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वाराणसीः 51 शक्तिपीठों में से एक है विशालाक्षी मंदिर, नवरात्र के पांचवे दिन मां के दर्शन को उमड़े भक्त

Mon, 11 Oct 2021 03:58 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Mon, 11 Oct 2021 03:58 PM IST
सार

 विशाल नेत्रों वाली मां विशालाक्षी का यह स्थान मां सती के 51 शक्ति पीठों में से भी एक है।  शारदीय नवरात्र की पंचमी पर सोमवार को  विशालाक्षी गौरी के दर्शन के लिए भक्तों का रेला उमड़ पड़ा।

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Navratri 2021 5th day Vishalakshi Mata temple shaktipeeth varanasi long line for worship
विशालाक्षी माता का मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिंदुओं की सात पवित्र पुरियों में से एक काशी को मंदिरों एवं घाटों का नगर कहा जाता है। ऐसा ही एक मंदिर है काशी विशालाक्षी मंदिर, जिसका वर्णन देवी पुराण में मिलता है।  विशाल नेत्रों वाली मां विशालाक्षी का यह स्थान मां सती के 51 शक्ति पीठों में से भी एक है।  शारदीय नवरात्र की पंचमी पर सोमवार को  विशालाक्षी गौरी के दर्शन के लिए भक्तों का रेला उमड़ पड़ा।

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बड़ी तादाद में भक्तों ने कतारबद्ध होकर देवी के दरबार में सुख-समृद्धि के लिए आराधना की। मंदिर परिसर से लेकर गलियों तक हर तरफ जयकारे गूंजे। तड़के चार बजे मंगला आरती के बाद पट खुलते ही भक्त आगे बढ़ने लगे। ललिता घाट से होकर लाहौरी टोला होते हुए गली में एक लाइन लगी थी तो दूसरी कतार त्रिपुरा भैरवी होते हुए धर्मकूप के पास से।
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महिलाओं ने सुहाग की चूडि़यां और सिंधौरा मां के दरबार में अर्पित कीं। इधर, जैतपुरा स्थित स्कंदमाता के दरबार में हाजिरी लगाने के लिए भक्त लगातार पहुंच रहे हैं। शीतला घाट पर शीतला माता मंदिर के अलावा दुर्गाकुंड में दुर्गामाता के दर्शन के लिए सुबह से भीड़ लगी है

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मां विशालाक्षी का महत्व

काशी के नव शक्ति पीठों में मां विशालाक्षी का महत्वपूर्ण स्थान है। मीरघाट पर गलियों से होते हुए पहुंचने पर धर्मेश्वर महादेव के निकट ही मां विशालाक्षी का भव्य मंदिर स्थित है। मान्यता के अनुसार इस स्थान पर मां सती का कर्ण कुण्डल और उनकी आंख गिरी थी। जिससे इस स्थान की महिमा और महात्म्य दोनों काफी बढ़ गए।  शास्त्रों के अनुसार काशी के कर्ताधर्ता बाबा विश्वनाथ मां विशालाक्षी के मंदिर में विश्राम करते हैं। इनका महत्व कांची की मां (कृपा दृष्टा) कामाक्षी और मदुरै की (मत्स्य नेत्री) मीनाक्षी के समान है। 

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