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यहां कागज पर खेले जाते हैं कई खेल, 14 वर्ष से बन रहा है स्टेडियम
ब्यूरो,अमर उजाला,मिर्जापुर
Updated Thu, 01 Jun 2017 06:40 PM IST
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फुटबॉल
- फोटो : self
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यूपी की महिला फुटबाल टीम में लगातार खिलाड़ी देने वाला मिर्जापुर जिला एक अदद फुटबाल मैदान के लिए तरस रहा है। न कोच है और न ही सुविधाएं। अपने दम पर खेल खेलने वाले युवा यदा कदा प्रदेश के खेल जगत में हलचल मचा देते हैं। जिले में 14 वर्षों से स्टेडियम बन रहा है लेकिन पूर्ण अभी तक नहीं हो पाया है।
प्रदेश सरकार ने फुटबाल और हाकी जैसे ग्रामीण खेलों के लिए प्रशिक्षक नियुक्त नहीं किए गए हैं। प्राइवेट कोच की निगरानी में खेल रहीं जिले से दो महिला खिलाड़ियों का चयन यूपी की टीम में हो चुका है। 14 वर्षों से बन रहे स्टेडियम की स्थिति यह है कि यहां कोई भी खेल खेला नहीं जा सकता है। सीढ़ीदार मैदान में अभी भी बड़े बड़े पत्थर पड़े हुए हैं जिसके चलते यहां कोई भी खेल आयोजित नहीं हो पाता है।
निर्माणकर्ता पैक्सपेड कंपनी ने अब तक निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिया लेकिन यहां कोई खेल खेला जा सके ऐसी स्थिति नहीं बन सकी है। यही कारण है कि कंपनी को प्रमुख सचिव स्तर से चेतावनी दी गई है। मैदान में न तो घास के लिए पानी है और खिलाड़ियों के पीने के लिए पानी मिल पाता है।
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बोरिंग से पानी आता है वह भी मात्र दस मिनट, इसके बाद बोर पानी देना बंद कर देता है। बिजली का कनेक्शन अब जा कर मिला है। पहाड़ के बीच में बने मैदान पर पहुंचने के लिए अभी तक एप्रोच रोड तैयार नहीं हो पाया है। वन विभाग ने इसमें अड़ंगा लगा दिया है।
उप क्रीड़ा अधिकारी अभिषेक कुमार ने बताया कि मेरा प्रयास है कि स्टेडियम में खेल की गतिविधियां शुरू हों। खिलाड़ी स्टेडियम तक पहुंचे। इसके लिए स्टेडियम निर्माण के लिए प्रयासरत हूं। हालांकि अभी 50 से 60 प्रतिशत ही काम हुआ है। वॉलीबाल और कबड्डी के लिए मिट्टी डाल कर कोर्ट तैयार कर लिया गया है।
इस बार में राष्ट्रीय फुटबाल खिलाड़ी मुहम्मद तुफैल ने बताया कि वर्ष 2002 से बन रहा स्टेडियम यदि पांच वर्षोँ में भी बन गया होता तो अब तक सौ से अधिक राष्ट्रीय स्तर की प्रतिभाएं यहां से निकल सकती थीं।
यहां हर खेल के लिए प्रतिभाएं भरी पड़ी हैं। उन्हें न तो सुविधा मिलती है और न ही सरकारी सहायता। इसलिए यहां का खेल विकास रुका हुआ है।
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प्रदेश सरकार ने फुटबाल और हाकी जैसे ग्रामीण खेलों के लिए प्रशिक्षक नियुक्त नहीं किए गए हैं। प्राइवेट कोच की निगरानी में खेल रहीं जिले से दो महिला खिलाड़ियों का चयन यूपी की टीम में हो चुका है। 14 वर्षों से बन रहे स्टेडियम की स्थिति यह है कि यहां कोई भी खेल खेला नहीं जा सकता है। सीढ़ीदार मैदान में अभी भी बड़े बड़े पत्थर पड़े हुए हैं जिसके चलते यहां कोई भी खेल आयोजित नहीं हो पाता है।
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निर्माणकर्ता पैक्सपेड कंपनी ने अब तक निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिया लेकिन यहां कोई खेल खेला जा सके ऐसी स्थिति नहीं बन सकी है। यही कारण है कि कंपनी को प्रमुख सचिव स्तर से चेतावनी दी गई है। मैदान में न तो घास के लिए पानी है और खिलाड़ियों के पीने के लिए पानी मिल पाता है।
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बोरिंग से पानी आता है वह भी मात्र दस मिनट, इसके बाद बोर पानी देना बंद कर देता है। बिजली का कनेक्शन अब जा कर मिला है। पहाड़ के बीच में बने मैदान पर पहुंचने के लिए अभी तक एप्रोच रोड तैयार नहीं हो पाया है। वन विभाग ने इसमें अड़ंगा लगा दिया है।
उप क्रीड़ा अधिकारी अभिषेक कुमार ने बताया कि मेरा प्रयास है कि स्टेडियम में खेल की गतिविधियां शुरू हों। खिलाड़ी स्टेडियम तक पहुंचे। इसके लिए स्टेडियम निर्माण के लिए प्रयासरत हूं। हालांकि अभी 50 से 60 प्रतिशत ही काम हुआ है। वॉलीबाल और कबड्डी के लिए मिट्टी डाल कर कोर्ट तैयार कर लिया गया है।
इस बार में राष्ट्रीय फुटबाल खिलाड़ी मुहम्मद तुफैल ने बताया कि वर्ष 2002 से बन रहा स्टेडियम यदि पांच वर्षोँ में भी बन गया होता तो अब तक सौ से अधिक राष्ट्रीय स्तर की प्रतिभाएं यहां से निकल सकती थीं।
यहां हर खेल के लिए प्रतिभाएं भरी पड़ी हैं। उन्हें न तो सुविधा मिलती है और न ही सरकारी सहायता। इसलिए यहां का खेल विकास रुका हुआ है।