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हिंदू-मुस्लिम को लड़ाकर सियासत की रोटी सेंक रहे कुछ लोग:मदनी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 09 May 2017 06:24 PM IST
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बेनियाबाग में इस्लाहे मुआशरा में मौलाना अरशद मदनी को सुनने उमड़ा हुजूम
- फोटो : अमर उजाला
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वाराणसी के बेनियाबाग में सोमवार की रात आयोजित इस्लाहे मुआशरा में जमीअत उलेमा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि कुछ लोग हमारे मुल्क के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने की नापाक कोशिश कर रहे हैं।
उन लोगों को यह समझ लेना चाहिए कि अगर इस मुल्क में अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं रहेंगे तो बहुसंख्यक भी सुरक्षित नहीं रह पाएंगे। मौलाना ने कहा कि कुछ लोग हिंदू-मुस्लिम को लड़ाकर सियासत की रोटी सेंक रहे हैं। ऐसे लोगों को अपनी हरकतों से बाज आना चाहिए।
मौलाना ने कहा कि हिंदुस्तान ऐसा मुल्क है जहां सदियों से अलग-अलग मजहब, जाति, भाषा संस्कृति के मानने वाले रहते हैं। अनेकता में एकता ही इसे पूरी दुनिया में अलग पहचान देती है। ऐसे में हम सभी की जिम्मेदारी बनती है कि हम सब मिलकर लोकतंत्र की जड़ों को और मजबूत करने की कोशिश करें।
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कहा कि नफरत हमेशा मुहब्बत से खत्म होगी। मुसलमान अपने इखलाक को सुन्नत के मुताबिक कर लें तो दुनिया में नफरत की कोई गुंजाइश ही नहीं।
जमीअत उलेमा महाराष्ट्र के महासचिव मौलाना हलीमुल्लाह कासमी ने कहा कि हमें चाहिए कि शरीयत के बताए हुए तरीके पर चलते हुए साथ मिलकर रहें। सभी के साथ अच्छा सुलूक करें।
जमीअत उलेमा प्रदेश उपाध्यक्ष मौलाना नज्मे मोहम्मद कासमी ने कहा कि अगर हम दुनिया व आखिरत दोनों में कामयाबी चाहते हैं तो हमें चाहिए कि अल्लाह और उसके रसूल की बताई हुई बातें को अपनी जिंदगी में शामिल करें।
मौलाना नूरुल हसन कासमी और सदारत कर रहे मौलाना अब्दुल्लाह नासिर कासमी ने भी तकरीर की। जलसे का आगाज कारी रहमतुल्लाह इलाहाबादी के तिलावते कलाम पाक से हुआ। कारी महमूद आलम बलियावी ने नात पेश की।
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उन लोगों को यह समझ लेना चाहिए कि अगर इस मुल्क में अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं रहेंगे तो बहुसंख्यक भी सुरक्षित नहीं रह पाएंगे। मौलाना ने कहा कि कुछ लोग हिंदू-मुस्लिम को लड़ाकर सियासत की रोटी सेंक रहे हैं। ऐसे लोगों को अपनी हरकतों से बाज आना चाहिए।
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मौलाना ने कहा कि हिंदुस्तान ऐसा मुल्क है जहां सदियों से अलग-अलग मजहब, जाति, भाषा संस्कृति के मानने वाले रहते हैं। अनेकता में एकता ही इसे पूरी दुनिया में अलग पहचान देती है। ऐसे में हम सभी की जिम्मेदारी बनती है कि हम सब मिलकर लोकतंत्र की जड़ों को और मजबूत करने की कोशिश करें।
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कहा कि नफरत हमेशा मुहब्बत से खत्म होगी। मुसलमान अपने इखलाक को सुन्नत के मुताबिक कर लें तो दुनिया में नफरत की कोई गुंजाइश ही नहीं।
जमीअत उलेमा महाराष्ट्र के महासचिव मौलाना हलीमुल्लाह कासमी ने कहा कि हमें चाहिए कि शरीयत के बताए हुए तरीके पर चलते हुए साथ मिलकर रहें। सभी के साथ अच्छा सुलूक करें।
जमीअत उलेमा प्रदेश उपाध्यक्ष मौलाना नज्मे मोहम्मद कासमी ने कहा कि अगर हम दुनिया व आखिरत दोनों में कामयाबी चाहते हैं तो हमें चाहिए कि अल्लाह और उसके रसूल की बताई हुई बातें को अपनी जिंदगी में शामिल करें।
मौलाना नूरुल हसन कासमी और सदारत कर रहे मौलाना अब्दुल्लाह नासिर कासमी ने भी तकरीर की। जलसे का आगाज कारी रहमतुल्लाह इलाहाबादी के तिलावते कलाम पाक से हुआ। कारी महमूद आलम बलियावी ने नात पेश की।