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पद्मभूषण पं. सामता प्रसाद मिश्र की पुण्यतिथि पर संगीत की श्रद्धांजलि
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तबले के बेताज बादशाह पद्मभूषण पं. सामता प्रसाद मिश्र उर्फ गुदई महाराज को तबले की थाप और कथक की लयकारियों से श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया। सोमवार को तालांजलि में कलाकारों ने ऑनलाइन प्रस्तुतियों से आभासी दुनिया के मंच पर गॉड आफ तबला गुदई महाराज को नमन किया।
सोमवार को दो दिवसीय तालांजलि का शुभारंभ पं. गुदई महाराज के चित्र पर उनके पौत्र गौरव मिश्र ने माल्यार्पण से किया। इसके बाद नई दिल्ली से पंडित जयशंकर मिश्र और उनके पुत्र ऋषि राज ने तबला सम्राट को तालांजलि अर्पित की। उन्होंने रूपक ताल में गत, फर्द, रेला, बांट, तिहाई बजाई। इसके बाद उन्होंने बनारस के ना धीं धीं ना से पंडित गुदई महाराज को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
दूसरी प्रस्तुति में देहरादून से शारदा ध्यानी कथक के साथ आभासी दुनिया के मंच पर पधारीं। पद्मविभूषण पं. बिरजू महाराज व बनारस घराने के पंडित रविशंकर मिश्र की शिष्या शारदा ने कथक की मनमोहक भावभंगिमाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। शारदा ने कार्यक्रम की शुरुआत शिव वंदना नागेंद्रहाराय... से की। इसके बाद पारंपरिक कथक में तीन ताल पर उठान, टुकड़ा, गत की प्रस्तुतियां दी। शारदा ने गत, भाव और राग मालकौंस में तराना की प्रस्तुति से विराम दिया। संचालन सीमा केसरी ने किया।
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सोमवार को दो दिवसीय तालांजलि का शुभारंभ पं. गुदई महाराज के चित्र पर उनके पौत्र गौरव मिश्र ने माल्यार्पण से किया। इसके बाद नई दिल्ली से पंडित जयशंकर मिश्र और उनके पुत्र ऋषि राज ने तबला सम्राट को तालांजलि अर्पित की। उन्होंने रूपक ताल में गत, फर्द, रेला, बांट, तिहाई बजाई। इसके बाद उन्होंने बनारस के ना धीं धीं ना से पंडित गुदई महाराज को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
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दूसरी प्रस्तुति में देहरादून से शारदा ध्यानी कथक के साथ आभासी दुनिया के मंच पर पधारीं। पद्मविभूषण पं. बिरजू महाराज व बनारस घराने के पंडित रविशंकर मिश्र की शिष्या शारदा ने कथक की मनमोहक भावभंगिमाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। शारदा ने कार्यक्रम की शुरुआत शिव वंदना नागेंद्रहाराय... से की। इसके बाद पारंपरिक कथक में तीन ताल पर उठान, टुकड़ा, गत की प्रस्तुतियां दी। शारदा ने गत, भाव और राग मालकौंस में तराना की प्रस्तुति से विराम दिया। संचालन सीमा केसरी ने किया।
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