काशी में राग रंग का शुभारंभ: तीन दिवसीय कार्यक्रम में पहले दिन शास्त्रीय संगीत की विधाओं की हुई प्रस्तुति
काशी विश्वनाथ धाम यात्रा के तहत आयोजित कार्यक्रमों की माला में राग रंग समारोह का शुभारंभ बुधवार को हुआ। समारोह के पहले दिन शास्त्रीय संगीत घरानों के दिग्गज कलाकारों ने शिरकत की।
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वाराणसी के पद्मविभूषण गिरिजा देवी सांस्कृतिक संकुल गीत और संगीत की स्वरलहरियों से झंकृत हो उठा। श्री काशी विश्वनाथ धाम यात्रा के तहत तीन दिवसीय राग रंग की शुरूआत हुई। शास्त्रीय संगीत के घरानों के सम्मेलन में देश भर के संगीत घरानों के दिग्गज कलाकारों ने शिरकत की। कार्यक्रम का शुभारंभ धर्मार्थ कार्य मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी, पद्मश्री डॉ. राजेश्वर आचार्य, पद्मश्री रजनीकांत तथा पद्मभूषण पं. साजन मिश्र ने दीप जलाकर किया।
केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी तथा संस्कृति विभाग व धर्मार्थ विभाग की ओर से आयोजन किया जा रहा है। राग रंग समारोह की पहली प्रस्तुति ग्वालियर घराने की गायिका डॉ. मीता पंडित एवं विदुषी सुधा रघुरामन की युगलबंदी रही।
हिंदुस्तानी एवं कर्नाटक गायन के युगल गायन का आरंभ हुआ तीरथ को सब करे...से इसके बाद राग भोपाली एवं दक्षिणी पद्धति में मोहनम राग में बद्ध रचना जय जय देव हरे... सुनाकर भक्तिरस से सिक्त किया। साथ में तराना और तिल्लाना की प्रस्तुति से समापन हुआ। तबले पर पं. कुबेर मिश्र, मृदंगम पर एम बी चंद्रशेखर तथा हारमोनियम पर पं. धर्मनाथ मिश्र ने संगत की। बांसुरी पर पं. जी रघुरामन और तानपुरा राजश्रीनाथ ने साथ दिया।
दूसरी प्रस्तुति फर्रुखाबाद घराने के ख्यातिलब्ध कलाकार पं. अनिंदो चैटर्जी व सुपुत्र अनुब्रत चैटर्जी के तबला ओर उस्ताद मुराद अली खां के सारंगी वादन की रही। दोनो ने विविध तालों की विविध लयकारियों को अनोखे अंदाज में प्रस्तुत करते हुए श्रोताओ का ह्रदय विभोर किया।
कलाकारों ने उठान, कायदा रेला की कुशल प्रयुक्ति से आनंदित किया । तीसरी प्रस्तुति बनारस घराने के ख्यात कलाकार पद्मभूषण पं. साजन मिश्र व उनके शिष्य व सुपुत्र स्वरांश मिश्र की रही। एकताल में निबद्ध बंदिश कौन गत भईली...सुनाकर रससिक्त किया। रूपक में तराना के बाद समापन जमुना जल सुनाकर किया। तबला संगति शुभ महाराज एवं तानपुरा संगति सागर मिश्र व मोहित तिवारी की और सारंगी पर संगत विनायक सहाय की रही।
अंतिम प्रस्तुति में रोनू मजूमदार के बांसुरी वादन तथा पं. तरुण भट्टाचार्य के संतूर वादन की जुगलबंदी ने मनमोह लिया। तबले पर उस्ताद फजल कुरैशी एवं उस्ताद अकरम खान ने संगत की। व्यवस्था में सहयोग अतुल सिंह एवं संजय ने किया। संचालन डॉ. प्रीतेश आचार्य ने किया। इस दौरान डॉ. सुभाषचंद्र यादव व लवकुश द्विवेदी, राजू दास मौजूद रहे।
पुष्प के समान है राग रंग समारोह