Mukhtar Ansari: जेल में बीती बाहुबली मुख्तार की एक तिहाई उम्र, सलाखों के पीछे से भी जरायम जगत में रहा धौंस
Mukhtar Ansari News: मऊ दंगे के बाद मुख्तार अंसारी ने 25 अक्तूबर 2005 को गाजीपुर में समर्पण किया था और वहीं की जिला जेल में दाखिल हुआ था। जिसके बाद भाजपा के तत्कालीन विधायक कृष्णा नंद राय की हत्या हो गई। तभी से माफिया का जेल से निकलना नहीं हुआ।
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माफिया मुख्तार अंसारी की उम्र एक तिहाई जेल के सलाखों के पीछे ही बीत गई। उसके 60वें जन्मदिन से 25 दिन पहले सोमवार को वाराणसी की एमपी-एमएलए कोर्ट ने अवधेश राय हत्याकांड मामले में मुख्तार को उम्रकैद की सजा सुनाई है। मऊ सदर से पांच बार विधायक रहा मुख्तार अंसारी 20 साल से अधिक का समय जेल में काट चुका है।
मऊ दंगे के बाद मुख्तार अंसारी ने 25 अक्तूबर 2005 को गाजीपुर में समर्पण किया था और वहीं की जिला जेल में दाखिल हुआ था। जिसके बाद भाजपा के तत्कालीन विधायक कृष्णा नंद राय की हत्या हो गई। तभी से माफिया का जेल से निकलना नहीं हुआ। मुख्तार जब से जेल में बंद है तब से लेकर अब तक उस पर गंभीर आपराधिक धाराओं में 25 मुकदमे दर्ज हुए हैं।
जेल में रहने के बाद भी 25 से ज्यादा मुकदमे
अब तक कुल छह मामलों सजा के बाद तो जेल से बाहर निकलने की उम्मीद नहीं के बराबर है। माफिया मुख्तार अंसारी बीते साढ़े 17 साल से जेल की सलाखों के पीछे है। बावजूद इसके जरायम जगत में उसका एक अलग दबदबा बना हुआ है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वो जब से जेल में बंद है तब से लेकर अब तक उस पर गंभीर आपराधिक धाराओं में 25 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए हैं।
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इनमें से आठ मुकदमे हत्या के आरोप से संबंधित हैं। मुख्तार अंसारी के खिलाफ हत्या का आखिरी मुकदमा बीते जनवरी महीने में 22 वर्ष पुराने उसरी चट्टी हत्याकांड को लेकर दर्ज किया गया। उसरी चट्टी हत्याकांड में मारे गए ठेकेदार मनोज राय के पिता शैलेंद्र राय ने मुख्तार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
जेल में बीती तीन टर्म की विधायकी
माफिया मुख्तार अंसारी की विधायकी भी जेल में बीती है। मऊ सदर सीट से तीन बार लगातार वर्ष 2002 से 2017 तक विधायक रहा, लेकिन इस दौरान वह जेल से बाहर नहीं आया। इस दौरान वह जेल में रहते हुए वह चुनाव लड़ा और विधायक बना। वर्ष 1996 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचने वाले मुख्तार ने 2002, 2007, 2012 और फिर 2017 में भी बसपा के टिकट पर मऊ सदर सीट से जीत हासिल की। इनमें से 2007, 2012 और 2017 के चुनाव उन्होंने जेल में रहते हुए लड़ा।
मुख्तार अंसारी को पहली बार उम्रकैद की सजा
बांदा जेल में कैद मुख्तार अंसारी को पहली बार आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इससे पहले उसे अधिकतम 10 साल की सजा मिली थी। बीते आठ महीने 15 दिन में उसे छह मुकदमों में सजा सुनाई जा चुकी है। मुहम्मदाबाद के फाटक निवासी मुफ्तार अंसारी चार दशक से जरायम की दुनिया में है। इस दौरान कई चर्चित आपराधिक घटनाओं में मुख्तार अंसारी का नाम आया।
बीते छह-सात साल से गर्दिश में सितारे
पूर्वांचल में कभी जिस मुख्तार अंसारी के इशारे पर सरकारें अपना निर्णय बदल लेती थी, आज उसी मुख्तार का बना बनाया हुआ साम्राज्य ढह रहा है। ये सिलसिला बीते छह-सात वर्षों में तेज हुआ है। एक-एक कर उसके खासमखाश मारे मुठभेड़ में ढेर हुए। पिछले छह-सात साल में अंतरराज्यीय गिरोह सरगना मऊ सदर विधायक मुख्तार को जितनी चोट पहुंची, उतना कभी भी वह नहीं पाया था। आर्थिक तौर पर चोट पहुंचाने के साथ ही उसके कई भरोसेमंदों को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया तो कोई आपसी गैंगवार में मारा गया। अब उसके करीबी भी गायब हो गए हैं।
मुख्तार का विधायक बेटा अब्बास और बहू निहत अंसारी जेल में है। पत्नी और छोटा बेटा फरार चले रहे हैं। हाल ही में बड़े भाई व गाजीपुर के सांसद रहे अफजाल अंसारी को 10 वर्ष जेल की सजा सुनाई गई है।