यूपी: उत्तर में दक्षिण भारतीय परंपरा से पूजी जाती हैं मां, 25 सालों से से चली आ रही यह परंपरा
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लगभग 300 साल पहले डॉ राधाकृष्ण गणेशन के पूर्वज तमिलनाडु से बनारस आए तो वहां कि संस्कृति और परंपरा भी अपने साथ ले आए। अपने पूर्वजों की इस परंपरा को वो 25 सालों से निभा रहे हैं।
डॉ. राधाकृष्ण गणेशन
दरअसल, बीएचयू भारत कला भवन में कार्यरत डॉ. राधाकृष्ण गणेशन बड़े ही विधि विधान से नवरात्रि मनाते हैं। डॉ. गणेशन बताते हैं कि इस पूजा में मां ललिता और राजराजेश्वरी के पूजन की प्रथा है। जिन्हें ललित कलाओं की देवी माना जाता है। दक्षिण भारत में नवरात्र पर्व पर जन्माष्टमी के रूप में खिलौने सजाए जाते हैं, जिसे कोलू (खिलौने) कहते हैं।
अपनी इच्छा शक्ति एवं भक्ति के अनुसार लोग हर साल नई तरह से सीढ़ियां बनाते हैं और इन्हें विभिन्न तरीकों से सजाया जाता है। सबसे ऊंची सीढ़ी में चावल भर कुंभ रखे जाते हैं, जिनमें नारियल रखकर देवी का आह्वान किया जाता है। शेष बची सीढ़ियों को रंग-बिरंगे धार्मिक खिलौने एवं मूर्तियों से सजाया जाता है, ये नौ सीढ़ियां ही देवी के नौ रूप हैं।
यही नहीं सजाई गई सीढ़ियों के नीचे हर दिन नया कोलम अल्पनाएं बनाई जाती हैं। इस पर्व में घर के लोग घर-घर जाकर कोलू देखने के लिए आमंत्रित करते हैं।