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फर्जीवाड़े में फंसा नारायण साईं, चुनाव लड़ने पर लगा ग्रहण
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 14 Feb 2017 07:24 PM IST
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narayan sai
- फोटो : अमर उजाला
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बलात्कार के आरोप में जेल में बंद नारायण सांई के वाराणसी के शिवपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने पर ग्रहण लग गया है। नारायण सांई की ओर से मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए फार्म छह भरकर आवेदन किया गया था। जांच में पता चला कि वह तीन साल से सूरत जेल में है।
ऐसे में उनका नाम सूची में नहीं जोड़ा जा सकता है। उनका आवेदन खारिज कर दिया गया है। चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, यूपी के किसी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए यूपी के किसी भी जिले में मतदाता सूची में नाम होना आवश्यक है।
नामांकन करने के लिए अब दो दिन ही शेष है। ऐसे में नारायण सांई के नामांकन करने और चुनाव लड़ने पर ग्रहण लगा गया है।
बीते गुरुवार को नारायण सांई की ओर से उनके प्रतिनिधि धर्मेंद्र सिंह ने शिवपुर के रिटर्निंग आफिसर से नामांकन पत्र लिया था। धर्मेंद्र सिंह ने खुद के लिए भी शिवपुर से ही चुनाव लड़ने के लिए फार्म लिया है।
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ट्रेजरी चालान फार्म लेकर स्टेट बैंक से दस हजार रुपये जमानत राशि जमा करने के बाद दिखाकर नामांकन पत्र लिया। दोनों को ओजस्वी पार्टी से चुनाव लड़ना था।
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ऐसे में उनका नाम सूची में नहीं जोड़ा जा सकता है। उनका आवेदन खारिज कर दिया गया है। चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, यूपी के किसी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए यूपी के किसी भी जिले में मतदाता सूची में नाम होना आवश्यक है।
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नामांकन करने के लिए अब दो दिन ही शेष है। ऐसे में नारायण सांई के नामांकन करने और चुनाव लड़ने पर ग्रहण लगा गया है।
बीते गुरुवार को नारायण सांई की ओर से उनके प्रतिनिधि धर्मेंद्र सिंह ने शिवपुर के रिटर्निंग आफिसर से नामांकन पत्र लिया था। धर्मेंद्र सिंह ने खुद के लिए भी शिवपुर से ही चुनाव लड़ने के लिए फार्म लिया है।
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ऐसे पकड़ में आया फर्जीवाड़ा
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- फोटो : अमर उजाला
शिवपुर के रिटर्निंग ऑफिसर सुशील कुमार गौड़ ने जांच के दौरान नारायण साईं का नाम जुड़वाने संबंधी आवेदन खारिज कर दिया।
दरअसल, नारायण साईं के लोगों ने उसका फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवा लिया था।
मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए इसी निवास पत्र को आधार बनाया गया था।
जांच में यह गड़बड़ी सामने आई है। जब नारायण सांई तीन साल से जेल में बंद हैं तो उनका निवास प्रमाण पत्र कैसे बनाया गया। फर्जी तरीके से निवास प्रमाण मामले में एसडीएम पिंडरा अविनाश कुमार ने नायब तहसीलदार को जांच सौंपी है।
दरअसल, नारायण साईं के लोगों ने उसका फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवा लिया था।
मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए इसी निवास पत्र को आधार बनाया गया था।
जांच में यह गड़बड़ी सामने आई है। जब नारायण सांई तीन साल से जेल में बंद हैं तो उनका निवास प्रमाण पत्र कैसे बनाया गया। फर्जी तरीके से निवास प्रमाण मामले में एसडीएम पिंडरा अविनाश कुमार ने नायब तहसीलदार को जांच सौंपी है।