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NGT ने DM से मांगी रिपोर्ट: असि व वरुणा नदी के जल की गुणवत्ता पूछी, अवैध कब्जे पर जताई चिंता; जानें खास

Sat, 06 Sep 2025 05:51 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sat, 06 Sep 2025 05:51 AM IST
सार

Varanasi News: असि व वरुणा नदी के बाढ़ मैदान क्षेत्र के सीमांकन का कार्य राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, देहरादून और भारतीय सर्वेक्षण विभाग को सौंपा गया है। मामले में अगली सुनवाई 11 नवंबर को होगी।

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NGT sought report from DM varanasi asked about quality of water of Asi and Varuna rivers
एनजीटी ने जताई चिंता। - फोटो : संवाद

विस्तार

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने जिलाधिकारी वाराणसी से असि व वरुणा नदी के जल की गुणवत्ता रिपोर्ट मांगी है। एनजीटी ने दोनों नदियों के अवैध कब्जे पर गंभीर रुख अख्तियार किया है। इसके साथ ही एनजीटी ने असि-वरुणा के जीर्णोद्धार पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। 

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एनजीटी की प्रधानपीठ ने सुनवाई करते हुए जिलाधिकारी को असि व वरुणा नदी कि जल कि गुणवत्ता रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। आदेश में कहा गया है कि चार सप्ताह में जिलाधिकारी एवं राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन रिपोर्ट दाखिल करें।

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124 पृष्ठ की रिपोर्ट दाखिल

जिलाधिकारी ने एनजीटी के समक्ष दाखिल 12 अगस्त के अपने शपथ पत्र में उल्लेख किया है कि राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान एवं सिंचाई विभाग, बंधी प्रखंड वाराणसी के बीच पिछले वर्ष 7 दिसंबर को असि व वरुणा नदी के सीमांकन के लिए समझौता किया गया है।

जिलाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में यह उल्लेख किया है कि असि नदी आठ किलोमीटर तथा वरुणा नदी 54 किलोमीटर तक की दूरी वाराणसी की सीमा में तय करती है। अधिवक्ता सौरभ तिवारी की ओर से दायर याचिका पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण प्रधान पीठ नई दिल्ली के चेयरपर्सन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव एवं विशेषज्ञ सदस्य डाॅ. ए. सेंथिल वेल कि पीठ सुनवाई कर रही है। जिलाधिकारी ने असि व वरुणा नदी को अतिक्रमण मुक्त करने एवं जीर्णोद्धार के लिए कुल 124 पृष्ठ की रिपोर्ट दाखिल की है।

बरसाती नालों को टैप किए जाने पर जताई चिंता
एनजीटी ने अपने आदेश में चिंता प्रकट की है कि नालों के प्रवाह को एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) की ओर मोड़ने के लिए बरसाती नालों को टैप किया जा रहा है और एसटीपी के साथ 100 प्रतिशत घरेलू सीवेज को सीधे जोड़ने की कोई योजना नहीं है। 

एनजीटी ने अपने आदेश में कहा है कि बरसाती नाले में अवैध रूप से बह रहे अशोधित जल को एसटीपी से जोड़ने से केवल अल्पकालिक समाधान हो सकता है, लेकिन बारिश के दौरान एसटीपी में पानी भरने से हाइड्रोलिक गड़बड़ी होने से अशोधित सीवेज नदी में प्रवाह होता है।

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एनजीटी ने 2021 में जीर्णोद्धार के लिए दिया था अंतिम आदेश
एनजीटी ने 23 नवंबर 2021 को असि और वरुणा नदी के जीर्णोद्धार के लिए विस्तृत अंतिम आदेश पारित किया था। इसका अनुपालन न होने के कारण अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने एनजीटी के समक्ष अनुपालन/ निष्पादन याचिका दाखिल की है। एनजीटी चेयरपर्सन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव एवं विशेषज्ञ डाॅ. ए. सेंथिल वेल की पीठ इस मामले कि सुनवाई कर रही है।

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