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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Muharram 68 days of mourning begin with sighting of Muharram moon month starts June 17 or 18 details here

Muharram: दीदार-ए-मुहर्रम के चांद के साथ गम में गुजारेंगे 68 दिन, 17 या 18 जून से शुरू महीना; जानें खास

Sun, 14 Jun 2026 02:50 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 14 Jun 2026 02:50 PM IST
सार

मुहर्रम का चांद दिखाई देने के साथ ही अकीदतमंद गम के माहौल में 68 दिन गुजारेंगे। 17 या 18 जून से पहला मुहर्रम शुरू होने की संभावना है। इस दौरान मजलिस, मातम और मर्सिया के जरिए शहीदाने कर्बला को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। विभिन्न इमामबाड़ों और अजाखानों में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।

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Muharram 68 days of mourning begin with sighting of Muharram moon month starts June 17 or 18 details here
मुहर्रम के जुलूस में कलाकारी दिखाता युवा। (सांकेतिक) - फोटो : संवाद

विस्तार

इस्लामिक नया साल मुहर्रम से शुरू होगा। 29 जिलहिज्जा को चांद के दीदार के साथ 17 जून से मुहर्रम माह शुरू होगा। अगर चांद नहीं दिखा तो अगले दिन 18 जून से इसकी शुरुआत होगी। 10 मुहर्रम (आशूरा) को शहर से लेकर गांव तक ताजियों के जुलूस निकाले जाएंगे। 

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16 जून को चांद देखा जाएगा। चांद दिखने के साथ ही शिया जमात गम-ए-हुसैन की याद में डूब जाएगी। 2 माह 8 दिन यानी 68 दिनों तक गम के साये में वक्त गुजरेगा। अजाखानों और शिया घरों में मजलिस, नौहा और मातम का सिलसिला शुरू हो जाएगा। दालमंडी से निकलने वाला जुलूस पुरानी रवायत के तहत निकाला जाएगा।
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इस्लामिक कैलेंडर के 12वें माह जिलहिज्जा में मुकद्दस हज की अदायगी और बकरीद का त्योहार बीतने के बाद अब मुहर्रम का महीना शुरू होगा, जो इस्लामी वर्ष का पहला माह है। मौलाना अमीन हुसैनी ने बताया कि चांद कमेटियां 16 जून को चांद की तस्दीक करेंगी। चांद दिखाई देने के साथ मुहर्रम का महीना शुरू हो जाएगा। 17 जून को पहला मुहर्रम होगा। अगर चांद नहीं दिखा तो 18 जून को पहला मुहर्रम होगा।

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मुहर्रम शुरू होते ही शिया जमात में मजलिस, मातम, नौहा और जुलूसों का सिलसिला शुरू हो जाएगा। दरगाहे फातमान, सरैया इमामबाड़ा, चौहट्टा लाल खां, बजरडीहा, शिवाला, मुकीमगंज, रामनगर और दुल्हीपुर आदि इलाकों के इमामबाड़े सजाए जाएंगे। ताबूत और ताजिए स्थापित किए जाएंगे। शहर और आसपास के क्षेत्रों में दर्जनभर से अधिक स्थानों पर कदीमी जुलूस और मजलिसें शुरू हो जाएंगी। वहीं, 8 मुहर्रम से इमाम चौकों पर ताजिए बैठाने का सिलसिला शुरू होगा। आशूरा के दिन इमाम हुसैन की याद में अकीदतमंद जुलूस निकालकर ताजियों को इमामबाड़ों में ठंड किया जाएगा। शहर के प्रसिद्ध ताजिए भी तैयार होने लगे हैं। 

5 व 8 मुहर्रम को निभाई जाएगी उस्ताद की रवायत : मुहर्रम की 5वीं और 8वीं तारीख को उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की रवायत निभाई जाएगी। उस्ताद इन दोनों दिनों के जुलूसों में शहनाई बजाते थे। उनकी इस परंपरा को उनके पोते और परिवार के अन्य सदस्य आगे बढ़ाते हुए जुलूस में शामिल होंगे और शहनाई पर उस्ताद के प्रसिद्ध नौहे पेश करेंगे।

40 घंटे और दुलदुल का उठेगा जुलूस
मुहर्रम के दौरान शहर में कई प्रमुख जुलूस निकाले जाएंगे। 1 से 10 मुहर्रम तक विभिन्न नामचीन जुलूस निकलेंगे। दालमंडी में तोड़फोड़ के बावजूद नाजिम जाफरी के आवास से जुलूस पुरानी रवायत के तहत ही उठाया जाएगा। मौलाना अमीन हैदर ने बताया कि उनके आवास पर जुलूस उठने का स्थान सुरक्षित है, इसलिए पहले की तरह ही जुलूस निकाला जाएगा। जबकि 40 घंटे का जुलूस औसानगंज से उठेगा। शिवपुर, कच्चीसराय और औसानगंज से दुलदुल का जुलूस, चौहट्टा लाल खां से मेहंदी का जुलूस तथा शिवाला से दूल्हे का जुलूस निकलेगा। 11 मुहर्रम को लुटे काफिले का जुलूस उठाया जाएगा।

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