महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के शिक्षाशास्त्र विभाग के जागरूकता कार्यक्रम में उच्च शिक्षा से जुड़े बिंदुओं पर चर्चा हुई। अंग्रेजी विभाग के प्रो. नलिनी श्याम कामिल ने कहा कि उच्च शिक्षा को ज्यादा समावेशी, मूल्य आधारित बनाने की जरूरत है। वर्तमान परिदृश्य में उच्च शिक्षा को सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ना होगा। इसके लिए शिक्षकों को आगे आना होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति: उन्मुखीकरण एवं जागरूकता कार्यक्रम में प्रो. नलिनी ने कहा कि समाज और शिक्षा को अलग-अलग नहीं किया जा सकता है। दोनों एक दूसरे के पूरक है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति समाज में समानता, नैतिकता, नवाचार और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देने का एक सशक्त माध्यम है। आर्यभट्ट महाविद्यालय दिल्ली में अंग्रेजी विभाग की शिक्षक डॉ. रोशनी ने कहा कि जहां बोलोनिया, पेरिस, ऑक्सफोर्ड और कैंब्रिज जैसे विश्वविद्यालयों ने संगठित पाठ्यक्रम, डिग्री प्रणाली और शोध परंपरा की नींव रखी, वहीं एशिया में नालंदा और तक्षशिला जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्ञान का प्रसार किया। अतिथियों का स्वागत कर केंद्र निदेशक प्रो. सुरेंद्र राम ने कहा कि समाज की आवश्यकताओं के अनुसार ही शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना राष्ट्रीय शिक्षा नीति का ध्येय है। संचालन प्रो. रमाकांत सिंह, धन्यवाद ज्ञापन डॉ. लालधारी यादव ने दिया।