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Mukhtar Ansari: सामने आई अवधेश राय की हत्या की अहम वजह, मुख्तार अंसारी के गढ़ में दी थी चुनौती
Tue, 06 Jun 2023 10:56 AM IST
किरन रौतेला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: किरन रौतेला
Updated Tue, 06 Jun 2023 10:56 AM IST
सार
नब्बे के दशक में मुख्तार अंसारी गिरोह ने बनारस में पैर पसारना शुरू किया तो उनकी राह में दबंग किस्म के अवधेश राय एक बड़ा रोड़ा थे। मुख्तार अंसारी गिरोह बनारस के व्यापारियों से रंगदारी मांगता था तो अवधेश राय ढाल बन कर खड़े हो जाते थे।
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अवधेश राय हत्याकांड में मुख्तार अंसारी दोषी करार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कोयले के कारोबार और सरकारी ठेकों में दखल के साथ ही जिला जेल में मुख्तार अंसारी के गुर्गों की पिटाई चेतगंज थाने के हिस्ट्रीशीटर अवधेश राय की हत्या की अहम वजह बनी थी। हत्या सहित अन्य आपराधिक आरोपों में दर्ज 19 मुकदमों के आरोपी रहे अवधेश राय का दबदबा वाराणसी से गाजीपुर होते हुए पूर्वांचल में तेजी से बढ़ रहा था।
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नब्बे के दशक में मुख्तार अंसारी गिरोह ने बनारस में पैर पसारना शुरू किया तो उनकी राह में दबंग किस्म के अवधेश राय एक बड़ा रोड़ा थे। मुख्तार अंसारी गिरोह बनारस के व्यापारियों से रंगदारी मांगता था तो अवधेश राय ढाल बन कर खड़े हो जाते थे। नतीजतन, अवधेश राय को रास्ते से हटाने की साजिश रचकर सुनियोजित तरीके से तीन अगस्त 1991 को उनकी हत्या उनके घर के सामने ही कर दी गई।
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- फोटो : अमर उजाला
दरअसल, वर्ष 1990 में अवधेश राय और एक पूर्व एमएलसी के बड़े भाई वाराणसी की जिला जेल में बंद थे। उस दौरान मुख्तार अंसारी के गिरोह के कुछ सदस्य भी इसी जेल में थे। पूर्व एमएलसी के बड़े भाई से मुख्तार अंसारी के गुर्गों से किसी बात पर नोकझोंक हुई और बात मारपीट तक पहुंच गई। पूर्व एमएलसी के बड़े भाई ने अवधेश राय से मदद मांगी। इस पर अवधेश राय ने मुख्तार अंसारी के साथियों की सलाखों के पीछे जमकर पिटाई की। इस घटना के बाद मुख्तार अंसारी इस कदर खार खाया कि अवधेश को ठिकाने लगाने की ठान ली। पहले रेकी कराई गई, गोली मारकर अवधेश की हत्या कर दी गई। इसके बाद बदमाश अपना वाहन छोड़कर गलियों से ही होते हुए भाग निकले।
अवधेश के आपराधिक इतिहास को बचाव पक्ष ने बनाया था ढाल
न्यायालय में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अवधेश राय पर हत्या सहित अन्य आपराधिक मामलों में दर्ज 19 मुकदमों को अपना ढाल बनाया था। न्यायालय में अभियुक्त के अधिवक्ता की ओर से चेतगंज थाने में दर्ज 10, सिगरा थाने के छह और कैंट के दो और शिवपुर में एक मुकदमे का विवरण भी प्रस्तुत किया था। इसमें मुख्तार की ओर से यह कहा गया कि अवधेश राय का आतंक समाज में व्याप्त था और उनके कई दुश्मन थे। इस घटना से पहले दुश्मनों ने मृतक के विरुद्ध कई मुकदमे दर्ज कराए थे।
अवधेश के आपराधिक इतिहास को बचाव पक्ष ने बनाया था ढाल
न्यायालय में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अवधेश राय पर हत्या सहित अन्य आपराधिक मामलों में दर्ज 19 मुकदमों को अपना ढाल बनाया था। न्यायालय में अभियुक्त के अधिवक्ता की ओर से चेतगंज थाने में दर्ज 10, सिगरा थाने के छह और कैंट के दो और शिवपुर में एक मुकदमे का विवरण भी प्रस्तुत किया था। इसमें मुख्तार की ओर से यह कहा गया कि अवधेश राय का आतंक समाज में व्याप्त था और उनके कई दुश्मन थे। इस घटना से पहले दुश्मनों ने मृतक के विरुद्ध कई मुकदमे दर्ज कराए थे।
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अवधेश राय हत्याकांड में मुख्तार अंसारी दोषी करार
- फोटो : अमर उजाला
मुख्तार ने लगाया था उप नगर प्रमुख पर आरोप
सुनवाई के दौरान मुख्तार अंसारी के पक्ष ने खुद के बचाव में यह कहा था कि अवधेश राय की रंजिश उप नगर प्रमुख अनिल सिंह से थी। ऐसे में अनिल सिंह ने ही अवधेश राय की हत्या कराई होगी। इसमें बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया था कि अवधेश राय की हत्या के बाद अनिल सिंह की हत्या हुई। यह दोनों गैंग के बीच बदले की कार्रवाई थी। हालांकि अदालत ने साक्ष्य के अभाव में इस तर्क को आधारहीन माना है।
मुख्तार की फरारी को न्यायालय ने माना सुसंगत तथ्य
न्यायालय में अभियोजन ने यह साबित किया कि घटना के बाद अभियुक्त मुख्तार अंसारी फरार हो गया था। उसके खिलाफ सीआरपीसी की 82 व 83 की कार्रवाई भी हुई थी। न्यायालय ने मुख्तार अंसारी के इस व्यवहार को साक्ष्य माना है और अपराध सिद्ध करने में इसे सुसंगत तथ्य के रूप में स्वीकार किया है।
सुनवाई के दौरान मुख्तार अंसारी के पक्ष ने खुद के बचाव में यह कहा था कि अवधेश राय की रंजिश उप नगर प्रमुख अनिल सिंह से थी। ऐसे में अनिल सिंह ने ही अवधेश राय की हत्या कराई होगी। इसमें बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया था कि अवधेश राय की हत्या के बाद अनिल सिंह की हत्या हुई। यह दोनों गैंग के बीच बदले की कार्रवाई थी। हालांकि अदालत ने साक्ष्य के अभाव में इस तर्क को आधारहीन माना है।
मुख्तार की फरारी को न्यायालय ने माना सुसंगत तथ्य
न्यायालय में अभियोजन ने यह साबित किया कि घटना के बाद अभियुक्त मुख्तार अंसारी फरार हो गया था। उसके खिलाफ सीआरपीसी की 82 व 83 की कार्रवाई भी हुई थी। न्यायालय ने मुख्तार अंसारी के इस व्यवहार को साक्ष्य माना है और अपराध सिद्ध करने में इसे सुसंगत तथ्य के रूप में स्वीकार किया है।