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बीएचयू में एम्स जैसी सुविधा पर बढ़ा कदम, स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ हुआ करार

Thu, 21 Jun 2018 09:54 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी Updated Thu, 21 Jun 2018 09:54 AM IST
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MOU signed between BHU IMS and health ministry
नई दिल्ली में बैठक के बाद बीएचयू और स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच हुआ करार - फोटो : twitter
बीएचयू आईएमएस में एम्स जैसी सुविधाएं बढ़ाने का मामला एक कदम और आगे बढ़ गया है। नई दिल्ली में मंगलवार को नीति आयोग की हुई बैठक में बीएचयू और स्वास्थ्य मंत्रालय, एम्स और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के बीच करार हो गया।
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इसके बाद अगले महीने एम्स की टीम बीएचयू आएगी और यहां मांगों के अनुसार सुविधाओं सहित अन्य बिंदुओं पर मूल्यांकन करेगी। टीम की रिपोर्ट के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। एम्स की मांग लंबे समय से चल रही थी लेकिन प्रो. राकेश भटनागर के कार्यकाल में इसके लिए प्रयास तेजी से हुए।
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अब तक तीन बार नीति आयोग की हो चुकी बैठक में अलग-अलग बिंदुओं पर चर्चा, कागजातों की जांच और अन्य मुद्दों पर राय रखी जा चुकी है। मंगलवार को नीति आयोग की बैठक में आईएमएस निदेशक प्रो. वीके शुक्ल ने मंत्रालय के अधिकारियों से करार किया।
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कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने कहा कि  विश्वविद्यालय के लिए यह बड़ी उपलब्धि है। एम्स की सुविधा के लिए चल रहे प्रयास में बड़ी सफलता मिली है। एमओयू के बाद अब एम्स की टीम अगले महीने बीएचयू आकर आईएमएस और एम्स के बीच अंतर का अध्ययन कर रिपोर्ट देगी।

 

इसके बाद बीएचयू डीपीआर बनाकर स्वास्थ्य मंत्रालय एमएचआरडी को भेजेगा। बैठक में कुलपति के अलावा सर सुंदर लाल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओपी उपाध्याय के साथ ही नीति आयोग से डॉ. विनोद पाल, एमएचआरडी से आर सुब्रमण्यम, स्वास्थ्य मंत्रालय से प्रीति, यूजीसी चेयरमैन प्रो.डीपी सिंह आदि मौजूद रहे।

एम्स जैसी सुविधा पर लंबे समय से चल रही थी मांग

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बीएचयू आईएमएस को एम्स जैसी सुविधा दिए जाने की मांग लंबे समय से चल रही थी। अब एक महीने के भीतर तीन बार बैठक के बाद आखिर सुविधा का लाभ मिलने की उम्मीद जगी है। हालांकि बीएचयू प्रशासन की आधिकारिता को लेकर मामले में बात नहीं बन पा रही थी। अब सब कुछ अगले महीने होने वाले एम्स टीम के दौरे पर निर्भर है। 

विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से पूर्व कुलपति प्रो. पंजाब सिंह के समय से ही इसकी मांग चल रही थी लेकिन प्रशासनिक अधिकार को लेकर अड़चन लगा था। अब तक स्वास्थ्य मंत्रालय और बीएचयू की ओर से इस प्रस्ताव पर कई बार बातचीत हुई लेकिन हर बार मामला प्रशासनिक अधिकारिता को लेकर फंस जा रहा था।

मंत्रालय अपने अधीन रहने की बात कर रहा था जबकि बीएचयू अपना प्रशासनिक अधिकार नहीं देना चाहता था। बीएचयू मंत्रालय से धन मांगने के साथ ही उस पन नियंत्रण को तो तैयार था लेकिन प्रशासनिक अधिकार बीएचयू के होने को तैयार रहे।

सूत्रों की माने तो बीएचयू में एम्स बनाए जाने की घोषणा के बाद इसे एम्स का दर्जा दिए जाने की मांग उठी थी लेकिन बाद में यहां एम्स जैसी सुविधा की मांग उठी।

निर्णय पर विद्वानों ने जताई नाराजगी

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एम्स - फोटो : SELF
आईएमएस बीएचयू को एम्स जैसी सुविधा देने के मामले में गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति समेत कई विद्वानों ने नाराजगी जाहिर की है। पूर्व कुलपति प्रो. बीएम शुक्ल के आवास पर हुई बैठक में इस पर चर्चा की गई।

बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि विश्वविद्यालय से आईएमएस को किसी कीमत पर अलग नहीं होने दिया जाएगा। इसे विश्वविद्यालय के अधीन रहते हुए ही स्वास्थ्य मंत्रालय, एमएचआरडी की ओर से अनुदान दिया जाय।

आईएमएस के अलग होने से शिक्षा और अनुसंधान की अवधारणा लुप्त हो जाएगी। काशीवासियों का मालवीयजी और बीएचयू से भावनात्मक संबंध है, इसलिए किसी भी प्रकार का विघटन सहन नहीं होगा। बैठक में विज्ञान संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो.बच्चा सिंह, प्रो.ओएन श्रीवास्तव, प्रो. राधे मोहन सिंह, प्रो.विजय बहादुर सिंह, प्रो. लल्लन मिश्र आदि मौजूद रहे। 

एम्स जैसी सुविधा मिलने पर ये होगा लाभ

MOU signed between BHU IMS and health ministry
- अस्पताल में प्रति बेड मिलने वाला फंड बढ़ जाएगा
- आपरेशन और दवाइयां भी मुफ्त मिल सकती है। 
- अस्पताल में जांच की सुविधा भी बढ़ जाएगी
- शिक्षक-कर्मचारियों का वेतन भी बढ़ेगा।
- शैक्षणिक सुविधाएं भी बढ़ जाएंगी। 
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