहारने के लिए देश-विदेश से हजारों सैलानी आते हैं।
कुछ वैसी ही स्थिति चुनावी माहौल में भी दिख रही है। तारांकित होटलों में लंबी सोर्स-पैरवी के बाद भी कमरे नहीं मिल रहे हैं।
कैंटोनमेंट, सारनाथ के अलावा कैंट, अस्सी, दशाश्वमेध, गोदौलिया, चौक, बाबतपुर और रामनगर तक के सभी होटलों में बुकिंग फुल है।
रिवाटास के सेल्स और मार्केटिंग मैनेजर अभिषेक शर्मा और होटल सात्विक राहुल मेहता कहते हैं कि छह मार्च के बाद भीड़ थोड़ी कम हो जाएगी लेकिन होटल कारोबार के लिए यह साल बेहतरीन रहने वाला है।
कुछ वैसी ही स्थिति चुनावी माहौल में भी दिख रही है। तारांकित होटलों में लंबी सोर्स-पैरवी के बाद भी कमरे नहीं मिल रहे हैं।
कैंटोनमेंट, सारनाथ के अलावा कैंट, अस्सी, दशाश्वमेध, गोदौलिया, चौक, बाबतपुर और रामनगर तक के सभी होटलों में बुकिंग फुल है।
रिवाटास के सेल्स और मार्केटिंग मैनेजर अभिषेक शर्मा और होटल सात्विक राहुल मेहता कहते हैं कि छह मार्च के बाद भीड़ थोड़ी कम हो जाएगी लेकिन होटल कारोबार के लिए यह साल बेहतरीन रहने वाला है।