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काशी में भक्ति और मस्ती में होगा नवसंवत्सर का स्वागत, मनहर उधास की प्रस्तुति लगाएगी चार चांद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 17 Mar 2018 04:28 PM IST
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भगवान शिव की नगरी काशी में इस वर्ष नवसंवत्सर के स्वागत के लिए खासा उत्साह है। काशी के अर्द्धचंद्राकार गंगा के घाट इस मौके पर उत्सव के साक्षी बनेंगे। अस्सी से लेकर राजघाट तक गीत, संगीत, भजन और मंत्रोच्चार के बीच सर्व मंगल की कामना की जाएगी।
पार्श्व गायक मनहर उधास का गायन, स्थानीय कलाकारों के संगीत की प्रस्तुति और आर्केस्ट्रा के इयूवी बैंड के कलाकारों का गायन सभी को भक्ति और मस्ती में झुमा देगा।
मेषराशि में सूर्य के प्रवेश के साथ ही 18 मार्च को भारतीय नववर्ष और शक्ति की आराधना का महापर्व आरंभ होगा। गंगा के तट पर उदीयमान सूर्य को अर्घ्य और आरती के साथ ही भारतीय नववर्ष का स्वागत किया जाएगा।
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नवसंवत्सर 2075 के स्वागत समारोह के लिए राजघाट पर पहल एवं सुरगंगा के मंच पर शनिवार को सांस्कृतिक निशा का आयोजन किया जा रहा है। इसके तहत सुंदर कांड का पाठ होगा।
इसके बाद पार्श्व गायक मनहर उधास का गायन और स्थानीय कलाकारों के संगीत की प्रस्तुति और आर्केस्ट्रा के इयूवी बैंड के कलाकारों का गायन पेश किया जाएगा। भगवान राम की शक्ति पूजा सांस्कृतिक संध्या का प्रमुख आकर्षण होगी।
रविवार को ब्रह्ममूहूर्त में विद्वानों द्वारा वेद पाठ, सामूहिक वैदिक सूर्य वंदना, सूर्य व मां गंगा की आरती तथा अर्घ्य का कार्यक्रम आयोजित किया गया है। आरती के बादी नाव तथा बजड़ों पर राजघाट से अस्सी तक नव संवत्सर की शुभ सूचना तथा नगर वासियों को शुभ संदेश देने के लिए प्रभात फेरी भी निकाली जाएगी।
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पार्श्व गायक मनहर उधास का गायन, स्थानीय कलाकारों के संगीत की प्रस्तुति और आर्केस्ट्रा के इयूवी बैंड के कलाकारों का गायन सभी को भक्ति और मस्ती में झुमा देगा।
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मेषराशि में सूर्य के प्रवेश के साथ ही 18 मार्च को भारतीय नववर्ष और शक्ति की आराधना का महापर्व आरंभ होगा। गंगा के तट पर उदीयमान सूर्य को अर्घ्य और आरती के साथ ही भारतीय नववर्ष का स्वागत किया जाएगा।
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नवसंवत्सर 2075 के स्वागत समारोह के लिए राजघाट पर पहल एवं सुरगंगा के मंच पर शनिवार को सांस्कृतिक निशा का आयोजन किया जा रहा है। इसके तहत सुंदर कांड का पाठ होगा।
इसके बाद पार्श्व गायक मनहर उधास का गायन और स्थानीय कलाकारों के संगीत की प्रस्तुति और आर्केस्ट्रा के इयूवी बैंड के कलाकारों का गायन पेश किया जाएगा। भगवान राम की शक्ति पूजा सांस्कृतिक संध्या का प्रमुख आकर्षण होगी।
रविवार को ब्रह्ममूहूर्त में विद्वानों द्वारा वेद पाठ, सामूहिक वैदिक सूर्य वंदना, सूर्य व मां गंगा की आरती तथा अर्घ्य का कार्यक्रम आयोजित किया गया है। आरती के बादी नाव तथा बजड़ों पर राजघाट से अस्सी तक नव संवत्सर की शुभ सूचना तथा नगर वासियों को शुभ संदेश देने के लिए प्रभात फेरी भी निकाली जाएगी।
भाग्यशाली होगा नवसंवत्सर
kashi
नववर्ष चेतना मंच एवं दीक्षा ललित कला अकादमी की ओर से नवसंवत्सर के बारे में जानकारी देने के लिए आयोजित कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद तरुण विजय ने कहा कि जिस दिन सृष्टि का चक्र प्रथम बार विधाता ने परिवर्तित किया उस दिन रविवार था।
हमारे लिए आने वाला नवसंवत्सर 2075 बहुत भाग्यशाली होगा क्योंकि इस साल भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को रविवार पड़ रहा है। इस दौरान वक्ताओं ने नवसंवत्सर के बारे में युवाओं को जानकारी दी।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद घाट पर रविवार को काशी और महाराष्ट्र की संस्कृति एकाकार होगी। हर-हर गंगे दो प्रांत एक सिद्धांत कार्यक्रम के तहत गुढ़ी ध्वजारोहण किया जाएगा। इसके साथ ही बच्चों द्वारा पेंटिंग प्रदर्शनी लगाई जाएगी।
इसमें मराठा संस्कृति का इतिहास, महाराष्ट्र और काशी, बाजीराव पेशवा, रानी लक्ष्मीबाई, गंगा नदी और घाट को केंद्र में रखा गया है। अगली कड़ी में रानी लक्ष्मीबाई पर आधारित लघु विचार नाटिका का मंचन और बांसुरी वादक पं. रोनू मजूमदार का बांसुरी वादन पेश किया जाएगा।
नव वर्ष चेतना मंच एवं दीक्षा ललित कला समिति की ओर से नवसंवत्सर के बारे में युवाओं को जागरूक और जोड़ने के लिए प्रत्यूष का आयोजन किया जा रहा है। तीन दिवसीय आयोजन के तहत संगोष्ठी, सांस्कृतिक संध्या कृष्णा और विरोधकृत नवसंवत्सर का स्वागत किया जाएगा।
हमारे लिए आने वाला नवसंवत्सर 2075 बहुत भाग्यशाली होगा क्योंकि इस साल भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को रविवार पड़ रहा है। इस दौरान वक्ताओं ने नवसंवत्सर के बारे में युवाओं को जानकारी दी।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद घाट पर रविवार को काशी और महाराष्ट्र की संस्कृति एकाकार होगी। हर-हर गंगे दो प्रांत एक सिद्धांत कार्यक्रम के तहत गुढ़ी ध्वजारोहण किया जाएगा। इसके साथ ही बच्चों द्वारा पेंटिंग प्रदर्शनी लगाई जाएगी।
इसमें मराठा संस्कृति का इतिहास, महाराष्ट्र और काशी, बाजीराव पेशवा, रानी लक्ष्मीबाई, गंगा नदी और घाट को केंद्र में रखा गया है। अगली कड़ी में रानी लक्ष्मीबाई पर आधारित लघु विचार नाटिका का मंचन और बांसुरी वादक पं. रोनू मजूमदार का बांसुरी वादन पेश किया जाएगा।
नव वर्ष चेतना मंच एवं दीक्षा ललित कला समिति की ओर से नवसंवत्सर के बारे में युवाओं को जागरूक और जोड़ने के लिए प्रत्यूष का आयोजन किया जा रहा है। तीन दिवसीय आयोजन के तहत संगोष्ठी, सांस्कृतिक संध्या कृष्णा और विरोधकृत नवसंवत्सर का स्वागत किया जाएगा।