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Navratri 7th Day Maa Kalratri: तीन नेत्रों वाली देवी मां कालरात्रि की इस विधि से करें पूजा, जानें शुभ मुहूर्त

Sun, 02 Oct 2022 11:39 AM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Sun, 02 Oct 2022 11:39 AM IST
सार

शास्त्रों में इस बात का भी वर्णन मिलता है कि आज के दिन माता कालरात्रि के मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए, इससे भूत-बाधाओं से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं माता कालरात्रि का स्वरूप, पूजा विधि और ,मंत्र। जानिए, क्या है मां कालरात्रि की पूजा पूजा की तिथि, शुभ मुहूर्त और मंत्र... 

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Navratri 7th Day Maa Kalratri Worship Maa Kalratri the three eyed goddess with this method
शारदीय नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर माता कालरात्रि का श्रृंगार। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शारदीय नवरात्रि का आज सातवां दिन है। नवरात्रि में सातवें दिन महासप्तमी पड़ती है। इस दिन मां दुर्गा की सातवीं स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जाती है। सदैव शुभ फल देने के कारण इनको शुभंकरी भी कहा जाता है। मां कालरात्रि दुष्टों का विनाश करने के लिए जानी जाती हैं, इसलिए इनका नाम कालरात्रि है। मां दुर्गा की सातवीं स्वरूप मां कालरात्रि तीन नेत्रों वाली देवी हैं। कहा जाता है जो भी भक्त नवरात्रि के सांतवें दिन विधि-विधान से मां कालरात्रि की पूजा करता है, उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।

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शास्त्रों में इस बात का भी वर्णन मिलता है कि आज के दिन माता कालरात्रि के मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए, इससे भूत-बाधाओं से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं माता कालरात्रि का स्वरूप, पूजा विधि और ,मंत्र। जानिए, क्या है मां कालरात्रि की पूजा पूजा की तिथि, शुभ मुहूर्त और मंत्र... 

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Navratri 7th Day Maa Kalratri Worship Maa Kalratri the three eyed goddess with this method
सातवां स्वरूप मां कालरात्रि - फोटो : amar ujala
मां कालरात्रि का स्वरूप 
कहा जाता है कि मां दुर्गा को कालरात्रि का रूप शुम्भ, निशुम्भ और रक्तबीज को मारने के लिए लेना पड़ा था। देवी कालरात्रि का शरीर अंधकार की तरह काला है। इनके श्वास से आग निकलती है। मां के बाल बड़े और बिखरे हुए हैं। गले में पड़ी माला बिजली की तरह चमकती रहती है। मां के तीन नेत्र ब्रह्मांड की तरह विशाल व गोल हैं। मां के चार हाथ हैं, जिनमें एक हाथ में खडग अर्थात तलवार, दूसरे में लौह अस्त्र, तीसरे हाथ अभय मुद्रा में है और चौथा वरमुद्रा में है।

पूजा विधि
सप्तमी तिथि के दिन ब्रह्म मुहूर्त में प्रातः स्नान करने के बाद पूजा आरंभ करनी चाहिए। स्नान के बाद माता के सामने घी का दीपक जलाएं। उन्हें लाल रंग के फूल अर्पित करें। मां कालरात्रि की पूजा में मिष्ठान, पंच मेवा, पांच प्रकार के फल, अक्षत, धूप, गंध, पुष्प और गुड़ नैवेद्य आदि का अर्पण किया जाता है। 
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