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पप्पू नेपाली की हत्या के बाद 'पीके' और मुन्ना बजरंगी में बढ़ी थी दूरियां

Tue, 10 Jul 2018 02:37 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Tue, 10 Jul 2018 02:37 PM IST
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Munna Bajrangi and PK singh distance after Pappu nepali murder
- फोटो : अमर उजाला
माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या को लेकर उसकी पत्नी सीमा सिंह ने जिन प्रदीप सिंह उर्फ पीके सिंह पर आरोप लगाया है वो गाजीपुर जिले के मूल निवासी हैं। प्रदीप के पिता जीएन सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस के रिटायर्ड डीएसपी हैं।
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प्रदीप, उनके पिता सहित पूरा परिवार लखनऊ में रहता है। पुलिस सूत्रों के अनुसार प्रदीप का छोटा भाई पप्पू नेपाली और बजरंगी के बीच कभी करीबी संबंध हुआ करते हुआ करते थे। इस वजह से बजरंगी और पप्पू नेपाली के पूरे परिवार के बीच बेहद मधुर संबंध थे।
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पप्पू नेपाली पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मारा गया था। इसे लेकर बजरंगी और प्रदीप के परिवार के बीच दूरियां बन गई। बताया जाता है कि हाल के वर्षों में बजरंगी के साले पुष्पजीत सिंह उर्फ पीजे और प्रदीप के बीच विवाद हुआ। इसके बाद वाराणसी के शिवपुर स्थित एक जमीन को लेकर प्रदीप और बजरंगी की पत्नी सीमा के बीच विवाद हुआ।
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जेलों में बंद चर्चित नामों की धुकधुकी बढ़ी

Munna Bajrangi and PK singh distance after Pappu nepali murder
उत्तर प्रदेश की जेलों में मुन्ना बजरंगी की तरह पूर्वांचल के कई चर्चित नाम कैद हैं। इनमें से एमएलसी बृजेश सिंह शिवपुर स्थित सेंट्रल जेल में और उनका करीबी त्रिभुवन सिंह मिर्जापुर जेल में निरुद्ध है।

आगरा जेल में मऊ सदर विधायक मुख्तार अंसारी निरुद्ध हैं। वहीं, सुभाष ठाकुर फतेहगढ़ जेल में निरुद्ध हैं। करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार के मामले में मिर्जापुर जेल में चंदौली का निलंबित एआरटीओ आरएस यादव निरुद्ध है।

बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद प्रदेश की जेलों में सतर्कता और निगरानी बढ़ाने का निर्देश सरकार स्तर से दिया गया है। सोमवार को जिला जेल के जेलर पीके त्रिवेदी ने बताया कि  बंदियों और मुलाकातियों की तलाशी में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

बंदीरक्षकों को मुस्तैदी से ड्यूटी करने का निर्देश दिया गया है। बता दें कि जिला जेल और सेंट्रल जेल की क्षमता से ढाई गुना ज्यादा बंदी कैद हैं। लाठियों के सहारे बंदीरक्षक इनकी निगरानी करते हैं।

ऐसे हालात के कारण अप्रैल, 2016 में जिला जेल में साढ़े सात घंटे तक पथराव, आगजनी और फायरिंग हुई थी। इस दौरान एक डिप्टी जेलर को अधमरा कर तत्कालीन जेल अधीक्षक के गले में फंदा डालकर बंदियों ने बंधक बना लिया था।

"पाप का घड़ा भरता है और आज भर गया"

Munna Bajrangi and PK singh distance after Pappu nepali murder

मुन्ना बजरंगी की हत्या की सूचना मिलने पर सोमवार को अनिल राय के परिवार के लोगों को सुकून मिला। अनिल राय के बेटे धूपचंडी मुहल्ला निवासी प्रशांत राय ने पत्रकारों से कहा कि जिस तरह से मेरे पापा और चाचा की हत्या के बाद हम लोग रोए और पूरा परिवार बिखर सा गया।

आज भी पापा और चाचा की हत्या के जिक्र मात्र से पूरा परिवार सिहर उठता है। हमारे जैसे ही आज बजरंगी का परिवार बिलख रहा है। पापा का घड़ा भरता है और आज भर गया। प्रशांत ने कहा कि वो हत्या जैसी आपराधिक घटनाओं के समर्थक नहीं हैं लेकिन बजरंगी जैसे पापियों का अंत ऐसे ही होता है।

बता दें कि 1997 में नरिया में सुनील राय और 2002 में उनके बड़े भाई अनिल राय की मलदहिया चौराहा के पास बजरंगी और उसके गुर्गों ने हत्या कर दी थी। बनारस सहित पूर्वांचल के जरायम जगत में कारपोरेट कल्चर को अपनाने वाला पहला बदमाश मुन्ना बजरंगी था।

इसी वजह से उसके पास सर्वाधिक संख्या मेें शूटर थे। बजरंगी और उसके गिरोह के बदमाशों को करीब से जानने वाले पुलिसकर्मियों के अनुसार वो अपने शूटरों को निजी कंपनियों की तरह हर महीना निर्धारित तनख्वाह देता था। इसके अतिरिक्त शूटरों को ब्रांडेड कंपनी के जूते और कपड़े मुहैया कराता था। रंगदारी की लंबी रकम हाथ लगने पर वसूलने वाले शूटर को उसका एक निश्चित हिस्सा देता था। 

इस वजह से बजरंगी ने 1995 से 2008 के बीच शूटरों की अच्छी-खासी खेप खड़ी की थी। इस बीच तेजी से एनकाउंटर हुए और कई शूटर मारे गए तब जाकर बजरंगी का गिरोह थोड़ा कमजोर पड़ा। 2009 में गिरफ्तार होने के बाद बजरंगी के पास पहले जैसे शार्प शूटर नहीं रह गए थे। बताया जाता है कि बजरंगी गिरोह की देखादेखी पूर्वांचल की अन्य गैंगों ने भी कारपोरेट कल्चर को अपनाने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुए।

डिप्टी जेलर की डांट से नाराज होकर करा दिया था हत्या

Munna Bajrangi and PK singh distance after Pappu nepali murder
अनिल त्यागी मुन्ना बजरंगी - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी जिला जेल के डिप्टी जेलर अनिल त्यागी ने बजरंगी को डांट दिया था तो 2013 में उसने उनकी हत्या करा दी थी। यह खुलासा धनबाद के पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह हत्याकांड के आरोपी चंदन सिंह ने 2017 में एसटीएफ के सामने किया था।

बताया जाता है कि जिला जेल के निरीक्षण के दौरान पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियोें से बजरंगी को बहस करता देख डिप्टी जेलर ने उसे अन्य बंदियों के सामने फटकारते हुए कस कर डांट दिया था। इसके साथ ही औकात मेें रहने को कहा था।

इसे बजरंगी ने अपने अपमान समझा और डिप्टी जेलर की हत्या की साजिश रचा। 23 नवंबर 2013 को डिप्टी जेलर भोजूबीर स्थित जिम रोजाना की तरह गए तो बजरंगी के गुर्गों ने उनकी हत्या कर दी। डिप्टी जेलर की हत्या में पुलिस ने मऊ निवासी बदमाश रमेश सिंह काका की भी अहम भूमिका बताई थी।
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