नक्कटैया: तीन किमी में 13 घंटे लगा मेला, 70 से ज्यादा लाग विमान निकले; उमड़े पूर्वांचल भर लोग
Nakkataiya 2025: रामायण, महाभारत और शिवमहापुराण के प्रसंगों पर आधारित लाग विमान खास थे। तीन किमी में फैले मेला क्षेत्र में टिमटिमाते रंग-बिरंगी झालरों से आकर्षक सजावट हुई थी। रात ढलने के साथ ही मेले की रंगत बढ़ती जा रही थी।
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विश्वप्रसिद्ध रतजगा लक्खा मेला चेतगंज की नक्कटैया में शुक्रवार को निकलीं झांकियों ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का संदेश दिया, वहीं पहलगाम के दर्द को भी उकेरा। वीर शिवाजी पर केंद्रित झांकियां भी उनकी गौरवगाथा का एहसास करा रही थीं। 70 से अधिक स्वांग और लगग विमान में देव दर्शन भी हुए।
चेतगंज श्रीरामलीला समिति की ऐतिहासिक नक्कटैया के 139वें संस्करण उल्लास, उमंग और भक्ति में सराबोर रही। मेला देखने के लिए पूर्वांचल भर से लोगों की भीड़ रही। घरों की खिड़कियों, बरामदों और छतों पर महिलाओं-बच्चों का हुजूम नक्कटैया का जुलूस देखने के लिए सारी रात डटा रहा।
चेतगंज चौराहे पर लीला स्थल पर विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी, एमएलसी विनीत सिंह पहुंचे थे। उन्होंने प्रभु के श्रीराम के स्वरूपों के दर्शन किए। वहीं, शूर्पणखा के नाक कटने की लीला हुई। खर-दूषण की झांकी के साथ जुलूस रात में 12 बजे के बाद मलदहिया से पिशाच मोचन होते हुए चेतगंज थाने के सामने पहुंचा। यहां जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार और पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने उद्घाटन किया।
गूंजा जय श्रीराम
समिति के अध्यक्ष अजय गुप्ता बच्चू, वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेंद्र प्रसाद, तनुज पांडेय आदि पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। जुलूस चेतगंज से लहुराबीर, रामकटोरा चौराहा, सेनपुरा, बेनियाबाग मोड़, बेलबाबा, मंसाराम फाटक आदि मार्गों से होते पुन: भोर में चेतगंज चौराहे पर प्रभु श्रीराम के रथ के पास पहुंचा, झांकियों को विराम दिया गया। शाम सात बजे से सुबह आठ बजे तक चले मेले में इलाहाबाद, मिर्जापुर, जौनपुर, भदोही, आजमगढ़ आदि जिलों से लाग विमान आए थे। बेहतर झांकी के लिए प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार दिए गए।
देव स्वरूपों में दिखे कलाकार
नक्कटैया जुलूस में लाग विमानों के अलावा देवस्वरूप धारण कर कलाकारों का समूह नृत्य करते हुए चल रहा था। शिव पार्वती, गणेश-कार्तिकेय, महाकाल, हनुमान जी, श्रीराधा-कृष्ण आदि देवों के स्वरूप धारण कर कलाकार कलाकारी दिखा रहे थे। दुर्गा-काली के मुखौटे लगाकर तलवारबाजी का करतब भी देखते बन रहा था। अंगारों के खेल ने भी सभी को रोमांचित किया।