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सपा छोड़ने के बाद नीरज शेखर बोले- व्यक्तिगत कारणों से दिया इस्तीफा, भाजपा में जाने की अटकलें

Mon, 15 Jul 2019 08:43 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बलिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बलिया Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Mon, 15 Jul 2019 08:43 PM IST
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neeraj statement after resign from samajwadi and party rajyasabha mp ballia
चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर। - फोटो : Google

पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर ने सोमवार को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के साथ ही समाजवादी पार्टी से भी इस्तीफा दे दिया। इसकी सूचना मिलते ही बलिया जिले की राजनीति में हलचल सी मच गई। समर्थकों के साथ राजनीति से जुड़े लोगों के बीच इसको लेकर चर्चा होती रही। सूत्रों की मानें तो नीरज शेखर जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं।

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इस संबंध में जब नीरज शेखर से बात की गई तो उन्होंने इस्तीफे के पीछे कोई राजनीतिक कारण ना बताकर इसे नितांत व्यक्तिगत कारण बताया। नीरज शेखर ने बताया कि उन्होंने अपने व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दिया है। बताया जा रहा है कि राज्यसभा अध्यक्ष ने नीरज शेखर के इस्तीफा को स्वीकार भी कर लिया है।
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नीरज शेखर का राज्यसभा कार्यकाल नवंबर 2020 तक था। कहा जा रहा है नीरज शेखर को भाजपा 2020 में यूपी से राज्यसभा में भेज सकती है। यह भी कहा जा रहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर पर लिखी राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश की पुस्तक ‘चंद्रशेखर- द लास्ट आइकन ऑफ आइडियोलॉजिकल पॉलिटिक्स’ का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विमोचन करेंगे।

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इससे पहले उनके बेटे नीरज शेखर भाजपा में शामिल हो जाएंगे। वैसे नीरज शेखर के सपा छोड़ने और राज्य सभा सांसद पद से इस्तीफा देने की अटकलें उसी दिन से शुरू हो गई थीं जिस दिन सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने नीरज शेखर का बलिया से टिकट काटकर सनातन पांडेय को दे दिया था। इसके बाद से नीरज शेखर के समर्थकों ने भी खुले तौर से सपा से किनारा करते हुए भाजपा के साथ जाने का एलान कर दिया था।

लोकसभा चुनाव के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री के राजनीतिक सलाहकार रहे एचएम शर्मा ने भी इस दौरान वीरेंद्र सिंह मस्त के पक्ष में पत्रकार वार्ता की थी और भाजपा को वोट देने की अपील की थी। ताजा घटनाक्रम भी उसी घटनाक्रम का हिस्सा माना जा रहा है। नीरज शेखर का इस्तीफा देना उनकी साफ तौर पर उनकी अखिलेश यादव और पार्टी नेतृत्व के प्रति नाराजगी को व्यक्त करता है।

बता दें कि, पिता चंद्रशेखर की मौत के बाद नीरज शेखर ने पहली बार वर्ष 2007 में चुनाव लड़ा था। वे बलिया की सीट से चुनाव जीत कर संसद में पहुंचे थे। उन्होंने इस उपचुनाव में करीब तीन लाख वोटों से जीत हासिल की थी। इसके बाद 2009 के आम चुनावों में भी उन्होंने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा था। हालांकि साल 2014 में बीजेपी प्रत्याशी भरत सिंह ने नीरज शेखर को इस सीट से चुनाव में मात दे दी थी।

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