{"_id":"5bd043b1bdec2269a369a9a9","slug":"naxalite-learning-skills-to-make-carpet","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"अच्छी पहलः हथियार नहीं कालीन बनाने का हुनर सीख रहे नक्सली ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अच्छी पहलः हथियार नहीं कालीन बनाने का हुनर सीख रहे नक्सली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 24 Oct 2018 03:34 PM IST
विज्ञापन
demo pic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूपी के मिर्जापुर और सोनभद्र के नक्सली हथियार छोड़ कालीन बुनने का हुनर सीख रहे हैं। भारतीय कालीन संवर्धन परिषद (सीईपीसी) नक्सलियों को मुख्य धारा में जोड़ने के लिए उनके परिवारों को कालीन बुनाई का प्रशिक्षण दे रहा है। कुछ लोगों ने प्रशिक्षण प्राप्त कर कालीन की बुनाई शुरू भी कर दी है।
सीईपीसी का उद्देश्य नक्सलियों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के साथ ही कालीन उद्योग में घटते बुनकरों की संख्या को भी बढ़ाना है। बुनकरों के विकास और उनको अधिक से अधिक बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय व सीईपीसी ने नक्सल क्षेत्र के लोगों को हुनरमंद बनाने का संयुक्त प्रयास शुरू किया।
कालीन निर्माताओं निर्यातकों का कहना है कि पहले नक्सली परिवार को कालीन बुनाई का प्रशिक्षण दिया जाता है। जब वे पूरी तरह पारंगत हो जाते हैं तो उनके घर पर ही पावरलूम की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सीईपीसी का उद्देश्य नक्सलियों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के साथ ही कालीन उद्योग में घटते बुनकरों की संख्या को भी बढ़ाना है। बुनकरों के विकास और उनको अधिक से अधिक बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय व सीईपीसी ने नक्सल क्षेत्र के लोगों को हुनरमंद बनाने का संयुक्त प्रयास शुरू किया।
विज्ञापन
कालीन निर्माताओं निर्यातकों का कहना है कि पहले नक्सली परिवार को कालीन बुनाई का प्रशिक्षण दिया जाता है। जब वे पूरी तरह पारंगत हो जाते हैं तो उनके घर पर ही पावरलूम की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
विज्ञापन
डिजाइन का प्रशिक्षण देने की भी योजना
demo pic
सीईपीसी के कार्यकारी निदेशक संजय कुमार ने बताया कि कालीन बुनकरी व्यवसाय के संवर्धन के लिए नए क्षेत्रों की तलाश में झारखंड के रांची पहुंचे तो वहां के प्रमुख सचिव को योजना अच्छी लगी और फिर वहां के लोहारदग्गा, पलामू, गढ़वा जैसे नक्सली क्षेत्रों में इस योजना की शुरुआत की गई और यह प्रयास रंग लाया।
उन्होंने बताया कि इसके बाद उड़ीसा के धारचूला, नेलयरा, छत्तीसगढ़ के राबनंद गांव, पश्चिम बंगाल के मालदा नार्थ व दिनाजपुर, आंध्र प्रदेश के कुन्नूर, बिहार के गया, नेवादा, मधुबनी व दागा के अलावा यूपी के सोनभद्र व मीरजापुर आदि जगहों पर नक्सली परिवारों को कालीन बुनाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
सीईपीसी के कार्यकारी निदेशक ने बताया कि इसके बाद नक्सली परिवारों को डिजाइन का प्रशिक्षण देने की भी योजना है। इसके तहत 40-40 की संख्या में प्रशिक्षित किया जाएगा। बताया कि वर्तमान में चल रहे परीक्षण केंद्रों पर 20-20 की संख्या में लोगों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इसके बाद उड़ीसा के धारचूला, नेलयरा, छत्तीसगढ़ के राबनंद गांव, पश्चिम बंगाल के मालदा नार्थ व दिनाजपुर, आंध्र प्रदेश के कुन्नूर, बिहार के गया, नेवादा, मधुबनी व दागा के अलावा यूपी के सोनभद्र व मीरजापुर आदि जगहों पर नक्सली परिवारों को कालीन बुनाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
सीईपीसी के कार्यकारी निदेशक ने बताया कि इसके बाद नक्सली परिवारों को डिजाइन का प्रशिक्षण देने की भी योजना है। इसके तहत 40-40 की संख्या में प्रशिक्षित किया जाएगा। बताया कि वर्तमान में चल रहे परीक्षण केंद्रों पर 20-20 की संख्या में लोगों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।