फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   nagpanchami 2019 special in varanasi

नाग पंचमी : छोटे गुरु ने दुनिया को दिया योग का संदेश, नागकूप पर महर्षि पतंजलि ने रचा योगसूत्र

Sun, 04 Aug 2019 03:36 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 04 Aug 2019 03:36 PM IST
विज्ञापन
nagpanchami 2019 special in varanasi
नाग पंचमी। - फोटो : अमर उजाला

काशी के छोटे गुरु ने ही दुनिया को योग का संदेश दिया था। योग के आठ अंगों को काशी के जैतपुरा मोहल्ले में ही एक सूत्र में पिरोया गया था। महर्षि पाणिनी के शिष्य और साक्षात शेषनाग के अवतार माने जाने वाले महर्षि पतंजलि ने काशी में ही योगसूत्र की रचना की थी। इससे पहले योग का ज्ञान श्रुतियों और स्मृतियों में बिखरा हुआ था। योगसूत्र में महर्षि पतंजलि ने मन को एकाग्र करने और ईश्वर में लीन होने का विधान बताया है।

विज्ञापन


काशी विद्वत परिषद के महामंत्री डॉ रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि काशी में महर्षि पतंजलि को छोटे गुरु के नाम से पुकारा जाता है। काशी में सावन माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि यानी नागपंचमी के दिन पूजा के लिए नागों का चित्र बांटने के दौरान छोटे गुरु का, बड़े गुरु का नाग लो भाई की गूंज सुनाई देती है। इसमें बड़े गुरु महर्षि पाणिनी हैं वहीं छोटे गुरु के रूप में महर्षि पतंजलि को पुकारा जाता है।
विज्ञापन


मान्यता है कि महर्षि पतंजलि साक्षात भगवान शेषनाग के अवतार हैं। नागकूप पर ही नागपंचमी के दिन विद्वानों के बीच शास्त्रार्थ की परंपरा का निर्वहन किया जाता है। महर्षि पतंजलि एक महान चिकित्सक भी थे, इन्हें ही दुनिया की पहली डॉक्टरी की किताब चरक संहिता का प्रणेता भी माना जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इन्हें रसायन विद्या का विशिष्ट आचार्य भी माना जाता है। अभ्रक, धातुयोग और लौहशास्त्र महर्षि पतंजलि की ही देन है। इन्होंने महर्षि पाणिनी के अष्टाध्यायी का महाभाष्य भी लिखा है। इसके साथ ही आयुर्वेद के कई ग्रंथों की रचना का श्रेय भी महर्षि पतंजलि को ही  जाता है।

मध्यकाल में खो गई थी विद्या :
महर्षि पतंजलि द्वारा रचित योगसूत्र की लोकप्रियता का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि मध्यकाल में ही इसका तकरीबन 40 भारतीय भाषाओं सहित जावा तथा अरबी भाषा में भी अनुवाद किया गया था। यह महान ग्रंथ 12वीं से 19वीं शताब्दी तक मुख्यधारा से गायब हो चुका था जिसे 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश काल के दौरान दोबारा ढूंढा गया और धीरे-धीरे पूरी दुनिया में इसे स्वीकार किया जाने लगा। आज आलम ये है कि पूरी दुनिया रोगों से मुक्ति के लिये अगर किसी एक विद्या पर पूरी तरह आशा भरी निगाहों से देख रही है तो वह योगसूत्र है जिसे तकरीबन दो हजार साल पहले  महर्षि पतंजलि ने लिखा था।

योग के आठ अंग :
यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed