फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Nagpanchami seven snakes seen in Kashi the serpent god is worshipped

नागपंचमी: काशी में होते हैं 7 नागों के दर्शन, पूजे गए नागदेवता; गूंजा- छोटे गुरु का, बड़े गुरु का नाग ले लो...

Fri, 09 Aug 2024 10:20 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Fri, 09 Aug 2024 10:20 AM IST
सार

Varanasi News: शुक्रवार को नागपंचमी के अवसर पर काशी के विभिन्न शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। तेज बारिश के बीच भक्तों ने बाबा विश्वनाथ समेत तमाम शिवालयों पर दर्शन-पूजन किया। वहीं अखाड़ों में कुश्ती खेले गए।

विज्ञापन
Nagpanchami seven snakes seen in Kashi the serpent god is worshipped
काशी में पूजे गए नागदेवता। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नागों की पूजा का पर्व नागपंचमी श्रावण शुक्ल पंचमी को मनाई गई। सिद्धयोग में नागदेवता की पूजा से वंशवृद्धि के साथ ही सुख-समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है। काशी में नागलोक के नागदेवता भी विराजमान हैं। नागपंचमी पर नागों के दर्शन का विधान है। हर साल श्रावण शुक्ल पंचमी के दिन काशी में पांचों नाग के द्वारा स्थापित शिवलिंग की दर्शन पूजन यात्रा होती है।

विज्ञापन


नागपंचमी का पर्व शुक्रवार को सिद्धयोग में मनाया गया। इसके साथ ही काशी की गलियों में आज बड़े गुरु का नाग ले लो, छोटे गुरु का नाग ले लो... भी गूंज रहा था। काशी महात्म्य के अनुसार शेषनाग, वासुकी, तक्षक, कर्कोटक, कम्बल, अश्वेतर और शखंचूड़ नाग के दर्शन-पूजन का विधान है।
विज्ञापन




दारुकावन क्षेत्र के जैतपुरा में शिवगण कर्कोटक नाग द्वारा स्थापित शिवलिंग कर्कोटकेश्वर महादेव के रूप में जाना जाता है। काशी खंड के अनुसार कर्कोटनामा नागोऽस्ति गन्धर्वेश्वरपूर्वतः, तत्र कर्कोटवापी च लिङ्ग कर्कोटकेश्वरम्। तस्यां वाप्यां नरः स्नात्वा कर्कोटेशं समर्च्य च। कर्कोटनागमाराध्य नागलोके महीयते।। 
विज्ञापन
विज्ञापन


यानी गंधर्वेश्वर की पूर्व ओर कर्कोटक नाग, कर्कोट वापी और कर्कोटकेश्वर लिंग विराजमान हैं। जो उस वापी में स्नान करके कर्कोटकेश्वर का पूजन और कर्कोटक नाग की आराधना करता है, वह नागलोक में पूजित होता है। कर्कोटनागो यैर्दृष्टस्तद्वाप्यां विहितोदकैः। क्रमते न विषं तेषां देहे स्थावरजङ्गमम।।



यानी जो लोग उस बावली में स्नान करके कर्कोट नाग के दर्शन करते हैं, उनके शरीर में कोई भी विष नहीं चढ़ता। कुछ पुराणों के अनुसार नागों के प्रमुख पांच कुल थे अनंत, वासुकी, तक्षक, कर्कोटक और पिंगला। कुछ पुराणों के अनुसार नागों के अष्टकुल में वासुकी, तक्षक, कुलक, कर्कोटक, पद्म, शंख, चूड़, महापद्म और धनंजय हैं।



नाग पता दर्शन का फल

  • शेषनाग मणिकर्णिका तीर्थ के समीप सभी कामनाओं का फल देने वाले हैं। दर्शन पूजन से रोगों से भय दूर होता है।
  • वासुकी सिंधिया घाट के ऊपर कामनाओं का फल देने वाले हैं
  • वासुकी काशीपुरा चौराहे पर रानी बेतिया के बाड़े में कामनाओं का फल देने वाले हैं
  • कांबल मणिकर्णिकेश्वर के बगल में विषों को हरने वाला और विद्या प्रदान करते हैं
  • आश्वत्तर मणिकर्णिकेश्वर के बगल में विषों को हरने वाला और विद्या प्रदान करते हैं
  • तक्षक बड़ी पियरी पर औघड़ नाथ तकिया के समीप सर्प भय दूर करते हैं।
  • कर्कोटक जैतपुरा नागकूप नागलोक में पूजित होने का वर देते हैं
  • शंखचूड़ दारानगर रोड पर रत्नेश्वर के पीछे कालसर्प का भय नहीं रहता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed