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प्रयागराज में हुए एनकाउंटर से सकते में मुख्तार अंसारी के गुर्गे, सताने लगा मौत का डर

Fri, 05 Mar 2021 02:28 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Fri, 05 Mar 2021 02:28 PM IST
सार

प्रयागराज में हुई पुलिस मुठभेड़ में अमजद उर्फ अंगद और वकील पांडेय उर्फ राजीव के मारे जाने जाने के बाद से जरायम की दुनिया में सनसनी फैल गई है। एनकाउंटर को मुख्तार गैंग पर लगाम कसने का प्रभावी कदम माना जा रहा है। कानून व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन चुके इन दोनो अपराधियों को सफाया करना पुलिस के लिए खासी सफलता माना जा रहा है। क्योंकि ये दोनों ने पूर्व की आपराधिक वारदातों से प्रदेश सरकार की खासी किरकिरी कराई थी।

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Mukhtar gang troubled by criminal vakeel Pandey encounter in Prayagraj
मुख्तार अंसारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

50 हजार के इनामी बदमाश वकील पांडेय उर्फ राजीव उर्फ राजेश और उसके साथी अमजद उर्फ अंगद उर्फ पिंटू उर्फ डॉक्टर के प्रयागराज में मुठभेड़ में मारे जाने की वारदात से अपराध जगत से जुड़े पूर्वांचल के लोगों में हड़कंप मच गया है। एसटीएफ की कार्रवाई से अंतरराज्यीय गिरोह के सरगना मऊ सदर विधायक मुख्तार अंसारी के गुर्गे सकते में हैं। साथ ही लोग यह भी मान रहे हैं कि बागपत जेल में मारे गए कुख्यात बजरंगी ने अपने गिरोह में जिन बदमाशों को शामिल किया था उनका इसी तरह से एक-एक कर सफाया होगा।

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मुख्तार अंसारी के बेहद खास रहे मुन्ना बजरंगी को सबसे पहले करारा झटका तब लगा था जब 5 मार्च 2016 को उसके साले पुष्पजीत सिंह उर्फ पीजे की लखनऊ में हत्या कर दी गई थी। पीजे बजरंगी के लिए अवैध वसूली करने के साथ ही जरायम जगत से कमाए गए पैसे को रियल इस्टेट सेक्टर में निवेश करता था।
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बजरंगी इस दुख से उबर रहा था कि एक दिसंबर 2017 को लखनऊ में उसके दाएं हाथ कहलाने वाले विश्वेश्वरगंज निवासी मोहम्मद तारिक की हत्या कर दी गई। इसके सात महीने बाद 9 जुलाई 2018 को बागपत जेल में बजरंगी ही गैंगवार में मारा गया।
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जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या से घबराए मुख्तार के खिलाफ अचानक एक नाटकीय घटनाक्रम में पंजाब में बिल्डर से रंगदारी मांगने का मुकदमा दर्ज किया गया। साथ ही जनवरी 2019 में पंजाब पुलिस मुख्तार को बांदा जेल से अपने साथ ले गई।

9 अगस्त 2020 को लखनऊ में मुख्तार के लिए जान देने का संकल्प लेने वाला मऊ निवासी राकेश पांडेय उर्फ हनुमान पुलिस मुठभेड़ में ढेर हो गया। मुख्तार व बजरंगी के करीबी बदमाश वकील और अमजद ठिकाने बदल-बदल कर खुद को सुरक्षित रखे हुए थे, लेकिन एसटीएफ से आमना-सामना होने पर वे भी ढेर हो गए।
 

रुद्रेश, रिंकू और दिलीप संभाल रहे बजरंगी गिरोह की कमान
पुलिस सूत्रों के अनुसार बजरंगी गिरोह की कमान उसके करीबी रहे तीन बदमाश संभाल रहे हैं। यह तीनाें मुख्तार और बजरंगी गिरोह के शूटरों को पैसे देकर भाड़े पर हत्या कराने के साथ ही रंगदारी वसूलते हैं। इनमें पहला नाम भदोही जिले के गोपीगंज कोतवाली के बर्जी गांव निवासी रुद्रेश उपाध्याय उर्फ पिंटू का है। पिंटू 2015 से फरार है और उस पर 50 हजार का इनाम घोषित है।

दूसरा बदमाश प्रयागराज के सोरांव क्षेत्र के मोरहू गांव का निवासी रिंकू सिंह उर्फ धर्मेंद्र है। रिंकू मिर्जापुर से गाजीपुर जेल शिफ्ट होने के बाद मौजूदा समय में धनबाद के पूर्व डिप्टी मेयर की हत्या के आरोप में रांची कारागार में बंद है। तीसरा बदमाश प्रयागराज के लवायन कला गांव निवासी चाका विकास खंड का पूर्व ब्लाक प्रमुख दिलीप मिश्रा है।

दिलीप इन दिनों फतेहगढ़ जेल में बंद है। रिंकू और दिलीप सलाखों के पीछे से भी सक्रिय रहते हैं और पूर्वांचल से लेकर झारखंड तक अपने गुर्गों के सहारे आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिलाना इनके लिए आसान है।
 

कई ऐसे भी गुर्गे जिनका कहीं पता नहीं
मुख्तार और बजरंगी गिरोह के कई ऐसे गुर्गे हैं जिनके बारे में पुलिस, क्राइम ब्रांच और एसटीएफ को कोई जानकारी ही नहीं है। इनमें से कपिलेश्वरगली निवासी 50 हजार के इनामी बदमाश विश्वास शर्मा उर्फ नेपाली के बारे में 2009 से पुलिस को कोई जानकारी नहीं है। 50 हजार के इनामी बदमाश चौबेपुर क्षेत्र के धन्नीपुर पचरावा निवासी अजीम अहमद की तलाश पुलिस को 2012 से है।

पुलिस का यह भी कहना है कि मुख्तार और बजरंगी गिरोह का खास गुर्गा रहा मुन्नू तिवारी अब मिर्जापुर में रहता है और जरायम जगत से दूरी बनाया हुआ है। इसके अलावा बनारस, जौनपुर, भदोही और गाजीपुर सहित पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में मुख्तार और बजरंगी के कई अन्य करीबी थे जो तेजी से बदलते दौर के साथ जरायम जगत से दूरी बना कर सफेदपोश बन गए हैं।

अमजद पर 26 और वकील पर 22 मुकदमे
भदोही के राम सहायपुर निवासी अमजद हिस्ट्रीशीटर था। उस पर हत्या सहित अन्य गंभीर आरोपों में भदोही, प्रयागराज, बनारस, मिर्जापुर और झारखंड के धनबाद में 26 मुकदमे दर्ज हैं। वहीं, 50 हजार के इनामी बदमाश रहे भदोही के गोपीगंज निवासी हिस्ट्रीशीटर वकील पांडेय पर भदोही, सोनभद्र, प्रयागराज, बनारस, मिर्जापुर और झारखंड के धनबाद में हत्या सहित अन्य आरोपों में 22 मुकदमे दर्ज हैं।

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