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रथ खींचकर निहाल हुए भक्त
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 09 Jul 2016 02:19 AM IST
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काशी में धार्मिक भावना का प्रगाढ़ रंग शुक्रवार को रथयात्रा मेले में सहज सामने आया। भगवान के सैर-सपाटे के तीसरे और आखिरी दिन रथ खींचने के लिए काशीवासी उमड़ पड़े। जनप्रतिनिधि भी भगवान का रथ खींचकर निहाल हुए और अफसर भी। भगवान इंद्र ने भी मुग्ध होकर भगवान के रथ के पहियों को फुहारों से भिगोया। आखिरी दिन रात भर भगवान के पट खुले रहे और दर्शन के लिए रेला लगा रहा। शनिवार की भोर में भगवान की रथयात्रा पूरी हो जाएगी और वह अस्सी स्थित मंदिर में विराजित कर दिए जाएंगे।
काशी के लक्खी मेले में शुक्रवार की रात भीड़ उमड़ पड़ी। रात आठ बजे तक रथयात्रा जाने वाली सड़कों पर तिल रखने की जगह नहीं थी। इससे पहले दिन के करीब 11 बजे सैकड़ों भक्तों ने भगवान का रथ खींचा। डिवाइडर बनने की वजह से रथ खींचने के दौरान कई बार असुविधा भी हुई। बार-बार रस्सा सीधा कर भक्तों ने रथ खींचकर यूनियन बैंक के सामने पहुंचाया। वहां घंटे, घड़ियाल के साथ आरती उतारी गई। भगवान का पीले वस्त्रों में भव्य शृंगार किया गया। पीले फूलों के अलावा मिठाइयों और फलों करा भोग लगाया गया।
शाम को प्रभु जगन्नाथ के रथ के पहियों का स्पर्श करने और तुलसी की माला अर्पित करने की होड़ मच गई। महिलाओं। बच्चों में जगन्नाथ जी के दर्शन की ललक देखी गई। इसके लिए रथयात्रा चौराहे से पहले सड़क पर ही लंबी कतार लगी रही। लोग रथ की परिक्रमा करते रहे। रथयात्रा की दोनों पटरियों पर कहीं तुलसी दल लिए बच्चों की भीड़ है तो कहीं खिलौनों का अनूठा संसार सजा है। बच्चे मेले में खिलौनों, गुब्बारों पर आकर्षित हो रहे थे। पिपिहरी के अलावा तरह-तरह के भोंपू मेले में छाए रहे। झूले, चर्खियों पर मस्ती भरे शोर भोर तक गूंजते रहे।
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काशी के लक्खी मेले में शुक्रवार की रात भीड़ उमड़ पड़ी। रात आठ बजे तक रथयात्रा जाने वाली सड़कों पर तिल रखने की जगह नहीं थी। इससे पहले दिन के करीब 11 बजे सैकड़ों भक्तों ने भगवान का रथ खींचा। डिवाइडर बनने की वजह से रथ खींचने के दौरान कई बार असुविधा भी हुई। बार-बार रस्सा सीधा कर भक्तों ने रथ खींचकर यूनियन बैंक के सामने पहुंचाया। वहां घंटे, घड़ियाल के साथ आरती उतारी गई। भगवान का पीले वस्त्रों में भव्य शृंगार किया गया। पीले फूलों के अलावा मिठाइयों और फलों करा भोग लगाया गया।
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शाम को प्रभु जगन्नाथ के रथ के पहियों का स्पर्श करने और तुलसी की माला अर्पित करने की होड़ मच गई। महिलाओं। बच्चों में जगन्नाथ जी के दर्शन की ललक देखी गई। इसके लिए रथयात्रा चौराहे से पहले सड़क पर ही लंबी कतार लगी रही। लोग रथ की परिक्रमा करते रहे। रथयात्रा की दोनों पटरियों पर कहीं तुलसी दल लिए बच्चों की भीड़ है तो कहीं खिलौनों का अनूठा संसार सजा है। बच्चे मेले में खिलौनों, गुब्बारों पर आकर्षित हो रहे थे। पिपिहरी के अलावा तरह-तरह के भोंपू मेले में छाए रहे। झूले, चर्खियों पर मस्ती भरे शोर भोर तक गूंजते रहे।
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