UP: सांसद धर्मेंद्र ने उठाया जातीय जनगणना का मुद्दा, गजट अधिसूचना में ओबीसी का स्पष्ट उल्लेख करने की मांग
Azamgarh News: धर्मेंद्र यादव ने सरकार से इस विषय पर स्थिति स्पष्ट करने, गजट अधिसूचना का शुद्धिकरण कर नया नोटिफिकेशन जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसा कदम उठाकर ही पिछड़े वर्ग के साथ न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है और उनकी आशंकाओं को दूर किया जा सकता है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
UP Politics: लोकसभा में मुख्य सचेतक एवं आजमगढ़ के सांसद धर्मेंद्र यादव ने जातीय जनगणना से जुड़े अहम मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि जारी गजट अधिसूचना में पिछड़े वर्ग (ओबीसी) का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाए, ताकि किसी प्रकार की अस्पष्टता न रहे।
सांसद ने अपने संबोधन की शुरुआत महान समाजवादी चिंतक राम मनोहर लोहिया, अमर शहीद भगत सिंह एवं राजगुरु को नमन करते हुए की। उन्होंने डॉ. लोहिया के प्रसिद्ध नारे “संसोपा ने बांधी गांठ – पिछड़े पावें सौ में साठ” का उल्लेख करते हुए कहा कि समाजवादी विचारधारा के तहत लंबे समय से जातीय जनगणना की मांग उठती रही है।
जातीय जनगणना की भी बात
धर्मेंद्र यादव ने कहा कि 30 अप्रैल 2025 को केंद्र सरकार द्वारा जातीय जनगणना कराने के निर्णय का देशभर में स्वागत किया गया था और इससे पिछड़े वर्ग को सामाजिक न्याय मिलने की उम्मीद जगी थी। लेकिन जनवरी 2026 में जारी गजट अधिसूचना का अध्ययन करने पर यह सामने आया कि उसमें पिछड़े वर्ग का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है, जो बेहद चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार के सार्वजनिक बयानों और आधिकारिक दस्तावेजों के बीच विरोधाभास नजर आता है, जिससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
सांसद ने वर्ष 2011 की जातीय जनगणना का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी पिछड़े वर्ग को अपेक्षित न्याय नहीं मिल सका था। इसी कारण आज भी यह वर्ग आशंकित है और सरकार से स्पष्टता की अपेक्षा कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार की मंशा वास्तव में सकारात्मक और पारदर्शी है, तो उसे तत्काल गजट अधिसूचना में संशोधन कर पिछड़े वर्ग को स्पष्ट रूप से शामिल करना चाहिए।