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एमएसएमई दिवस: उद्यमियों के हुनर के आगे चुनौतियां भी नतमष्तक, काशी में डेढ़ हजार इकाइयों का जाल; जानें खास

Fri, 27 Jun 2025 05:51 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Fri, 27 Jun 2025 05:51 AM IST
सार

Varanasi News: बनारस के कई उत्पाद विदेशों में बड़े स्तर पर बाजार का हिस्सा बने हुए हैं। दिनोंदिन इनकी डिमांड भी बढ़ रही है। इसलिए इनका उत्पादन भी बढ़ाया जा रहा है। काशी में निवेश की बात करें तो औद्योगिक निवेश के लिए अन्य राज्य भी रुचि लेते हैं।

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MSME Day Challenges bow down to talent of entrepreneurs network of 1500 units in Kashi Know special
आईआईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरके चौधरी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

MSME Day 2025: अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले उद्यमियों के हुनर के आगे चुनौतियां कुछ नहीं हैं। काशी का उत्पाद ईंट हो या फिर कृषि यंत्र, बोरा से लेकर बनारसी साड़ी, कालीन और लकड़ी के खिलौने तक विदेश में बिक रहे हैं। ये काशी के उद्यमियों की मेहनत, नवाचार और काबिलियत है, जिसके दम पर देशभर में यहां के उत्पादों की जबरदस्त मांग है। इतना ही नहीं काशी में औद्योगिक निवेश के लिए अन्य राज्य भी रुचि लेते हैं। ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के तहत देशभर के 46 निवेशकों की इकाइयां काशी में आकार ले रही हैं।

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हरहुआ रिंग रोड फेज-टू किनारे पूर्वांचल का पहला ईंट भट्ठा है, जहां पीएनजी से भी ईंटे पकाई जाती हैं। यहां खास तरह की तैयार होने वाली ईंटें यूरोपीय देशों में निर्यात होती हैं। इसमें न तो काई लगती और न ही ईंटों में नमी पकड़ती है। ईंट निर्माता संघ के सदस्य ओपी बदलानी ईंटों का उत्पादन करते हैं।
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चांदपुर और रामनगर औद्योगिक क्षेत्र में कृषि यंत्रों का उत्पादन होता है। रोटावेटर, चारा मशीन, ओसानी पंखा, कोल्हू आदि उत्पाद तैयार होते हैं। कृषि यंत्र निर्माता और एसआईए के महासचिव नीरज पारिख ने बताया कि यहां के तैयार उत्पादों की मांग विभिन्न राज्यों समेत नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका तक है। वार्षिक व्यवसाय 300 से 350 करोड़ रुपये का है। इसमें 100 करोड़ का निर्यात होता है।

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MSME Day Challenges bow down to talent of entrepreneurs network of 1500 units in Kashi Know special
एमएसएमई। - फोटो : amar ujala

आईआईए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आरके चौधरी ने बताया कि पॉलीबैग से लेकर बनारसी साड़ी तक विदेश में अपनी अलग पहचान बना चुकी है। काशी समेत पूर्वांचल के उद्यमियों में कार्य करने की असीमित क्षमता है। बशर्ते कार्यों में विभागीय बाधाएं नहीं आनी चाहिए। पूर्वांचल निर्यातक संघ के अध्यक्ष रघु मेहरा ने बताया कि यूरोपीय देशों में भदोही और काशी में तैयार कालीन का बड़ा कारोबार है। विदेश में कालीन की मांग बहुत है।

खाद्य इकाइयों में पहचान बना रहा बनारस
करखियांव स्थित एग्रो पार्क में खानपान संबंधित इकाइयां है। यहां पारले जी, पेयपदार्थ, ब्रेड, चिप्स, चॉकलेट समेत अन्य ब्रांडेड बोतलबंद पानी का उत्पादन यहां के उद्यमी ही कर रहे हैं। देश की बड़ी कंपनियां भी काशी में निवेश कर रही हैं। एक अलग ही पहचान काशी के उद्यमियों की बन रही है।

जीबीसी की 46 इकाइयां ले रहीं आकार : ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के तहत 46 निवेशक अपनी इकाइयां काशी में स्थापित कर रहे हैं। फूड, होटल, अस्पताल, आबकारी, टेक्सटाइल, चिकित्सा समेत अन्य एमएसएमई इकाइयां जमीन पर आकार लेना शुरू कर दी हैं।

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