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सफलता सिर्फ अंकों की मोहताज नहीं
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वाराणसी। यूपी बोर्ड परीक्षा में कम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को हताश व निराश होने की जरूरत नहीं है। मनोचिकित्सकों व मनोवैज्ञानिकों के अनुसार प्रतिस्पर्धी हो चली इस दुनिया में अंकों की कमी आपकी प्रतिभा को दबा नहीं सकती। अंदर छुपी रुचि व प्रतिभा आपको सफलता के शिखर पर पहुंचता है। इसलिए निराश होने की आवश्यकता नहीं है।
जिन छात्र-छात्राओं का मानक के अनुसार अंक नहीं आया है, तो उन्हें निराश व हताश होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि सिर्फ अंकों की कमी आपकी प्रतिभा को जज नहीं करता है। बल्कि आपके अंदर छुपी हुई रुचि, प्रतिभा और विश्वास आपको विभिन्न क्षेत्रों में सफल बनाता है। कम अंकों का अर्थ यह है कि आपने इस परीक्षा में क्या लिखा है। इससे आपके संपूर्ण जीवन का मूल्यांकन नहीं होता है। सतत प्रयास करते रहना ही जीवन की मूल सफलता है। -बनानी घोष, प्रवक्ता मनोवैज्ञानिक, मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र
कोई गम नहीं सब गेम है, डटे रहो, जीत तुम्हारी ही होगी। इस लाइन पर बढ़े, चले। अंक कम आने से छात्र-छात्राओं को चिंता या फिर बहुत घबराने की जरूरत नहीं है। मन में यह दृढ़ निश्चय जरूर होना चाहिए कि अब जो हुआ सो हुआ। आगे से और मेहनत करके इस कमी की दोगुनी भरपाई करनी है। -डॉ संजय गुप्ता, मनोचिकित्सक, बीएचयू
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असफल छात्र निराश न हों, शैक्षणिक जीवन के इन उतार-चढ़ाव का हौसले से सामना करें। घरेलू सहायता, शैक्षणिक सहायता व सामुदायिक समर्थन सफल शैक्षणिक परिणामों व छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। -डॉ स्वर्णलता, असिस्टेंट प्रोफेसर, मनोविज्ञान विभाग, बीएचयू
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जिन छात्र-छात्राओं का मानक के अनुसार अंक नहीं आया है, तो उन्हें निराश व हताश होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि सिर्फ अंकों की कमी आपकी प्रतिभा को जज नहीं करता है। बल्कि आपके अंदर छुपी हुई रुचि, प्रतिभा और विश्वास आपको विभिन्न क्षेत्रों में सफल बनाता है। कम अंकों का अर्थ यह है कि आपने इस परीक्षा में क्या लिखा है। इससे आपके संपूर्ण जीवन का मूल्यांकन नहीं होता है। सतत प्रयास करते रहना ही जीवन की मूल सफलता है। -बनानी घोष, प्रवक्ता मनोवैज्ञानिक, मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र
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कोई गम नहीं सब गेम है, डटे रहो, जीत तुम्हारी ही होगी। इस लाइन पर बढ़े, चले। अंक कम आने से छात्र-छात्राओं को चिंता या फिर बहुत घबराने की जरूरत नहीं है। मन में यह दृढ़ निश्चय जरूर होना चाहिए कि अब जो हुआ सो हुआ। आगे से और मेहनत करके इस कमी की दोगुनी भरपाई करनी है। -डॉ संजय गुप्ता, मनोचिकित्सक, बीएचयू
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असफल छात्र निराश न हों, शैक्षणिक जीवन के इन उतार-चढ़ाव का हौसले से सामना करें। घरेलू सहायता, शैक्षणिक सहायता व सामुदायिक समर्थन सफल शैक्षणिक परिणामों व छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। -डॉ स्वर्णलता, असिस्टेंट प्रोफेसर, मनोविज्ञान विभाग, बीएचयू