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प्रवासी भारतीय सम्मेलनः न्यूजीलैंड और नार्वे के सांसद ने रखी अपनी बात, जानिए क्या कहा

Tue, 22 Jan 2019 10:12 AM IST
shashikant misra न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Published by: shashikant misra Updated Tue, 22 Jan 2019 10:12 AM IST
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New zealand MP kanwaljeet bakshi and norway MP himanshu gulati statement
न्यूजीलैंड के सांसद कंवलजीत सिंह बक्शी - फोटो : amar ujala
बनारस में सोमवार को शुरू हुए तीन दिवसीय प्रवासी भारतीय सम्मेलन में शामिल होने आए न्यूजीलैंड के सांसद कंवलजीत सिंह बक्शी और नार्वे के सांसद हिमांशु गुलाटी ने अपनी बात रखी।
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प्रवासी भारतीयों को दोहरी नागरिकता का अधिकार मिले और उन्हें राज्यसभा में नामित किया जाए। न्यूजीलैंड में चार बार से सांसद चुने जा रहे कंवलजीत सिंह बक्शी ने सोमवार को यह बात बड़ा लालपुर स्थित दीनदयाल हस्तकला संकुल में ‘अमर उजाला’ से कही।
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नई दिल्ली के मूल निवासी कंवलजीत ने कहा कि हिंदुस्तान असीम संभावनाओं वाला देश है।  प्रवासी भारतीयों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके विदेश मंत्रालय की पहल, तत्परता और उत्सुकता सराहनीय है।
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देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रवासी भारतीयों की यहां की नागरिकता का अधिकार दिया जाना जरूरी है। राज्यसभा में नामित किए जाने से हिंदुस्तान के उच्च सदन में प्रवासी भारतीयों का प्रतिनिधित्व होगा और वो नीतिगत तरीके से भी यहां के विकास में अपना योगदान दे सकेंगे।

मेलजोल का सिलसिला बढ़ेगा तो प्रवासी भारतीयों के माध्यम से यहां निवेश और व्यापार बढ़ेगा। हमारी जड़ें यहीं हैं और हिंदुस्तान दुनिया का सबसे अच्छा देश है। गंगा किनारे बसी दुनिया की पुरातन नगरी में आकर अभिभूत हूं। 

युवा बदलना चाहते हैं दुनिया

New zealand MP kanwaljeet bakshi and norway MP himanshu gulati statement
नार्वे के सांसद हिमांशु गुलाटी - फोटो : amar ujala
युवा प्रवासी दिवस के विशिष्ट अतिथि नार्वे के सांसद हिमांशु गुलाटी ने कहा कि युवाओं के पास बड़ी ताकत है और वे दुनिया बदलना चाहते हैं। प्राकृतिक संसाधन हमारी बड़ी संपदा हैं और युवाओं को इनकी कीमत समझनी चाहिए।

उन्होंने महात्मा गांधी के शब्दों को युवाओं के लिए आदर्श बताया और कहा, स्वच्छता हमारे संस्कार और संस्कृति को भी बताती है। नार्वे के सांसद ने भाषण की शुरुआत अपनी 30 वर्ष की उम्र बताकर की। उन्होंने कहा, 40 साल पहले मेरे माता-पिता यहां से गए थे और वहां अपनी मेहनत से मुकाम बनाया।

भारत में सम्मान दिया जाना उनके लिए गौरव की बात है। नार्वे की ज्यादातर कैंटीन में लिखा होता है कि यहां मां काम नहीं करती। इससे वहां स्वच्छता का संदेश दिया जाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काम काज की तारीफ की और कहा, भारत और नार्वे के संबंधों को मजबूत बनाने के लिए भूमिका अदा कर रहे हैं। इस काम में प्रधानमंत्री मोदी का सहयोग करेंगे।
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