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मदर टेरेसा के संत बनने पर काशी में चहुंदिशि खुशियां
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 05 Sep 2016 01:04 AM IST
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मदर टेरेसा
- फोटो : Getty Images
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मदर टेरेसा को वेटिकन सिटी में संत की उपाधि से नवाजे जाने के बाद रविवार को काशी के गिरजाघरों में उत्सव सरीखा नजारा दिखा। मिशनरी के स्कूलों, अस्पतालों में खुशियां छा गईं। ईसाई समुदाय के लोगों में चहुंदिशि खुशी की लहर छा गई। हर कोई एक दूसरे से खुशी का इजहार करने के साथ ही बधाई देने में जुट गया। गिरजाघरों को रंग-बिरंगी लतरों, फूलों से सजाकर इस मौके को यादगार बनाया गया।
मदर टेरेसा को संत की उपाधि मिलने की घोषणा के बाद शहर के लाल गिरिजाघर चर्च समेत अन्य चर्चों में विशेष प्रार्थना सभाएं शुरू हो गईं। नृत्य, संगीत और परिचर्चाओं के माध्यम से मदर टेरेसा को याद किया गया। समाज सेवा में जीवन पर समर्पित रहने वाली मदर टेरेसा को संत बनाए जाने की खबर सुनने के बाद हर कोई उस क्षण का इंतजार कर रहा था। दोपहर करीब एक बजे वेटिकन सिटी से इसकी घोषणा होने के बाद लोग खुशी से झूम उठे। कैंटोमेंट स्थित लाल चर्च, सेंट मेरी, सीएनआई, रामकटोरा, सिगरा, गिरिजाघर आदि चर्चों में आयोजित विशेष प्रार्थना सभा में लोगों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी की।
उधर, सेंट जांस डीएल डब्ल्यू परिसर स्थित प्रार्थना भवन में फादर-सिस्टर आदि ने पूजा-अर्चना की। इस दौरान बाइबल पर आधारित सामूहिक गान-सामूहिक नृत्य के माध्यम से मदर टेरेसा के जीवनी पर प्रकाश डाला। प्रधानाचार्य फादर सुसाई राज ने कहा कि यह इसाई समुदाय के साथ ही समस्त देशवासियों के लिए गौरव की बात है। इस दौरान फादर श्रेयक, फादर जोसेफ, फादर विपलन सहित कई लोग मौजूद रहे। वहीं सेंट जांस स्कूल लेढ़ूपुर के प्रधानाचार्य ने कहा कि यह दिन मानवता की सेवा करने वालों के लिए बेहद अहम हो गया है। शिवाला स्थित मदर टेरेसा आश्रम में भी खुशियां जताई गई। मालूम हो कि मदर टेरेसा ने सात अक्तूबर 1950 को कोलकाता में मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की थी।
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काशी में मदर टेरेसा के नाम पर सड़क
काशी में अब संत मदर टेरेसा के नाम से सड़क जानी जाएगी। रविवार को कैंटोमेंट स्थित लाल चर्च में आयोजित समारोह के बाद इसकी घोषणा हुई। यहां चर्च के बगल से सेंट मेरीज स्कूल की ओर से जाने वाली सड़क का नाम टेरेसा के नाम पर करने का सांकेतिक चिन्ह भी लग गया। चर्च के फादर विजय शांति राज ने बताया कि दो दिन पहले ही कैंटोमेंट के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में इसका निर्णय हुआ था। अब आधिकारिक घोषणा होने से ईसाई समुदाय में खुशी है। बताया कि बनारस में अब तक कई बार मदर टेरेसा आ चुकी है। शिवाला और शिवपुर में मदर टेरेसा ने जरूरतमंद लोगों के लिए दो आश्रम भी खोला है। जिसमें बच्चों के साथ ही वृद्धजनों के रहने, खाने का पूरा प्रबंध है।
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मदर टेरेसा को संत की उपाधि मिलने की घोषणा के बाद शहर के लाल गिरिजाघर चर्च समेत अन्य चर्चों में विशेष प्रार्थना सभाएं शुरू हो गईं। नृत्य, संगीत और परिचर्चाओं के माध्यम से मदर टेरेसा को याद किया गया। समाज सेवा में जीवन पर समर्पित रहने वाली मदर टेरेसा को संत बनाए जाने की खबर सुनने के बाद हर कोई उस क्षण का इंतजार कर रहा था। दोपहर करीब एक बजे वेटिकन सिटी से इसकी घोषणा होने के बाद लोग खुशी से झूम उठे। कैंटोमेंट स्थित लाल चर्च, सेंट मेरी, सीएनआई, रामकटोरा, सिगरा, गिरिजाघर आदि चर्चों में आयोजित विशेष प्रार्थना सभा में लोगों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी की।
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उधर, सेंट जांस डीएल डब्ल्यू परिसर स्थित प्रार्थना भवन में फादर-सिस्टर आदि ने पूजा-अर्चना की। इस दौरान बाइबल पर आधारित सामूहिक गान-सामूहिक नृत्य के माध्यम से मदर टेरेसा के जीवनी पर प्रकाश डाला। प्रधानाचार्य फादर सुसाई राज ने कहा कि यह इसाई समुदाय के साथ ही समस्त देशवासियों के लिए गौरव की बात है। इस दौरान फादर श्रेयक, फादर जोसेफ, फादर विपलन सहित कई लोग मौजूद रहे। वहीं सेंट जांस स्कूल लेढ़ूपुर के प्रधानाचार्य ने कहा कि यह दिन मानवता की सेवा करने वालों के लिए बेहद अहम हो गया है। शिवाला स्थित मदर टेरेसा आश्रम में भी खुशियां जताई गई। मालूम हो कि मदर टेरेसा ने सात अक्तूबर 1950 को कोलकाता में मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की थी।
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काशी में मदर टेरेसा के नाम पर सड़क
काशी में अब संत मदर टेरेसा के नाम से सड़क जानी जाएगी। रविवार को कैंटोमेंट स्थित लाल चर्च में आयोजित समारोह के बाद इसकी घोषणा हुई। यहां चर्च के बगल से सेंट मेरीज स्कूल की ओर से जाने वाली सड़क का नाम टेरेसा के नाम पर करने का सांकेतिक चिन्ह भी लग गया। चर्च के फादर विजय शांति राज ने बताया कि दो दिन पहले ही कैंटोमेंट के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में इसका निर्णय हुआ था। अब आधिकारिक घोषणा होने से ईसाई समुदाय में खुशी है। बताया कि बनारस में अब तक कई बार मदर टेरेसा आ चुकी है। शिवाला और शिवपुर में मदर टेरेसा ने जरूरतमंद लोगों के लिए दो आश्रम भी खोला है। जिसमें बच्चों के साथ ही वृद्धजनों के रहने, खाने का पूरा प्रबंध है।