फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Munshi Prem Jayanti today: Past future and present are seen in Premchand

मुंशी प्रेमचंद जयंती आज: प्रेमचंद में नजर आता है भूत, भविष्य और वर्तमान

Sat, 31 Jul 2021 12:07 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sat, 31 Jul 2021 12:07 PM IST
सार

मुंशी प्रेमचंद की जंयती की पूर्व संध्या पर उनके पैतृक गांव लमही में लमही एक विरासत विषय पर चर्चा हुई। जहां हिंदी के प्रख्यात लेखक डॉ. अवधेश प्रधान ने शुक्रवार को मुंशी प्रेमचंद को दो भाषाओं को जोड़ने वाले महान सूत्रधार बताया।

विज्ञापन
Munshi Prem Jayanti today: Past future and present are seen in Premchand
मुंशी प्रेमचंद। फाइल - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

प्रेमचंद जयंती हिंदी समाज का सांस्कृतिक उत्सव है। मुंशीजी दो भाषाओं को एक साथ जोड़ने वाले महान साहित्यिक सूत्रधार हैं। उन्होंने हिंदी और उर्दू दोनों ही साहित्य विधाओं में आधुनिकता और यथार्थ वाद का प्रवर्तन किया। भारतीय जीवन की नियति को निर्धारित करने वाले किसान वर्ग के सबसे बड़े पक्षकार प्रेमचंद एक ऐसा आईना हैं जिसमें न सिर्फ हमारे समाज का अतीत और वर्तमान दिखता है बल्कि भविष्य के संकेत भी छिपे हैं।

विज्ञापन


यह बातें हिंदी के प्रख्यात लेखक डॉ. अवधेश प्रधान ने शुक्रवार को मुंशी प्रेमचंद लमही एक विरासत विषयक चर्चा के दौरान कहीं। सामाजिक संस्था काशी कला कस्तूरी की ओर से आयोजित चर्चा में डा. शबनम खातून के साथ साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की लमही में पहुंच कर क्लेश होता है। यह सोच कर कलेजा मुंह को आ जाता है कि आखिर हिंदी वाले अपने साहित्यकारों और उनकी साहित्यिक थातियों का सम्मान करना नहीं जानते।
विज्ञापन


साहित्यकारों के नाम पर बड़ी-बड़ी बातें करना। जयंती-पुण्यतिथि पर उन्हें याद कर लेना मात्र ही हमारा दायित्व नहीं है। डा. प्रधान ने कहा कि हम लोग बातें खूब करते हैं, भरपूर मालाएं चढ़ाते हैं, बड़े बड़े भवन बनाते हैं लेकिन शोध और अध्ययन की दिशा में कोई पुख्ता कदम नहीं उठाते। बंगाल ने रवींद्रनाथ टैगोर, नजरुल और विद्यासागर जैसे साहित्यकारों की स्मृतियों को सिर पर बैठाया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

तमिलनाडु ने सुब्रमण्यम भारती तो कर्नाटक ने कोयम्पू की स्मृतियों को ऊंचा स्थान दिया है। उत्तर भारत में ऐसी कोई परंपरा नजर नहीं आती। चर्चा में शामिल रंगकर्मी एएम. हर्ष ने मुंशी प्रेमचंद के लिए दक्षिण भारतीय पाठकों में अपार प्रेम और सम्मान के वृत्तांत सुनाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed